नाम से नहीं, काम से मिलेगी कंपनी में कुर्सी! IIM से पढ़ीं बेटी नव्या को लेकर पिता निखिल नंदा की दो टूक
एस्कॉर्ट्स कुबोटा के चेयरमैन निखिल नंदा ने साफ किया है कि उनकी बेटी नव्या नवेली नंदा को कंपनी में जगह काबिलियत से मिलेगी। 'नंदा' सरनेम होना पद की गारंटी नहीं है।

अक्सर हम देखते हैं कि बड़े-बड़े घरानों में बच्चों को विरासत में सजी-सजाई गद्दी आसानी से मिल जाती है। भारत के कॉर्पोरेट जगत में नेपोटिज्म या भाई-भतीजावाद कोई नई बात नहीं है। परिवार का बड़ा नाम ही कई बंद दरवाजे खोलने के लिए काफी होता है। लेकिन क्या हो जब एक पिता जो खुद 31000 करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू वाली कंपनी का मालिक हो, अपनी ही बेटी के लिए यह नियम बदल दे? जब बात काबिलियत और विरासत के बीच टकराव की आती है तो एस्कॉर्ट्स कुबोटा के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर निखिल नंदा का नजरिया बिल्कुल अलग है। उन्होंने साफ कर दिया है कि उनकी बेटी, नव्या नवेली नंदा और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की नातिन को सिर्फ अपने नाम के दम पर कंपनी में कोई बड़ी कुर्सी नहीं मिलने वाली।
इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट की मानें तो निखिल नंदा का मानना है कि कंपनी किसी एक इंसान या परिवार के रुतबे से कहीं ज्यादा बड़ी होती है। उन्होंने कहा कि वो अपनी कंपनी से बेइंतहा प्यार करते हैं और उनका सबसे बड़ा मकसद यही है कि यह कंपनी उनके बाद भी मजबूती से खड़ी रहे। उन्होंने अखबार को बताया, "मैं चाहता हूं कि हमारी यह संस्था आने वाले 200 सालों तक यूं ही चलती रहे।"
अपनी कंपनी पर निखिल नंदा को फख्र
कुबोटा के लंबे इतिहास पर रोशनी डालते हुए निखिल ने बताया कि यह 137 साल पुरानी कंपनी है और भारत में इसे काम करते हुए 82 साल हो चुके हैं। इस शानदार सफर को वो और भी आगे ले जाना चाहते हैं। परिवार के दखल और उत्तराधिकार के बारे में पूछे जाने पर निखिल ने बताया कि उनकी कंपननी एस्कॉर्ट्स कुबोटा शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी है। ऐसे में बाजार की नजरें हमेशा इस बात पर टिकी होती हैं कि कंपनी का कामकाज कैसे चल रहा है और प्रमोटर्स का बर्ताव कैसा है। सेबी की गाइडलाइंस और शेयरहोल्डर्स की उम्मीदों का पूरा ख्याल रखना पड़ता है। परिवार का कंपनी में प्रतिनिधित्व जरूर रहेगा, लेकिन वह पूरी तरह से नियमों के दायरे में ही होगा।
नव्या ने आईआईएम अहमदाबाद से की पढ़ाई
अपनी बेटी नव्या नवेली नंदा के बारे में बात करते हुए निखिल ने बिल्कुल दो टूक जवाब दिया। गौरतलब है कि नव्या ने हाल ही में आईआईएम अहमदाबाद से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया है और वो बिजनेस की दुनिया में अपनी गहरी दिलचस्पी भी दिखा रही हैं। लेकिन निखिल का कहना है, "सिर्फ 'नंदा' सरनेम होने से उसे यहां कोई पोजिशन पाने का हक नहीं मिल जाता।" निखिल मानते हैं कि नव्या को अपनी जगह खुद अपनी काबिलियत के दम पर बनानी होगी। उन्होंने कहा, “उसे अपनी जगह कमानी होगी, और मुझे पूरा यकीन है कि वो ऐसा खुद कर लेगी।”
मेटा के साथ काम कर चुकी हैं नव्या नवेली नंदा
बता दें अमिताभ बच्चन की नातिन नव्या ने मेटा जैसी दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी के साथ भी काम किया है। लेकिन, बिजनेसमैन की तरह निखिल ने नव्या की उन कमियों को भी नहीं छुपाया जिन पर अभी मेहनत करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि आज के बदलते कॉर्पोरेट माहौल में डिजिटल कोडिंग और नई तकनीक की जानकारी होना बेहद जरूरी है। नव्या को अभी इस 'डिजिटल कोडिंग' वाले हिस्से में और एक्सपोजर की जरूरत है। हालांकि, निखिल को पूरा भरोसा है कि वो जल्द ही इन चीजों को सीख लेंगी और डिजिटल मार्केटिंग या मॉडर्न बिजनेस के तौर-तरीकों में अपना बड़ा योगदान देंगी। उन्होंने फिर से इस बात पर जोर दिया कि एस्कॉर्ट्स कुबोटा में भविष्य का कोई भी रोल नव्या की काबलियत और उनके काम के असर पर निर्भर करेगा न कि उनके पारिवारिक बैकग्राउंड पर।
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Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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