
90 लाख दो, NEET के मार्क्स बदल MBBS में दाखिला दिला देंगे; CBI ने कहा- घोटाले में सरकारी कर्मी शामिल नहीं
सीबीआई ने नीट यूजी 2025 एडमिशन घोटाले की जांच में किसी भी सरकारी अधिकारी या एनटीए कर्मी की भूमिका से इनकार किया है। हालांकि आरोपियों ने एनटीए अधिकारियों से संपर्क और प्रभाव होने का दावा किया था, लेकिन जांच में इसका कोई सबूत नहीं मिला।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2025 दाखिले से जुड़े एडमिशन घोटाले में किसी भी सरकारी अधिकारी के शामिल होने की बात से साफ इनकार कर दिया है। हालांकि इस मामले में गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों ने नीट एग्जाम कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अधिकारियों के साथ कनेक्शन और अच्छे लिंक होने का दावा किया था। सीबीआई की जांच में इस मामले में एनटीए अधिकारियों सहित किसी भी सरकारी अधिकारी के शामिल होने का कोई सबूत नहीं मिला। जांच एजेंसी ने 24 दिसंबर, 2025 को भ्रष्टाचार निवारण एक्ट के तहत मामलों पर अधिकार क्षेत्र वाली विशेष अदालत में यह जानकारी दी।
सीबीआई के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, 'चूंकि कथित घोटाले में सरकारी अधिकारियों की भूमिका को खारिज कर दिया गया है, इसलिए अब इस मामले की सुनवाई अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में होगी।'
सीबीआई ने 9 जून, 2025 को सोर्स इन्फॉर्मेशन के आधार पर कथित घोटाले के संबंध में पहली एफआईआर दर्ज की थी। यह एफआईआर प्राइवेट व्यक्तियों, एनटीए के "अज्ञात अधिकारियों" और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ पीसी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की उन धाराओं के तहत दर्ज की गई थी जो आपराधिक साजिश, भ्रष्ट/अवैध तरीकों या व्यक्तिगत प्रभाव से सरकारी अधिकारियों को प्रभावित करने से संबंधित हैं।
90 लाख रुपये के बदले नीट स्कोर में हेरफेर कराने का दावा
एफआईआर के अनुसार आरोपियों ने नीट 2025 एग्जाम में अंडरग्रेजुएट कोर्स के लिए उपस्थित हुए मेडिकल उम्मीदवारों के माता-पिता से संपर्क किया और दावा किया कि वे एनटीए अधिकारियों के संपर्क में हैं। एनटीए अफसरों से उनके लिंक हैं। उन्होंने दावा किया 90 लाख रुपये के बदले नीट स्कोर में हेरफेर कर सकते हैं। यह रकम किस्तों में देनी थी।
आरोपी को जून में गिरफ्तार किया गया था
जांच एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि आरोपों की पुष्टि करने के लिए मेडिकल उम्मीदवारों के माता-पिता बनकर दो सीबीआई अधिकारियों ने शहर के एक जाने-माने होटल में एक आरोपी से मुलाकात की। आरोपी ने दावा किया कि वह कम स्कोर के कारण अयोग्य माने गए उम्मीदवारों के अंकों में हेरफेर करने के लिए एनटीए अधिकारियों को प्रभावित कर सकता है, और प्रति उम्मीदवार 90 लाख रुपये मांगे, जिसे बातचीत के बाद घटाकर 87.5 लाख कर दिया गया। सूत्रों ने बताया कि जाल में फंसे व्यक्ति और एक अन्य आरोपी को जून में गिरफ्तार किया गया था।





