मॉक टेस्ट में कम नंबर आए तो माता-पिता ने... अब NEET UG 2026 में कृतिक जैन ने हासिल किया AIR 18

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कोटा के कृतिक जैन ने NTA री-नीट 2026 में ऑल इंडिया रैंक 18 हासिल की है, उनकी इस शानदार कामयाबी में माता-पिता के अटूट सहयोग और सही मार्गदर्शन का बड़ा हाथ रहा है।

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नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा 16 जुलाई को जारी किए गए री-नीट 2026 के फाइनल नतीजों में कोटा के रहने वाले कृतिक जैन ने पूरे देश में 18वीं रैंक पर अपना कब्जा जमा लिया है। इस शानदार उपलब्धि ने न सिर्फ उनके परिवार का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है, बल्कि उन तमाम छात्रों के लिए भी एक बड़ी मिसाल कायम की है जो मुश्किल हालातों में जल्दी हार मान लेते हैं। जब री-नीट की मेरिट लिस्ट स्क्रीन पर फ्लैश हुई, तो कृतिक के घर का माहौल देखने लायक था। माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े थे और बेटे के चेहरे पर अपनी सालों की तपस्या के रंग लाने का सुकून साफ नजर आ रहा था। कृतिक जैन ने कैसे हासिल किया ये मुकाम, आइए जानते हैं...

कृतिक का यह सफर किसी एक दिन या चंद हफ्तों की कहानी नहीं है। ये उन अनगिनत रातों की कहानी है जब दुनिया आराम से सोती थी और वो अपनी टेबल लैंप की रोशनी में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के पन्नों में खोया रहता था। न्यूज एजेंसी एएनआई से अपनी इस बेमिसाल कामयाबी के बारे में बात करते हुए कृतिक ने बहुत ही सादगी और सच्चाई के साथ अपने दिल की बात रखी। उनका कहना है, "मैंने हमेशा अपना बेस्ट देने की कोशिश की है। सच कहूं तो, तैयारी के उस दौर में मैंने कभी ये नहीं सोचा था कि मुझे कोई खास या टॉप रैंक ही हासिल करनी है। मेरा इकलौता मकसद बस अपनी तरफ से अपना सौ फीसदी देना था, बिना नतीजे की फिक्र किए।"

परिवार ने खूब किया सपोर्ट

अक्सर हम जब भी किसी टॉपर की कामयाबी देखते हैं, तो उसके पीछे छिपा परिवार का वो मजबूत सपोर्ट सिस्टम हमारी नजरों से ओझल हो जाता है। कृतिक ने अपनी कामयाबी का पूरा सेहरा अपने माता-पिता के सिर बांधा है। आज के दौर में जहां कई माता-पिता बच्चों पर नंबरों का भारी दबाव डालते हैं, वहां कृतिक के पैरेंट्स का रवैया हर किसी के लिए एक सबक है। वो बताते हैं, "मेरे माता-पिता ने हर कदम पर मेरा एक दोस्त की तरह साथ दिया। जब भी कोचिंग के टेस्ट में मेरे अच्छे नंबर आते थे, तो वो बहुत खुश होते थे। उनकी वो खुशी और चमकती आंखें मुझे अगले टेस्ट में और ज्यादा मेहनत करने के लिए एक नई ऊर्जा देती थीं।"

तैयारी में आए उतार-चढ़ाव

लेकिन नीट की तैयारी का सफर हमेशा एक सीधी रेखा में नहीं चलता। कई बार ग्राफ नीचे भी गिरता है और मॉक टेस्ट में नंबर उम्मीद के मुताबिक नहीं आते। ऐसे नाजुक वक्त में जब एक छात्र अंदर से सबसे ज्यादा टूटता है और खुद पर शक करने लगता है, तब कृतिक के माता-पिता उनकी सबसे मजबूत ढाल बनकर खड़े रहे। कृतिक उस दौर को याद करते हुए कहते हैं, "जब कभी नतीजे उतने अच्छे नहीं आते थे, तो वो मुझे पास बिठाकर समझाते थे कि उदास होने की कोई जरूरत नहीं है। वो मुझे हमेशा याद दिलाते थे कि एक टेस्ट आखिरी नहीं होता, अभी सुधार की बहुत गुंजाइश है। वो कहते थे कि मेन एग्जाम में अभी काफी वक्त बचा है, इसलिए मैं अपनी गलतियों से सीखकर और भी बेहतर कर सकता हूं।" अपनों के मुंह से निकले यही वो जादुई शब्द थे, जिन्होंने कृतिक को कभी मायूस नहीं होने दिया और उन्हें लगातार अपनी कमियों पर काम करने का हौसला दिया।

अगर हम इस बार के नीट एग्जाम के आंकड़ों पर नजर डालें, तो वो भी हैरान करने वाले हैं। करीब 20 लाख बच्चों ने 551 शहरों के 5,440 सेंटर्स पर ये परीक्षा दी थी। इनमें से 11.21 लाख बच्चों ने एग्जाम पास किया है और 138 होनहार तो ऐसे रहे जिन्होंने 720 में से 690 से ज्यादा का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया। इतने बड़े और कांटे की टक्कर वाले कॉम्पिटिशन में, जहां महज एक नंबर कम होने पर हजारों रैंक खिसक जाती है, वहां ऑल इंडिया लेवल पर 18वीं रैंक हासिल करना कोई बच्चों का खेल नहीं है। ये साफ तौर पर साबित करता है कि कृतिक की तैयारी कितनी पुख्ता और डीप थी, और सबसे बड़ी बात कि री-नीट के प्रेशर कुकर वाले माहौल में उनका दिमाग परीक्षा के उन ढाई-तीन घंटों के दौरान कितना शांत और फोकस्ड रहा होगा।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

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