
NEET में 2 बार फेल, MBBS दाखिले के लिए काटा पंजा, DPharma ग्रेजुएट ने खुद लगाया सुन्न करने का इंजेक्शन
यूपी के जौनपुर में एक 25 साल के युवक ने विकलांग कोटे से एमबीबीएस सीट पाने की चाहत में खुद से अपने पैर का पंजा काट लिया। उसने डीफार्मा किया था। इसके बाद दो बार नीट में फेल हो चुका था।
यूपी में जौनपुर के लाइन बाजार थाना क्षेत्र के खलीलपुर गांव से रविवार की सुबह पुलिस को सूचना मिली कि एक युवक को अज्ञात लोगों ने पीटकर अचेत कर दिया। जाते समय उसके बाएं पैर का पंजा काटकर ले गए। इस मामले में पुलिस ने जांच की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पता चला कि 25 साले के युवक ने खुद ही अपने हाथ से सुन्न होने का पहले इंजेक्शन लगाया फिर ग्राइंडर से अपना पांव का पंजा काट लिया। उसने डीफार्मा ( DPharma ) किया हुआ था और इंजेक्शन लगाना जानता था। ऐसा उसने विकलांग कोटे से एमबीबीएस ( MBBS ) में एडमिशन पाने के लिए किया था। वह एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा नीट यूजी ( NEET UG ) में दो बार फेल हो गया था। पैर का पंजा काटकर वह दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाना चाहता था ताकि दिव्यांग कोटे से उसका दाखिला हो जाए। इसके लिए उसने बीएचयू, वाराणसी जाकर दिव्यांग प्रमाण पत्र के बारे में जानकारी भी ली थी।
सीओ सिटी गोल्डी गुप्ता ने बताया कि घटना शनिवार की रात करीब 12 बजे की है। सुबह पुलिस को सूचना मिली कि गांव निवासी 25 वर्षीय सूरज भास्कर को किसी ने पीटकर उसका पैर काट लिया है। अज्ञात के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। चूंकि घटना का विवरण जिस हिसाब से बताया गया था उससे लग रहा था कि मामला संदिग्ध है। लगातार दो दिन रविवार और सोमवार को पीड़ित से अस्पताल में मिलने के बाद और पूछताछ के दौरान भी कई बातें संदिग्ध लगीं। पूछताछ में सूरज बार-बार अपने बयान बदल रहा था। वह पुलिस को गुमराह करने की कोशिश कर रहा था। फिर सीडीआर, इलेक्ट्रानिक साक्ष्य के जरिए तथ्य जुटाए गए। पता चला कि इसमें किसी भी बाहरी व्यक्ति की भूमिका नहीं है। उसने खुद ही अपना पैर काट लिया है। खेत में कुछ इंजेक्शन और रैपर मिले। उससे पता चला कि उसने सुन्न करने का इंजेक्शन भी लगाया था।
प्रेमिका ने भी खोले राज
पुलिस ने सूरज की कॉल डिटेल्स भी निकलवाईं थी। जांच में पता चला कि सूरज की एक प्रेमिका है जिससे वह शादी करना चाहता है। जब पुलिस ने प्रेमिका से पूछताछ की, तो यह चौकाने वाला खुलासा हुआ। प्रेमिका ने बताया कि सूरज हर हाल में 2026 में डॉक्टर बनना चाहता था। वह अक्टूबर में बीएचयू के मेडिकल कॉलेज भी गया था ताकि अपना दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवा सके। लेकिन शरीर से पूरी तरह स्वस्थ होने के कारण सर्टिफिकेट नहीं बन पाया।
किया था डीफार्मा ( DPharma ), सुन्न करने के लिए खुद से लगाए एनेस्थीसिया के इंजेक्शन
पुलिस ने बताया कि पैर को साफ-सुथरा काटा गया था। ऐसा लग रहा था कि किसी मशीन का इस्तेमाल किया गया था। पैर को हथियार से काटे जाने का कोई सबूत नहीं मिला। सीओ सिटी ने बताया कि पुलिस ने CDR, BTS और टावर डंप की भी जांच की। इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर पता चला कि पीड़ित पर हमला नहीं हुआ था। आधी रात को कोई उससे मिलने भी नहीं गया था। सूरज ने डीफार्मा किया हुआ था। फार्मेसी की डिग्री से यह शक और गहरा हो गया कि उसे इंजेक्शन लगाना आता है। पुलिस का मानना है कि उसने दर्द से बचने के लिए पहले खुद को एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया और फिर अपना पैर काट लिया।
सीओ सिटी ने बताया कि जांच में पता चला कि सूरज ने सुबह 5 बजे अपने परिवार वालों को फोन किया था, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया। इसके बाद उसने एक रिश्तेदार को फोन किया। इसके बाद परिवार वालों को घटना के बारे में पता चला।
सूरज की डायरी में लिखी थी एमबीबीएस में एडमिशन लेने की बात
जांच के दौरान पुलिस को एक डायरी मिली। पुलिस के मुताबिक सूरज भास्कर इस डायरी में लिखता था। जांच में यह भी पता चला कि कोई भी काम शुरू करने से पहले वह एक लक्ष्य तय करता था और उसे अपनी डायरी में लिखता था। उसने 2026 में एमबीबीएस में एडमिशन लेने के बारे में भी अपनी डायरी में लिखा था। उसने शादी का रजिस्ट्रेशन फॉर्म भी भरा था।
सिटी सर्किल ऑफिसर ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस सूरज को जिला अस्पताल ले गई। वहां से उसे बेहतर इलाज के लिए एक ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। पुलिस ने बताया कि सूरज की हालत अब स्थिर है और अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद उसका बयान दर्ज किया जाएगा।





