हिंदी मीडियम छात्र की NEET में 11वीं रैंक, किसान के बेटे को उम्र कम होने के कारण लेना पड़ा था 1 साल का ड्रॉप
NEET UG Topper : किसान परिवार से आने वाले अभिलाष ने हिंदी मीडियम से परीक्षा देकर नीट में 11वीं रैंक हासिल की है। खास बात यह रही कि 3 मई को हुई पहली परीक्षा और री-नीट, दोनों में उनके अंक समान रहे।

NEET UG Topper : नीट यूजी 2026 में हिंदी माध्यम से परीक्षा देने वाले अभिलाष ने नीट यूजी 2026 में ऑल इंडिया रैंक (एआईआर) 11 हासिल कर देशभर में शानदार मिसाल कायम की है। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के पल्लू कस्बे के रहने वाले अभिलाष के पिता किसान हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने सीकर में रहकर कोचिंग की और बेतरीन सफलता प्राप्त की। अभिलाष ने 720 में से 705 नंबर हासिल किए हैं। अभिलाष ने बताया कि उनकी बीते वर्ष 12वीं के साथ नीट परीक्षा देने की योजना थी, लेकिन उम्र कम होने के कारण एग्जाम नहीं दे पाए थे। ऐसे में एक साल का ड्रॉप लेकर इस वर्ष पहली बार नीट दिया और कामयाबी हासिल की।
परीक्षा रद्द होने से लगा था झटका
3 मई को हुई नीट परीक्षा रद्द होने से अभिलाष को गहरी निराशा हुई थी लेकिन उन्होंने हताशा को खुद पर हावी नहीं होने दिया। कॉन्फिडेंस बनाए रखा। 3 मई वाली नीट परीक्षा में उनके 705 नंबर ही बन रहे थे और इस बार भी अभिलाष ने उतना ही स्कोर किया है।
11वीं से शुरू की थी नीट की तैयारी
अभिलाष ने बताया कि 11वीं क्लास से सीकर में रहकर पढ़ाई शुरू कर दी थी। पिता खेती करते हैं और घर में कोई कैरियर के लिए गाइड करने वाला नहीं था। टीचर ताऊ ने डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित किया। ताऊजी ने उन्हें सीकर जाकर कोचिंग करने की सलाह दी।
कैसे की तैयारी
अभिलाष का कहना है कि रेगुलर स्टडी और रेगुलर डाउट क्लियर होने से कोई भी प्रॉब्लम नहीं हुई। अभिलाष ने कहा कि उन्होंने कभी भी क्लासरूम की पढ़ाई को हल्के में नहीं लिया। कोचिंग में पढ़ाए गए प्रत्येक टॉपिक का उसी दिन घर जाकर रिवाइज करते थे। रोजाना 5 से 6 घंटे सेल्फ स्टडी उनके रुटीन का हिस्सा थी। उन्हें रात के समय पढ़ाई करना अधिक पसंद था, क्योंकि उस समय शांति रहती है और ध्यान पूरी तरह पढ़ाई पर केंद्रित रहता है। वे अक्सर रात 1 बजे तक पढ़ाई करते थे और नियमित रूप से क्लास नोट्स दोहराते थे।
सोशल मीडिया से रखी दूरी
अभिलाष ने बताया कि तैयारी के दौरान उन्होंने मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पढ़ाई में सबसे बड़ा ध्यान भटकाने का काम करता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई छात्र ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल का अनुशासित तरीके से उपयोग करता है तो वह मददगार भी साबित हो सकता है।


