NEET: अंडरगारमेंट्स में फोन छिपाकर लाई लड़की तीसरी बार दे रही थी नीट, भेजा जेल
NEET UG Re Exam : जयपुर में नीट यूजी री एग्जाम के दौरान हिमांशी तिवारी को मोबाइल फोन के साथ पकड़ा गया। वह तीसरी बार नीट दे रही थी। उसके फोन से पेपर की तस्वीरें मिली हैं। वह अंडरगारमेंट्स में फोन रखकर लाई थी।

NEET UG Re Exam : जयपुर में नीट यूजी री एग्जाम के दौरान मोबाइल फोन के साथ पकड़ी गई छात्रा को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी छात्रा हिमांशी तिवारी को सोमवार को अदालत में पेश किया गया। छात्रा से पूछताछ में सामने आया कि उसने अंडरगारमेंट्स में मोबाइल फोन छिपा लिया था। इसके ऊपर उसने ढीली टी-शर्ट पहन ली, ताकि सुरक्षाकर्मियों को शक न हो। चेकिंग के दौरान मशीन की बीप बजी तो उसने कपड़ों में हुक लगा होने का बहाना बनाया। पकड़ी गई 22 वर्षीय छात्रा तीसरी बार नीट दे रही थी। वह गुर्जर की ढाणी रहने वाली है। बिंदायका स्थित राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल परीक्षा केंद्र में परीक्षा खत्म होने से करीब 15 मिनट पहले वीक्षक ने छात्रा को मोबाइल इस्तेमाल करते हुए पकड़ लिया था।
आईफोन की FSL जांच होगी
पुलिस अब छात्रा से जब्त आईफोन का डेटा रिकवर कराने और जांच के लिए उसे एफएसएल भेज रही है। मामले में परीक्षा केंद्र पर ड्यूटी कर रहे कर्मियों की लापरवाही और भूमिका की जांच डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण ने एडिशनल डीसीपी राजेश गुप्ता को सौंपी है। पुलिस ने परीक्षा केंद्र में लगे कैमरों की डीवीआर भी जब्त कर ली है।
पुलिस जांच में सामने आया कि छात्रा ने परीक्षा के दौरान पेपर की 5-6 फोटो खींची थीं। पूछताछ में उसने बताया कि वह एआई की मदद से सवालों के जवाब तलाशने के लिए फोन लेकर परीक्षा केंद्र में गई थी। अधिकारियों के अनुसार, उसके फोन से पेपर की तस्वीरें मिली हैं। दावा है कि पेपर खत्म होने से 15 मिनट पहले इन तस्वीरों को भेजने की कोशिश भी की गई, लेकिन जैमर के कारण ऐसा नहीं हो सका।
एक्ट में 5 साल सजा, 10 लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान
इस एक्ट में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी, संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे भर्ती बोर्ड, आईबीपीएस, केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों की अन्य भर्तियां शामिल हैं। इस कानून के तहत उम्मीदवार को डिबार भी किया जा सकता है। यह गैर जमानती अपराध की श्रेणी में आता है। दोषी मिलने पर 5 साल तक की सजा और 10 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है। संगठित अपराध साबित होने पर सजा 10 साल और जुर्माना 1 करोड़ रुपए तक हो सकता है।


