
MBBS : एमबीबीएस की खाली 26 सीटों पर दाखिले के लिए आज वॉक इन, NEET रैंक से मिलेगा एडमिशन
NEET MBBS Admission : कर्नाटक में स्ट्रे वैकेंसी राउंड के बाद भी एमबीबीएस की 26 सीटें खाली रह गई हैं। इन सीटों को भरने के लिए आज बुधवार दोपहर तक अंतिम अवसर देने का फैसला किया है। सभी डेंटल सीटें अलॉट कर दी गईं, पर एमबीबीएस की 26 सीटें खाली रह गईं।
NEET MBBS Admission : कर्नाटक में स्ट्रे वैकेंसी राउंड के बाद भी एमबीबीएस की 26 सीटें खाली रह गई हैं। इन सीटों को भरने के लिए कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (केईए) ने आज बुधवार दोपहर तक अंतिम अवसर देने का फैसला किया है। स्ट्रे वैकेंसी काउंसलिंग राउंड में 73 एमबीबीएस और 34 बीडीएस सीटें उपलब्ध थीं। सभी डेंटल सीटें अलॉट कर दी गईं है पर एमबीबीएस की 26 सीटें खाली रह गईं। एमबीबीएस छात्रों के लिए मेडिकल कॉलेज में रिपोर्ट करने की अंतिम तिथि बुधवार शाम है। केईए बुधवार दोपहर तक सीट अलॉटमेंट की अनुमति देगा।
केईए के कार्यकारी निदेशक एच. प्रसन्ना ने कहा, 'जो छात्र पात्र हैं, वे डिमांड ड्राफ्ट और आवश्यक पात्रता दस्तावेजों के साथ आ सकते हैं। सीटों का आवंटन नीट रैंक ( NEET UG Rank ) के आधार पर किया जाएगा। कॉलेजों की ओर से खाली सीटें भरने की उम्मीद जताए जाने के बाद यह अवसर दिया जा रहा है। शेष वैकेंसी की जानकारी हम नेशनल मेडिकल कमिशन (एनएमसी) को भी देंगे। अगर वे इसके बाद और राउंड की अनुमति देते हैं, तो हम आगे काउंसलिंग करेंगे। फिलहाल उच्च न्यायालय ने हमें काउंसलिंग पूरी कर बुधवार शाम तक सूची भेजने का निर्देश दिया है।'
केवल दो मेडिकल कॉलेजों में सीटें खाली
टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक एमबीबीएस की खाली सीटें केवल दो मेडिकल कॉलेजों में हैं- एमवीजे मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च हॉस्पिटल में 22 सीटें खाली हैं, जबकि कलबुर्गी स्थित महादेवप्पा रामपुरे मेडिकल कॉलेज में चार सीटें रिक्त हैं। पिछले वर्ष काउंसलिंग के अंत में कोई भी मेडिकल या डेंटल सीट खाली नहीं रही थी। एमवीजे मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन एमजे मोहन ने कहा, 'काउंसलिंग के अंतिम चरण में करीब 50 सीटें जोड़ी गई थीं। संभवतः यही कारण है कि इतनी सीटों पर छात्र नहीं मिले।' मेडिकल कॉलेज में कुल सीटें 250 थी।
अब तक कितनी एमबीबीएस सीटों का हुआ अलॉटमेंट
केईए आयुष सीटों के लिए भी एक और काउंसलिंग राउंड करा रहा है, जिनमें अभी 800 सीटें खाली हैं। इस वर्ष पेरेंट्स ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में याचिकर दायर नीट यूजी स्टेट काउंसलिंग तीसरे राउंड के सीट आवंटन को चुनौती दी थी। इसके चलते एमबीबीएस प्रवेश में देरी हुई। यह सीट अलॉटमेंट उस समय हुआ था, जब एनएमसी द्वारा और सीटें जोड़ी जा रही थीं। कुल मिलाकर इस वर्ष केईए के पास 10,559 एमबीबीएस सीटें थीं, जिनमें से अब तक 10,533 सीटों का अलॉटमेंट हो चुका है। बीडीएस में सभी 2,709 सीटें भर दी गई हैं।
MBBS सीटों को सीमित रखने का फैसला 2 साल के लिए टाला गया, केंद्र सरकार का बयान
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने राज्यसभा में बताया है कि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की ओर से एमबीबीएस सीटों की संख्या सीमित करने का फैसला 2024-25 और 2025-26 शैक्षणिक वर्षों के लिए टाल दिया गया है। नड्डा ने कहा कि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) संसद के एक अधिनियम द्वारा गठित सर्वोच्च वैधानिक निकाय है, जिसे देश भर में मेडिकल शिक्षा और प्रैक्टिस को विनियमित करने और उसकी देखरेख करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्वास्थ्य मंत्री एक सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या सरकार ने इस चिंता पर ध्यान दिया है कि एनएमसी का 2023 का निर्देश, जिसमें एक राज्य में प्रति 10 लाख आबादी पर एमबीबीएस सीटों की संख्या 100 तक सीमित करने की बात कही गई है, केरल सहित दक्षिणी राज्यों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा, जो पहले ही इस अनुपात को पार कर चुके हैं, और क्या एनएमसी ने इस निर्देश को स्थायी रूप से वापस ले लिया है। एमबीबीएस सीटों को सीमित रखने के फैसले को टालने का मकसद मेडिकल शिक्षा तक पहुंच में क्षेत्रीय असमानताओं, विशेषकर दक्षिणी राज्यों में, को दूर करना है। यह कदम सांसदों और अन्य हितधारकों द्वारा उठाई गई चिंताओं के मद्देनजर लिया गया है।

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Pankaj Vijayपंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार
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