लाखों लेकर बांटे गए NEET के सवाल, CBI की गिरफ्त में कोचिंग सेंटर का मालिक
NEET-UG पेपर लीक मामले में सीबीआई ने लातूर के कोचिंग सेंटर संचालक शिवराज मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक उसके मोबाइल से लीक प्रश्नपत्र मिला और छात्रों से लाखों रुपये लेकर स्पेशल सेशन चलाए जाते थे।

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG के पेपर लीक मामले में अब जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने महाराष्ट्र के लातूर में चल रहे एक कोचिंग सेंटर के संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को गिरफ्तार कर लिया है। एजेंसी का आरोप है कि वह उस पूरे नेटवर्क का हिस्सा था जो परीक्षा से पहले ही सवाल और जवाब चुनिंदा छात्रों तक पहुंचा रहा था। सीबीआई की कार्रवाई के बाद इस मामले ने फिर से पूरे देश में हलचल मचा दी है, क्योंकि लाखों छात्र हर साल इस परीक्षा की तैयारी में सालों लगा देते हैं।
मोबाइल फोन से मिला लीक पेपर
सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक रविवार को मोटेगांवकर के ठिकानों पर छापेमारी की गई। इसी दौरान उसके निजी मोबाइल फोन से NEET-UG परीक्षा का लीक प्रश्नपत्र बरामद हुआ। जांच एजेंसी का कहना है कि यह वही पेपर था जो 3 मई को आयोजित परीक्षा में आया था। सीबीआई का दावा है कि आरोपी को 23 अप्रैल को ही सवाल और उनके जवाब मिल गए थे। यानी परीक्षा से करीब 10 दिन पहले पेपर उसके पास पहुंच चुका था। अब एजेंसी मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज रही है ताकि डिलीट किए गए डेटा को भी रिकवर किया जा सके।
लाखों रुपये लेकर कराए जाते थे स्पेशल सेशन
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ छात्रों से कई लाख रुपये लेकर खास सेशन आयोजित किए जाते थे। इन क्लासों में छात्रों को सवाल लिखवाए जाते थे और बाद में वही सवाल असली परीक्षा में आए। सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि छात्रों ने अपने नोटबुक में जो सवाल लिखे थे, वे असली NEET पेपर से पूरी तरह मेल खाते थे। इससे शक और गहरा हो गया कि पेपर पहले ही लीक हो चुका था।
पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
इस मामले में इससे पहले भी कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। सीबीआई ने केमिस्ट्री के लेक्चरर पीवी कुलकर्णी और बायोलॉजी की शिक्षिका मनीषा मंडहरे को गिरफ्तार किया था। दोनों की पहचान मनीषा वाघमारे नाम की महिला के जरिए हुई थी, जो पहले से सीबीआई की हिरासत में है। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन लोगों ने मिलकर ऐसे छात्रों को ढूंढा जिन्हें पैसे लेकर परीक्षा से पहले सवाल उपलब्ध कराए जा सकें।
कोचिंग सेंटर पर घंटों चली पूछताछ
रविवार दोपहर सीबीआई की टीम ने लातूर के शिवनगर इलाके में मौजूद रेनुकाई करियर सेंटर में छापा मारा। इससे पहले शुक्रवार को भी अधिकारियों ने मोटेगांवकर से करीब आठ घंटे तक पूछताछ की थी। अब एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे और पेपर आखिर सबसे पहले कहां से बाहर आया।
23 लाख छात्रों ने दी थी परीक्षा
NEET-UG देश की सबसे अहम मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में गिनी जाती है। इस बार परीक्षा भारत के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित हुई थी। करीब 23 लाख छात्रों ने इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA के मुताबिक 7 मई की शाम को परीक्षा में गड़बड़ी की जानकारी मिली थी। इसके बाद अगले ही दिन यह मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दिया गया।
छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता
पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी नाराजगी है। कई छात्रों का कहना है कि वे महीनों और सालों की मेहनत के बाद परीक्षा देते हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं मेहनती छात्रों के भरोसे को तोड़ देती हैं। अब सबकी नजर सीबीआई जांच पर टिकी है कि आखिर इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन लोग थे।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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