NEET वालों की मौज, दाखिले से पहले NMC ने बढ़ाईं 150 MBBS सीटें; देखें डिटेल
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने जम्मू-कश्मीर और आंध्र प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 2026-27 सत्र के लिए 150 नई एमबीबीएस सीटों को मंजूरी दी है, जिससे छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी।

मेडिकल की पढ़ाई करने का ख्वाब देखने वाले हजारों नौजवानों के लिए एक बेहद शानदार खबर सामने आई है। हर साल लाखों बच्चे डॉक्टर बनने का सपना आंखों में सजाए नीट (NEET) की कठिन परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन सरकारी कॉलेजों में सीटों की मारामारी और कमी की वजह से कई होनहार और काबिल छात्र भी मायूस रह जाते हैं। ऐसे में नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने एक बड़ा और सकारात्मक कदम उठाते हुए जम्मू-कश्मीर और आंध्र प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 150 नई एमबीबीएस सीटों को अपनी हरी झंडी दे दी है। गौर करने वाली बात है कि यह अहम फैसला आने वाले नीट-2026 दाखिले के मद्देनजर अकादमिक सत्र 2026-27 से लागू हो जाएगा। आइए, डिटेल में जानते हैं कि किन कॉलेजों में कितनी सीटें बढ़ाई गई हैं।
जम्मू-कश्मीर के छात्रों के लिए बड़ी सौगात
श्रीनगर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) और वहां पढ़ने की चाहत रखने वाले छात्रों के लिए यह फैसला किसी बड़ी कामयाबी से कम नहीं है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि NMC ने GMC श्रीनगर में 50 अतिरिक्त एमबीबीएस सीटों के इजाफे को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस नई बढ़ोतरी के बाद, श्रीनगर के इस प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में कुल सीटों का आंकड़ा 200 से छलांग लगाकर सीधा 250 तक पहुंच जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि पिछले साल भी इस कॉलेज को 20 नई सीटों का तोहफा मिला था। अब 50 और सीटें जुड़ने से यहां के मेडिकल एजुकेशन सिस्टम को गजब की मजबूती मिलेगी।
एक आधिकारिक प्रवक्ता ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि नेशनल मेडिकल कमीशन के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने पूरी बारीकी से जांच-पड़ताल करने और कड़े मानकों को परखने के बाद ही यह फैसला लिया है। यह मंजूरी अंडरग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन स्टैंडर्ड्स रेगुलेशंस (UGMSR), 2023 के तहत और नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट, 2019 की धारा 28(3) के नियमों का पालन करते हुए जारी की गई है जिसे लेटर ऑफ परमिशन (एलओपी) कहा जाता है। लगातार बढ़ती सीटों और बेहतर होती सुविधाओं की वजह से GMC श्रीनगर अब देश के सबसे बेहतरीन मेडिकल संस्थानों की फेहरिस्त में और भी मजबूती से खड़ा हो गया है।
आंध्र प्रदेश को मिला 100 नई सीटों का फायदा
सिर्फ उत्तर भारत ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारत के छात्रों के लिए भी यह खबर अपने साथ नई उम्मीदें लेकर आई है। आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने शुक्रवार को एक प्रेस रिलीज के जरिए इस बात का सार्वजनिक ऐलान किया कि राज्य के दो बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कुल 100 नई एमबीबीएस सीटों का इजाफा किया गया है। यह 100 सीटें दो खास कॉलेजों के बीच बांटी गई हैं। कड़प्पा के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के हिस्से में बड़ी हिस्सेदारी यानी 75 नई सीटें आई हैं। वहीं नेल्लोर के ACSR गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज को 25 अतिरिक्त सीटें मिली हैं। स्वास्थ्य मंत्री यादव ने अपने बयान में स्थिति बिल्कुल साफ करते हुए कहा, "NMC ने अकादमिक वर्ष 2026-27 के लिए कड़प्पा गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में 75 और नेल्लोर के ACSR गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में 25 एमबीबीएस सीटें बढ़ाने का लेटर ऑफ परमिशन (एलओपी) जारी कर दिया है।"
सीटों के इस नए बंटवारे के बाद इन कॉलेजों का गणित पूरी तरह बदल गया है। कड़प्पा गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में कुल सीटें अब 175 से बढ़कर 250 हो गई हैं। वहीं नेल्लोर ACSR गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में कुल सीटें अब 175 से बढ़कर 200 पर पहुंच गई हैं।
आम छात्रों पर क्या होगा इसका असर
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर इन 150 सीटों के बढ़ने का असल मायने में क्या मतलब है? देखा जाए तो भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश में डॉक्टरों की हमेशा से भारी कमी रही है। अस्पताल चाहे शहर के हों या दूर-दराज के किसी गांव के, मरीजों की लंबी लाइनें इस बात की गवाही देती हैं कि हमें और ज्यादा काबिल डॉक्टरों की जरूरत है। जब सरकारी कॉलेजों में सीटें बढ़ती हैं, तो मध्यम वर्गीय और गरीब परिवारों के होनहार बच्चों के लिए मेडिकल की महंगी पढ़ाई का रास्ता खुल जाता है। प्राइवेट कॉलेजों की भारी-भरकम फीस चुकाना हर किसी के बस की बात नहीं होती। ऐसे में श्रीनगर से लेकर नेल्लोर तक, ये बढ़ी हुई 150 सीटें कम से कम 150 नए परिवारों के लिए एक पक्की उम्मीद की किरण हैं। इसके अलावा, जिन इलाकों में ये कॉलेज मौजूद हैं, वहां का लोकल अस्पताल और भी ज्यादा बेहतर ढंग से काम कर पाएगा क्योंकि ज्यादा छात्रों के आने से वहां ट्रेनिंग के दौरान डॉक्टरों की मौजूदगी बढ़ेगी।
पीटीआई इनपुट के साथ
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Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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