51 साल के शख्स का MBBS में दाखिला, NEET में 720 में से 192 अंक, 2 PhD और MBA के बाद अब बनेंगे डॉक्टर
NEET MBBS Admission : फार्माकोलॉजी, 2 पीएचडी और एमबीए करने के बाद सुरेश कुमार ने एमबीबीएस कर डॉक्टर बनने का ख्बाव जिंदा रखा। अब 51 साल की उम्र में वे नीट पास कर सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट पाने में सफल हुए।

NEET MBBS Admission : सीखने की कोई उम्र नहीं होती। अगर जज्बा और जुनून हो तो किसी भी उम्र में ख्बाव पूरा किया जा सकता है। इसकी शानदार और ताजा मिसाल हैं तमिलनाडु के 51 वर्षीय सुरेश कुमार, जिन्होंने एक ऐसी उम्र में एमबीबीएस में दाखिला लिया है जब लोग अपनी रिटायरमेंट की प्लानिंग कर रहे होते हैं। नागपट्टिनम जिले के सुरेश कुमार को 12वीं पास करने के 34 साल बाद सरकारी एमबीबीएस सीट पर एडमिशन मिला है। 1992 में 12वीं पास करने के बाद मेडिकल कॉलेज में प्रवेश न मिलने से उनका डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह गया था। लेकिन अब 51 वर्ष की उम्र में उन्होंने NEET परीक्षा पास कर सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS सीट हासिल कर ली है। नागपट्टिनम गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल उनके घर के पास ही है।
पेशे से डायग्नोस्टिक्स, पास है 2 पीएचडी और एमबीए की डिग्री
सुरेश कुमार पहले से काफी पढ़े लिखे व्यक्ति हैं। कुमार ने 1992 में 12वीं क्लास पास की थी पर उनका इरादा मेडिसिन करने का था लेकिन उन्हें सीट नहीं मिली। फार्माकोलॉजी में उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन की। इसके बाद MBA किया और दो PhD डिग्रियां भी हासिल कीं। वर्तमान में वे डायग्नोस्टिक्स इंडस्ट्री में कार्यरत हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की ओर के मेडिकल दाखिले में आयु सीमा खत्म किए जाने के बाद उन्होंने 2022 में पहली बार MBBS एंट्रेंस NEET UG दिया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद करीब डेढ़ साल की तैयारी के बाद उन्होंने 2026 में 720 में से 192 अंक हासिल कर दिव्यांग (PWD) कोटा के तहत नागपट्टिनम सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट प्राप्त की।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक नागपट्टिनम जिले के वेलंकन्नी के रहने वाले कुमार अब अपनी 72 साल की मां के साथ रहने और लगभग 7km साइकिल चलाकर मेडिकल कॉलेज जाने की योजना बना रहे हैं। उनके बच्चे कक्षा 8वीं और 10वीं में हैं। उनकी पत्नी दुर्गा एक टीचर हैं। परिवार के सभी सदस्यों ने उनके इस फैसले में पूरा साथ दिया है। पत्नी दुर्गा ने कहा, "मुझे खुशी है कि वे अपने सपने को पूरा कर रहे हैं। पढ़ाई के लिए उम्र कोई क्राइटेरिया नहीं है।"
MBBS के बाद पीजी करेंगे
कुमार ने कहा कि वह MBBS के बाद पोस्टग्रेजुएट मेडिकल डिग्री करना चाहते हैं और उन्होंने क्लिनिकल प्रैक्टिस और डायग्नोस्टिक्स के बीच फैसला नहीं किया है। उन्होंने दूसरे NEET कैंडिडेट्स को सलाह दी कि पहले कोई दूसरा कोर्स करें और अगर दिलचस्पी बनी रहे तो बाद में मेडिसिन में वापस आ जाएं।
सपने की दिशा में प्रयास
उन्होंने कहा कि नौकरी करने के बावजूद मैं रात में पढ़ाई करता था और विषय के संपर्क में रहने के लिए अपने बेटे को बायोलॉजी भी पढ़ाता था। उनकी पत्नी ने उन्हें नौकरी छोड़कर पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित करने में बहुत मदद की।
चलने-फिरने की क्षमता हो गई सीमित
एक पुराने सड़क हादसे में उन्हें ऐसी चोट लगी थी, जिससे उनकी चलने-फिरने की क्षमता तो सीमित हो गई, लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा। उनका कहना है कि वे कम उम्र के छात्रों के साथ पढ़ने के लिए उत्साहित हैं और मानते हैं कि उम्र सिर्फ एक नंबर है। काम से लौटने के बाद वे पढ़ाई में समय लगाते थे और अक्सर रात 10 बजे से आधी रात तक पढ़ते थे।
पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्रों का करते थे अभ्यास
अपनी तैयारी का अंदाजा लगाने के लिए वे पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्रों का अभ्यास करते थे और 2023 से 2025 तक हर साल अपनी प्रगति का आकलन करते थे। पहली बार असफल होने पर उन्होंने तमिल में परीक्षा दी थी, लेकिन दूसरी बार उन्होंने अंग्रेजी भाषा चुनी जो उनके 34 साल के पेशेवर अनुभव के अनुकूल थी और यह फैसला सफल रहा।
PWD सीटों के लिए सबसे कम उम्मीदवार
स्पेशल कैटेगरी के कैंडिडेट्स की चेन्नई के तमिलनाडु गवर्नमेंट मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में ऑफलाइन काउंसलिंग हुई, जबकि जनरल कैटेगरी के कैंडिडेट्स ने ऑनलाइन रजिस्टर किया। ऑफलाइन काउंसलिंग स्पोर्ट्स कैटेगरी में 15 सीटों, एक्स-सर्विसमैन के बच्चों के लिए 11, PWD कैटेगरी के तहत 224 और 7.5% कोटे के तहत स्टूडेंट्स के लिए 614 सीटों के साथ शुरू हुई। 108 कैंडिडेट्स के साथ, PWD के लिए सबसे कम एप्लीकेंट्स थे। स्पोर्ट्स कैटेगरी में कॉम्पिटिशन बहुत कड़ा था, जहाँ 15 सीटों के लिए 280 कैंडिडेट्स ने मुकाबला किया। एक्स-सर्विसमैन कोटे के लिए 366 और 7.5% सरकारी स्कूल स्टूडेंट्स कोटे के तहत 3,806 स्टूडेंट्स थे।


