इंजीनियरिंग की पढ़ाई, एयरोस्पेस की नौकरी छोड़ शुरू किया जीरो-वेस्ट कैफै; हर माह होती है 12 लाख की कमाई
निष्ठा चौहान ने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की अच्छी नौकरी छोड़कर एक ऐसा कैफे शुरू किया, जहां पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा जाता है। साथ ही इस कैफे में मिलेट्स यानी मोटे अनाज से बने खाने को बढ़ावा दिया जाता है।

अगर आपके पास एक ऐसा आईडिया हो, जो ना सिर्फ लोगों की सोच बदल दे, बल्कि वो आपकी कमाई का भी जरिया बन जाए। इससे आपको सफल होने से कोई रोक नहीं सकता है। एक ऐसी ही कहानी है एंटरप्रेन्योरशिप निष्ठा चौहान की, जिन्होंने अहमदाबाद में एक कैफे की शुरुआत एक अलग ही सोच के साथ की। निष्ठा चौहान ने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की अच्छी नौकरी छोड़कर एक ऐसा कैफे शुरू किया, जहां पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा जाता है। साथ ही इस कैफे में मिलेट्स यानी मोटे अनाज से बने खाने को बढ़ावा दिया जाता है।
निष्ठा चौहान ने छोड़ी नौकरी
एयरोस्पेस सेक्टर में काम करना कईयों का सपना होता है और इसे करियर के लिहाज से एक शानदार विकल्प माना जाता है। इस सेक्टर में निष्ठा चौहान ने कई सालों तक काम किया। नौकरी करते-करते निष्ठा का ध्यान पर्यावरण और उससे जुड़े कामों की तरफ बढ़ने लगा। इसी वजह से उन्होंने नौकरी के बजाय कुछ ऐसा करने का फैसला किया, जो उनकी सोच और मूल्यों के साथ मेल खाता हो। इसी बाद ही उन्होंने अहमदाबाद में कैफे आरंभ की शुरुआत की है। यह एक जीरो-वेस्ट कैफे है, जहां मोटे अनाज यानी मिलेट्स), मौसमी खाने पीने की चीजें और पर्यावरण के अनुकूल तरीकों को प्राथमिकता दी जाती है।
कहां तक पढ़ी-लिखी हैं निष्ठा
निष्ठा के लिए यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन उनका मानना था कि खाने-पीने की आदतों के जरिए भी समाज और पर्यावरण में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। अहमदाबाद की रहने वाली निष्ठा चौहान के पिता इसरो के रिटायर साइंटिस्ट हैं, जबकि मां बीएसएनएल में थीं। उन्होंने एलडी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में बीटेक किया हुआ है।
कैफे आरंभ की खासियत
कैफे आरंभ एक आम कैफे की तरह नहीं है। यहां सिर्फ खाने-पीने की चीजें बेचने पर ध्यान नहीं दिया जाता, बल्कि खाने की बर्बादी और कचरे को कम करने की भी कोशिश की जाती है। प्लास्टिक का इस्तेमाल बहुत कम किया जाता है, खाने के सामान काफी सोच-समझकर खरीदी जाती है और रसोई में उपलब्ध हर चीज का बेहतर तरीके से उपयोग किया जाता है। यहां लोगों उतना ही भोजन लेने की सलाह दी जाती है, जितनी जरूरत हो। साथ ही पर्यावरण के अनुकूल खानपान की आदतों को बढ़ावा दिया जाता है। इसकी सोच है कि खाने के हर दाने और हर संसाधन की कद्र करें और उसे बर्बाद न होने दें।
इतना ही नहीं निष्ठा का कैफे सिर्फ खाने तक सीमित नहीं रहा। उनके कैफे में एयर कंडीशनर का उपयोग नहीं किया। वहीं अब, उनका अगला टारगेट भारतीय मिलेट्स को इंटरनेशनल स्तर पर ले जाना है।
मिलेट्स से बनाए जाते हैं अलग-अलग डिश
एक समय था जब बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाज भारतीय घरों के खाने का अहम हिस्सा हुआ करते थे, लेकिन बदलती खानपान की आदतों के कारण इनका उपयोग धीरे-धीरे कम हो गया। कैफे आरंभ ने इन पारंपरिक अनाजों को फिर से लोगों तक पहुंचाने का काम किया। कैफे में मोटे अनाज से बने अलग-अलग डिशेज परोसे जाते हैं, जिससे लोग इन्हें आसानी से अपने रोजमर्रा के भोजन में शामिल कर सकें। इसके अलावा, कैफे में लोगों को सस्टेनेबल फार्मिंग और मोटे अनाजों के फायदों के बारे में भी जानकारी दी जाती है। इससे कस्टमर इन अनाजों के पोषण और पर्यावरण से जुड़े लाभों को दोबारा समझ और अपना पा रहे हैं।
आरंभ कैसे कैसे बनी प्ररेणा
ज्यादातर लोग मानते हैं कि पर्यावरण के लिए काम करने वाले बिजनेस में अच्छी कमाई करना आसान नहीं होता। लेकिन कैफे आरंभ की कहानी इससे अलग है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह कैफे हर महीने करीब 12 लाख रुपये की कमाई कर रहा है।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण:
धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
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