19 की उम्र, बिना डिग्री ही BMW से मिला जॉब ऑफर?सोशल मीडिया पर लोग हैरान
19 साल की कंटेंट क्रिएटर को बिना डिग्री BMW में नौकरी मिलने के दावे ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। जानिए पूरी कहानी, लोगों की राय और सच्चाई क्या है।

सोशल मीडिया के दौर में कब कौन सी कहानी लोगों के दिल और दिमाग पर छा जाए यह कहना मुश्किल है। इन दिनों एक ऐसी ही कहानी इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही है जिसमें दावा किया जा रहा है कि एक 19 साल की लड़की ने बिना किसी औपचारिक डिग्री के सीधे BMW जैसी बड़ी कंपनी में नौकरी हासिल कर ली। इस खबर ने युवाओं के बीच एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या आज के समय में डिग्री से ज्यादा अहमियत स्किल और पर्सनल ब्रांडिंग की हो गई है? यह कहानी कंटेंट क्रिएटर गौरी एम के इर्द-गिर्द घूमती है जिनके बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने अपनी मजबूत सोशल मीडिया पहचान के दम पर एक फुल टाइम मार्केटिंग रोल हासिल किया। सबसे दिलचस्प बात यह बताई जा रही है कि उन्होंने न तो किसी को पिच किया और न ही कोई कोल्ड ईमेल भेजा फिर भी उन्हें ऑफर मिला।
सोशल मीडिया बना डिजिटल रिज्यूमे
गौरी ने वायरल पोस्ट में यह दावा किया जा रहा है कि उन्होंने ने पारंपरिक रास्ता नहीं अपनाया। उन्होंने कॉलेज डिग्री या लंबा अनुभव जुटाने के बजाय सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बनाने पर फोकस किया। उनके पास लिंक्डइन पर 65 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं, जबकि इंस्टाग्राम पर 35 हजार से अधिक लोग उन्हें फॉलो करते हैं। वे लगातार कंटेंट पोस्ट करती रहीं, अपनी सोच और नजरिया साफ तरीके से सामने रखती रहीं। धीरे-धीरे उनकी प्रोफाइल खुद ही एक मजबूत पोर्टफोलियो बन गई। एक यूजर ने लिखा कि उनका प्रोफाइल ही ऐसा एसेट बन गया जिसकी वैल्यू कई बार डिग्री या सालों के अनुभव से भी ज्यादा हो सकती है।
मैंने किसी को मैसेज तक नहीं किया: गौरी
गौरी ने खुद भी इस बारे में पोस्ट करते हुए बताया कि उन्हें दुनिया के बड़े कार समूहों में से एक से नौकरी का ऑफर मिला। उन्होंने लिखा, “मैंने किसी को पिच नहीं किया, मैंने एक भी कोल्ड ईमेल नहीं भेजा।” उन्होंने यह भी बताया कि उसी हफ्ते उन्हें कई और जॉब ऑफर्स मिले, जिनमें एक स्पोर्ट्स ब्रांड के फाउंडर की तरफ से भी दिलचस्पी दिखाई गई। उनकी इस पोस्ट के साथ शेयर किए गए स्क्रीनशॉट ने लोगों के बीच इस कहानी को और ज्यादा वायरल बना दिया।
इस कहानी के सामने आने के बाद इंटरनेट पर बहस शुरू हो गई कि आखिर आज के समय में ज्यादा जरूरी क्या है, स्किल या डिग्री? कुछ लोग इस कहानी के समर्थन में नजर आए। उनका कहना है कि सोशल मीडिया आज के दौर में एक लाइव पोर्टफोलियो बन चुका है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि पर्सनल ब्रांडिंग से आपकी असली स्किल सामने आती है। कुछ यूजर्स ने कहा कि कंपनियां अब क्रिएटिविटी और विजिबिलिटी को ज्यादा महत्व दे रही हैं।
लेकिन दूसरी तरफ कई लोग इस दावे को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं। उनका मानना है कि ऐसे मामले बहुत कम होते हैं और हर किसी के साथ ऐसा नहीं होता। वहीं एक यूजर का कहना है कि ज्यादातर इंडस्ट्री में आज भी डिग्री और अनुभव जरूरी है। एक अन्य यूजर ने कहा इस हायरिंग प्रोसेस का पूरा सच सामने नहीं आया है। कुछ यूजर्स ने यह भी चेतावनी दी कि ऐसी कहानियों के आधार पर डिग्री की अहमियत को कम करके नहीं आंका जाना चाहिए।
सच्चाई अब भी साफ नहीं
इस वायरल कहानी को लेकर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इसकी पूरी सच्चाई की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है। जो जानकारी सामने आई है, वह सोशल मीडिया पोस्ट और स्क्रीनशॉट्स पर आधारित है। नौकरी की पूरी प्रक्रिया, चयन के मानदंड और कंपनी की तरफ से आधिकारिक पुष्टि अब तक सामने नहीं आई है।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


