NEET : गजब! MBBS को ठुकरा BAMS लिया, नीट के बाद 2 बार UPSC प्रीलिम्स भी निकाला, आज हैं बड़ी डॉक्टर
NEET UG Success Story : डॉ. उपासना वोहरा इस भ्रम को चुनौती देती हैं कि कम अंक आने वाले छात्र ही आयुर्वेद की पढ़ाई करते हैं। डॉ. उपासना वोहरा की कहानी संघर्ष, दृढ़ संकल्प और आयुर्वेद के प्रति अटूट विश्वास की एक बेहद प्रेरणादायक कहानी है।

NEET UG Success Story : हर साल करीब 20 से 21 लाख विद्यार्थी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी देते हैं। आमतौर पर सबका एक ही टारगेट होता है एमबीबीएस सीट हासिल कर डॉक्टर बनना। लेकिन देश में सिर्फ 1.36 लाख एमबीबीएस सीटें होने के चलते अधिकांश के सपने टूट जाते हैं। कुछ ईयर ड्रॉप कर फिर से नीट की तैयारी में जुट जाते हैं, कुछ समझौता कर बीएएमएस, बीएचएमएस, बीयूएमएस, बीफार्मा या बीएससी नर्सिंग जैसे कोर्स की राह पकड़ लेते हैं। लेकिन यहां हम आपको एक ऐसी उम्मीदवार की कहानी बता रहे हैं जिसने नीट में अच्छे मार्क्स आने के बावजूद एमबीबीएस की सीट ठुकरा दी और बीएएमएस कोर्स को चुना क्योंकि उनकी दिलचस्पी आयुर्वेद में जाने की थी। डॉ. उपासना वोहरा इस भ्रम को चुनौती देती हैं कि कम अंक आने वाले छात्र ही आयुर्वेद की पढ़ाई करते हैं। डॉ. उपासना की कहानी संघर्ष, दृढ़ संकल्प और आयुर्वेद के प्रति अटूट विश्वास की एक बेहद प्रेरणादायक कहानी है। उन्होंने समाज के बने-बनाए ढर्रों और रूढ़ियों को तोड़कर चिकित्सा क्षेत्र में एक अनूठी पहचान बनाई है।
हिमाचल के छोटे से गांव में पली बढ़ीं
डॉ. उपासना हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के एक बहुत ही छोटे और कम सुविधाओं वाले गाँव नहरिया से ताल्लुक रखती हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई एक निजी स्कूल से हुई, जहां हिंदी भाषा कम बोली जाती थी और ज्यादातर बातचीत पहाड़ी भाषा में की जाती थी। अंग्रेजी का महत्व उन्हें बहुत बाद में समझ आया। उनके गांव से स्कूल की बस सुबह 5 बजे ही निकल जाती थी, जबकि स्कूल का समय सुबह 8 या 9 बजे का होता था। उनके माता-पिता सुबह 4:00 बजे उठते थे।
PMT परीक्षा में सफलता और MBBS सीट छोड़ना
उपासना ने पीएमटी ( प्री मेडिकल टेस्ट - आज नीट यूजी) परीक्षा में 800 में से 636 अंक हासिल किए और बहुत अच्छी रैंक पाई। इस बेहतरीन रैंक के साथ उन्हें आईजीएमसी (IGMC) शिमला में एमबीबीएस की सीट मिल रही थी। लेकिन डॉ. उपासना ने एमबीबीएस की सीट छोड़ दी ताकि किसी अन्य जरूरतमंद बच्चे की सीट खराब न हो और उन्होंने खुद अपनी मर्जी से आयुर्वेद (BAMS) चुना। इस फैसले के कारण उन्हें लोगों से काफी आलोचना भी झेलनी पड़ी।
पंजाब PMT में पहला रैंक
जोश टॉक्स में डॉ. उपासना ने बताया कि हिमाचल पीएमटी के दौरान कुछ कारणों से वह परीक्षा नहीं दे पाई थीं, जिसके बाद उन्होंने पंजाब पीएमटी परीक्षा दी। अन्य राज्यों के लिए वहां केवल 5 सीटें थीं, जिसे क्रैक करके उन्होंने फर्स्ट रैंक हासिल की और गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कॉलेज, पटियाला से अपनी बीएएमएस की पढ़ाई शुरू की। उनका मानना है कि कॉलेज नहीं, बल्कि छात्र की खुद की मेहनत डॉक्टर को बेहतर बनाती है।
चरक संहिता को बिना खाए-पिए पढ़ना
कॉलेज के दौरान किसी ने उनसे संस्कृत में लिखी चरक संहिता के बारे में कुछ सवाल पूछा था। आयुर्वेद की प्रमाणिकता को साबित करने के लिए डॉ. उपासना ने बिना कुछ खाए-पिए लगातार दो दिन लगाकर उस संहिता को पढ़ा और अगले दिन जाकर उसका सही जवाब दिया।
UPSC प्री परीक्षा पहली बार में क्रैक
उन्होंने यह देखने के लिए कि क्या वाकई यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा इतनी कठिन होती है, इसकी तैयारी की और पहले ही प्रयास में प्रीलिम्स (Prelims) परीक्षा पास की तथा दो बार मेंस (Mains) परीक्षा भी दी। हालांकि उनका लक्ष्य हमेशा आयुर्वेद में ही काम करना था। आज डॉ. वोहरा दिल्ली में अपना वोहरा आयुर्वेदिक हॉस्पिटल और पंचकर्म सेंटर चला रही हैं। वह इनफर्टिलिटी (बांझपन) को लेकर गहरा शोध कर चुकी हैं और इसके लिए पीड़ितों को विशेष इलाज भी दे रही हैं।
NEET छात्रों को मैसेज
वह कहती है कि सिर्फ MBBS ही डॉक्टर बनने का एकमात्र रास्ता नहीं है। सिर्फ एमबीबीएस को ही सब कुछ न मानें। मेडिकल फील्ड में BAMS, BHMS, BNYS, BUMS (यूनानी) जैसे बहुत से बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं।


