NEET UG 2026: फर्जीवाड़ा किया तो खैर नहीं; AI से बनाई OMR शीट पर NTA की दो टूक
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने नीट यूजी 2026 के उम्मीदवारों को फर्जी या एआई से बनी ओएमआर शीट शिकायत में जमा करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की कड़ी चेतावनी दी है।

मेडिकल की पढ़ाई करने का ख्वाब देखने वाले लाखों नौजवानों के लिए नीट का इम्तिहान किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होता। दिन-रात एक करके छात्र इस परीक्षा की तैयारी करते हैं। लेकिन इस साल नीट-यूजी 2026 का सफर विवादों, हंगामों और कई तरह के सवालों से भरा रहा है। अब इसी कड़ी में एक नया और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने नीट उम्मीदवारों और उनके माता-पिता के लिए एक बेहद सख्त एडवाइजरी जारी की है। अगर कोई भी छात्र अपने नंबरों को लेकर शिकायत दर्ज कराते वक्त फर्जी या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से बनाई गई ओएमआर (OMR) शीट जमा करता है, तो उसके खिलाफ सीधा कानूनी एक्शन लिया जाएगा। यह चेतावनी उन तमाम लोगों के लिए एक बड़ा अलार्म है जो शॉर्टकट या गलत तरीकों का इस्तेमाल करके सिस्टम की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश कर रहे हैं।
क्या है पूरा ओएमआर विवाद?
दरअसल, 16 जुलाई को जबसे मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम के नतीजे घोषित हुए हैं, तब से कई छात्रों ने अपने उम्मीद वाले स्कोर और असल नतीजों में फर्क होने की शिकायतें दर्ज करानी शुरू कर दी थीं। देखते ही देखते एजेंसी के पास शिकायतों का अंबार लग गया। लेकिन जब NTA ने इन शिकायतों की बारीकी से जांच-पड़ताल शुरू की, तो हैरान कर देने वाली सच्चाई सामने आई। वेरिफिकेशन प्रोसेस में यह साफ तौर पर पकड़ में आया कि शिकायतों के साथ जो ओएमआर शीट सबूत के तौर पर दी जा रही हैं, उनमें से कई बिल्कुल जाली हैं। कुछ शातिर लोगों ने तो इन्हें तैयार करने में एआई तकनीक तक का सहारा लिया है ताकि ये असली जैसी दिखें।
इस धोखेबाजी को देखते हुए NTA ने अपना रुख कड़ा कर लिया है। एजेंसी का साफ कहना है कि वे हर एक शिकायत को बहुत करीब से मॉनिटर और स्क्रूटनी कर रहे हैं। NTA ने अपनी एडवाइजरी में कहा, "छात्रों और उनके अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे जांच के लिए सिर्फ ओरिजिनल ओएमआर ही जमा करें। किसी भी तरह की फर्जी या एआई-जनरेटेड ओएमआर जमा करने पर शिकायतकर्ता के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।" ऐसे में पैरेंट्स और छात्रों को यह हिदायत दी गई है कि वे किसी भी बहकावे में आकर गलत कदम न उठाएं क्योंकि इससे उनका पूरा करियर बर्बाद हो सकता है।
आपको याद दिला दें कि इस बार नीट की परीक्षा कितनी उठापटक से गुजरी है। शुरुआत में यह परीक्षा 3 मई को करवाई गई थी। लेकिन जैसे ही पेपर लीक की खबरें सामने आईं और देश भर में बवाल मचा, तो 12 मई को इम्तिहान रद्द करने का फैसला लिया गया। लाखों बच्चों की मेहनत पर पानी फिरने के इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, इसकी जांच सीबीआई के हाथों में सौंप दी गई। जांच एजेंसी अभी भी इस पूरे रैकेट की तह तक जाने में जुटी हुई है। इसके बाद, 21 जून को दोबारा कड़ी सुरक्षा के बीच री-एग्जाम करवाया गया। आखिरकार कई हफ्तों के इंतजार के बाद 16 जुलाई को रिजल्ट जारी हुए, जिसमें करीब 11.21 लाख उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है।
अब ऑनलाइन (CBT) होगा नीट का इम्तिहान
लगातार हो रहे इन विवादों और पेपर लीक जैसे गंभीर आरोपों के बाद सरकार ने भी एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। अब तक नीट की परीक्षा पेन और पेपर (ऑफलाइन) मोड में होती आई है, लेकिन आगे से इसे कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) यानी पूरी तरह से ऑनलाइन तरीके से करवाया जाएगा। जानकारी के मुताबिक, शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्रालयों के बीच इस बात को लेकर कई सालों से लंबी बहस चल रही थी कि आखिर इस बड़े एग्जाम को ऑफलाइन रखा जाए या ऑनलाइन। लेकिन हालिया घटनाओं और विवादों ने इस बदलाव पर पक्की मुहर लगा दी है, ताकि भविष्य में इस तरह की कोई भी धांधली न हो सके और परीक्षा की पारदर्शिता बनी रहे।
देश के सबसे बड़े एंट्रेंस एग्जाम का क्या है पैमाना?
नीट-यूजी हमारे देश का सबसे बड़ा अंडरग्रेजुएट एंट्रेंस एग्जाम है। इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि हर साल करीब 25 लाख से ज्यादा बच्चे सफेद कोट पहनने का सपना लेकर इसके लिए रजिस्ट्रेशन करवाते हैं। NTA हर साल यह परीक्षा आयोजित करवाता है, जिसके जरिए देशभर के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की करीब 1,08,000 सीटों पर दाखिला मिलता है। इन सीटों में से लगभग 56,000 सीटें सरकारी अस्पतालों और कॉलेजों की हैं, जबकि 52,000 के करीब प्राइवेट कॉलेजों के खाते में आती हैं। सिर्फ एमबीबीएस ही नहीं, बल्कि बीडीएस, आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध जैसे अंडरग्रेजुएट कोर्सेज में एडमिशन के लिए भी नीट का ही स्कोर काम आता है। इसलिए इस एग्जाम की अहमियत बहुत ज्यादा है।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
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