NEET UG : नीट में 720 में से 264 अंक, कोर्ट बोला- एक साथ 2 लाभ नहीं दे सकते, MBBS सीट देने से इनकार
NEET UG परीक्षा पास करने के बावजूद ओडिशा के एक छात्र को MBBS में दाखिला नहीं मिल सका। मामले में सुनवाई करते हुए ओडिशा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी उम्मीदवार एक ही समय में दो अलग-अलग विशेषाधिकारों का लाभ नहीं ले सकता।

NEET UG MBBS Admission : ओडिशा हाईकोर्ट ने एक छात्र को मेडिकल दाखिले में एक ही समय में दोहरा लाभ देने से मना कर दिया है। याचिकाकर्ता ने एमबीबीएस में दाखिले की पात्रता हासिल करने के लिए 12वीं पास करने के कई साल बाद NIOS से एग्जाम देकर अपने मार्क्स में सुधार किया था। छात्र ने एनआईओएस से एग्जाम देकर केमिस्ट्री में ज्यादा अंक हासिल किए। लेकिन साथ ही वह स्टेट गवर्नमेंट स्कूल कोटा (SGS) के तहत आरक्षण भी चाहता था। अदालत ने साफ किया कि एक उम्मीदवार अपनी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और आरक्षण का लाभ अलग-अलग बोर्डों के कॉम्बिनेशन से एक साथ नहीं उठा सकता है। कोर्ट ने कहा कि एसजीएस कोटे का लाभ केवल उन छात्रों के लिए है जिन्होंने अपनी 10वीं और 12वीं दोनों परीक्षाएं राज्य के सरकारी विद्यालयों से ही पूरी की हों। न्यायालय ने इस आधार पर याचिका खारिज कर दी कि दो अलग अलग विशेषाधिकारों का एक साथ उपयोग करना नियमों के खिलाफ है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक छात्र ने वर्ष 2014 में ओडिशा बोर्ड (CHSE) से 12वीं की परीक्षा पास की थी। 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी में कुल 49.66 प्रतिशत अंक मिले थे, जबकि जनरल कैटेगरी के छात्रों के लिए मेडिकल प्रवेश की न्यूनतम पात्रता 50 प्रतिशत थी। पात्रता शर्तें पूरी करने के लिए छात्र ने वर्ष 2022 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) से केवल केमिस्ट्री विषय की परीक्षा दोबारा दी और अपने अंक बढ़ाकर 64 कर लिए।
इसके बाद छात्र ने नीट यूजी 2025 परीक्षा दी, जिसमें उसे 720 में से 264 अंक प्राप्त हुए और ऑल इंडिया रैंक 5,52,732 हासिल हुई। उसने ओडिशा संयुक्त प्रवेश परीक्षा (OJEE) काउंसलिंग में राज्य कोटे के तहत आवेदन किया, जहां उसे स्टेट गवर्नमेंट कोटा (SGS) श्रेणी में भी रैंक मिली। हालांकि काउंसलिंग के सभी चरणों के बाद भी उसे सीट अलॉट नहीं हुई। छात्र ने आरोप लगाया कि 12वीं में एनआईओएस से अंक सुधारने के आधार पर उसे एसजीएस कोटे के तहत सीट नहीं दी गई, जबकि उससे कम नीट रैंक वाले कुछ उम्मीदवारों को इसी श्रेणी में प्रवेश मिला। छात्र ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अगले शैक्षणिक सत्र में एमबीबीएस सीट देने की मांग की।
छात्र का तर्क- नीट में एनआईओएस मान्य
रिपोर्ट के मुताबिक याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) एनआईओएस 12वीं को मान्यता देता है और एनआईओएस से प्राप्त अंकों के आधार पर उसे नीट यूजी में बैठने और मेडिकल शिक्षा के लिए पात्र माना गया है। इसलिए केवल अंक सुधारने के कारण उसे एसजीएस कोटे का लाभ देने से इनकार करना गलत और भेदभावपूर्ण है।
राज्य सरकार की क्या दी दलील
राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि एसजीएस आरक्षण केवल उन छात्रों के लिए है जिन्होंने कक्षा 10 और 12 दोनों राज्य सरकार के स्कूलों से रेगुलर मोड से पूरी की हो। छात्र ने 12वीं की पात्रता के लिए NIOS प्रमाणपत्र का सहारा लिया है, इसलिए वह SGS कोटे का लाभ लेने का हकदार नहीं है।
दो अलग-अलग बोर्डों के लाभ लेकर आरक्षण का दावा गलत
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि छात्र नीट पात्रता के लिए NIOS से सुधारे गए अंकों का लाभ ले सकता है, लेकिन एसजीएस आरक्षण के लिए उसे राज्य बोर्ड के एक ही प्रमाणपत्र के आधार पर पात्र होना चाहिए था। अदालत ने कहा कि एक उम्मीदवार एक साथ दो अलग-अलग बोर्डों के लाभ लेकर आरक्षण का दावा नहीं कर सकता।
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि छात्र एमबीबीएस (MBBS) दाखिले की सामान्य पात्रता तो प्राप्त कर सकता है, लेकिन स्टेट गवर्नमेंट स्कूल कोटा (SGS) आरक्षण का लाभ नहीं ले सकता।
कोर्ट ने स्पष्ट किया नियम
न्यायालय के निर्णय के अनुसार, दो अलग-अलग बोर्ड (जैसे राज्य बोर्ड और NIOS) के अंकों को मिलाकर न्यूनतम प्रवेश पात्रता पूरी करना अपने आप में एक 'विशेषाधिकार' है। इसके साथ ही SGS कोटे के आरक्षण का दावा करना दूसरा विशेषाधिकार माना जाता है, और कोई भी उम्मीदवार एक ही समय में दो विशेषाधिकारों का लाभ नहीं ले सकता। कोई भी उम्मीदवार अपने अंकों को सुधारने की छूट और सरकारी स्कूल कोटे के आरक्षण इन दोनों विशेषाधिकारों का एक साथ लाभ नहीं उठा सकता।
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