10वीं से पहले छोड़ी पढ़ाई, 8 हजार की नौकरी की… आज 21 हजार करोड़ का मालिक है ये भारतीय युवा

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nikhil kamath zerodha success story : निखिल कामथ की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। स्कूल ड्रॉपआउट से भारत के सबसे युवा अरबपतियों में शामिल होने तक, जानिए कैसे Zerodha ने बदल दी देश की फाइनेंशियल दुनिया।

10वीं से पहले छोड़ी पढ़ाई, 8 हजार की नौकरी की… आज 21 हजार करोड़ का मालिक है ये भारतीय युवा

nikhil kamath zerodha success story : आज जब भारत में स्टार्टअप और बिजनेस की बात होती है, तो निखिल कामत का नाम सबसे अलग नजर आता है। महज 38 साल की उम्र में अरबों की संपत्ति खड़ी करने वाले निखिल उन युवाओं के लिए बड़ी मिसाल बन चुके हैं जो जिंदगी में अलग रास्ता चुनना चाहते हैं। खास बात यह है कि उन्होंने सफलता की यह कहानी बिना किसी बड़ी डिग्री के लिखी। भारत की सबसे बड़ी रिटेल ब्रोकरेज कंपनी जिरोधा (Zerodha) के को-फाउंडर निखिल कामथ ने यह साबित किया कि असली सीख सिर्फ किताबों से नहीं, बल्कि अनुभवों से भी मिलती है।

स्कूल ड्रॉपआउट से शुरू हुई कहानी

5 सितंबर 1986 को कर्नाटक के उडुपी में जन्मे निखिल का बचपन आम भारतीय परिवारों की तरह बीता। उनके पिता बैंक में नौकरी करते थे और मां टीचर थीं। परिवार पढ़ाई को काफी अहम मानता था, लेकिन निखिल का मन पारंपरिक पढ़ाई में नहीं लगा। उन्होंने 10वीं से पहले ही स्कूल छोड़ दिया। उस वक्त शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही लड़का आगे चलकर भारत के सबसे सफल कारोबारियों में गिना जाएगा।

14 साल की उम्र में शुरू किया बिजनेस

ज्यादातर बच्चे जहां स्कूल और खेल में व्यस्त रहते हैं, वहीं निखिल कम उम्र में ही पैसे कमाने के तरीके तलाशने लगे थे। 14 साल की उम्र में उन्होंने मोबाइल फोन बेचने शुरू कर दिए थे। हालांकि परिवार को यह पसंद नहीं था। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उनकी मां ने गुस्से में उनके मोबाइल फोन तक फेंक दिए थे। लेकिन निखिल का इरादा नहीं बदला। यही जिद आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।

कॉल सेंटर की नौकरी ने सिखाए जिंदगी के सबक

बड़े बिजनेसमैन बनने से पहले निखिल ने कॉल सेंटर में भी काम किया। उस समय उनकी सैलरी करीब 8 हजार रुपये महीना थी। नौकरी के साथ-साथ उन्होंने शेयर बाजार को समझना शुरू किया। धीरे-धीरे उन्हें एहसास हुआ कि मार्केट की चाल समझने में उनकी पकड़ मजबूत है। कॉल सेंटर की नौकरी ने उन्हें लोगों का व्यवहार समझना सिखाया, जिसका फायदा बाद में बिजनेस खड़ा करने में मिला।

कैसे शुरू हुई Zerodha?

साल 2010 में निखिल ने अपने बड़े भाई नितिन कामत के साथ मिलकर Zerodha की शुरुआत की। उस दौर में शेयर बाजार में निवेश करना आम लोगों के लिए आसान नहीं था। ब्रोकरेज फीस काफी ज्यादा होती थी और छोटे निवेशक बाजार से दूर रहते थे। कामथ ब्रदर्स ने इसी समस्या को अवसर में बदला। उन्होंने ऐसा मॉडल लॉन्च किया जिसमें निवेश पर जीरो ब्रोकरेज और ट्रेडिंग पर बेहद कम शुल्क रखा गया। यह आइडिया लोगों को पसंद आया और देखते ही देखते Zerodha देश की सबसे बड़ी ब्रोकरेज कंपनियों में शामिल हो गई। आज लाखों भारतीय निवेशक इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं।

भारत में निवेश की सोच बदल दी

निखिल कामथ और उनकी टीम ने सिर्फ कंपनी नहीं बनाई, बल्कि भारत में निवेश को लेकर लोगों की सोच बदल दी। पहले शेयर बाजार को सिर्फ बड़े निवेशकों का खेल माना जाता था, लेकिन Zerodha ने छोटे शहरों और मिडिल क्लास युवाओं को भी निवेश की दुनिया से जोड़ा। यही वजह है कि आज निखिल को सिर्फ बिजनेसमैन नहीं, बल्कि फाइनेंशियल बदलाव लाने वाले चेहरे के तौर पर भी देखा जाता है।

अरबों की दौलत, लेकिन जमीन से जुड़े

मशहूर मैगजीन फोर्ब्स के मुताबिक 2025 में निखिल कामथ की नेटवर्थ करीब 2.6 बिलियन डॉलर यानी 21 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई है। लेकिन इतनी दौलत के बावजूद उनकी पहचान सिर्फ लग्जरी लाइफस्टाइल तक सीमित नहीं है। उन्होंने साल 2023 में उन्होंने अपनी आधी से ज्यादा संपत्ति समाजसेवा में देने का संकल्प लिया।

लग्जरी कार और महंगी घड़ियों का शौक

बेंगलुरु के आलीशान किंगफीशर टॉवर में निखिल का शानदार घर है। उन्हें महंगी कारों और विंटेज घड़ियों का भी शौक है। उनकी पसंदीदा चीजों में लग्जरी वॉच कलेक्शन काफी चर्चित रहता है। लेकिन इन सबके बीच उनकी सबसे बड़ी पहचान आज भी एक ऐसे युवा की है जिसने बिना पारंपरिक डिग्री के अपनी अलग दुनिया बनाई।

युवाओं के लिए क्या है सबसे बड़ी सीख?

निखिल कामथ की कहानी बताती है कि जिंदगी में सफलता सिर्फ अच्छे नंबर या बड़ी डिग्री से तय नहीं होती। सही सोच, लगातार सीखने की आदत और रिस्क लेने का साहस इंसान को बहुत आगे ले जा सकता है। आज लाखों युवा उनकी कहानी से प्रेरणा लेते हैं क्योंकि उन्होंने यह दिखाया कि अगर नजरिया बड़ा हो, तो साधारण शुरुआत भी असाधारण मंजिल तक पहुंच सकती है।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

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