MBBS Admission: मनपसंद एमबीबीएस सीट चाहिए? तो काउंसलिंग के दौरान भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां

By Prachi
लाइव हिन्दुस्तान
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MBBS Admission 2026: नीट परीक्षा में अच्छा स्कोर लाने के बाद भी काउंसलिंग में की गई एक छोटी सी गलती आपको पसंदीदा एमबीबीएस सीट छीन सकती है। जानिए चॉइस फिलिंग के दौरान किन 5 गलतियों से बचना बेहद जरूरी है।

MBBS Admission 2026
NEET UG Counseling 2026

NEET UG Counseling 2026, MBBS Admission: नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET UG 2026) का रिजल्ट आने के बाद अब मेडिकल एस्पिरेंट्स और उनके अभिभावकों की निगाहें 'मेडिकल काउंसलिंग कमेटी' (MCC) और राज्य स्तरीय काउंसलिंग प्रक्रियाओं पर टिकी हैं। अक्सर देखा जाता है कि परीक्षा में बेहतरीन स्कोर हासिल करने के बाद भी कई होनहार छात्र काउंसलिंग की हड़बड़ी या सही जानकारी न होने के कारण अपनी पसंदीदा एमबीबीएस सीट गंवा बैठते हैं। यदि आप भी इस साल काउंसलिंग में हिस्सा ले रहे हैं, तो चॉइस फिलिंग के दौरान इन 5 बड़ी गलतियों से बचना आपके करियर के लिए बेहद जरूरी है।

नए सीट मैट्रिक्स के मुताबिक देशभर में 9,911 नई एमबीबीएस सीटों को मंजूरी दी गई है। इसके बाद देश में एमबीबीएस की कुल सीटों की संख्या बढ़कर 1,36,939 हो गई है।

1. अंतिम तिथि या आखिरी समय का इंतजार करना

काउंसलिंग में रजिस्ट्रेशन करने, फीस जमा करने और कॉलेजों की प्राथमिकता चॉइस फिलिंग भरने के लिए एक निश्चित समय दिया जाता है। कई छात्र सोचते हैं कि अभी तो समय बाकी है और वे आखिरी दिन फॉर्म भरते हैं। आखिरी घंटों में लाखों छात्रों के एक साथ पोर्टल पर आने से सर्वर डाउन हो जाता है, जिससे फीस अटकने या फॉर्म सबमिट न होने का बड़ा जोखिम रहता है। समय सीमा खत्म होने से कम से कम 24 घंटे पहले अपनी प्रक्रिया पूरी कर लें।

2. कॉलेजों की गलत प्राथमिकता (ऑडर ऑफ प्रिफरेंस)

काउंसलिंग में सबसे महत्वपूर्ण चरण कॉलेजों का ऑडर तय करना है। कई छात्र बिना सोचे-समझे या केवल नाम सुनकर किसी कम पसंदीदा कॉलेज को ऊपर रख देते हैं। यदि आपको पहली पसंद में ही कम प्राथमिकता वाला कॉलेज अलॉट हो गया, तो आगे के राउंड्स में बेहतर कॉलेज मिलने के रास्ते बंद या सीमित हो सकते हैं। अपने स्कोर और पिछले वर्षों के कट-ऑफ के आधार पर ही कॉलेजों की लिस्ट तैयार करें।

3. चॉइस को 'लॉक' न करना

अपनी पसंद के कॉलेज चुनने के बाद छात्रों को अपनी चॉइस को 'Lock' करना होता है। कई बार छात्र केवल लिस्ट सेव कर छोड़ देते हैं। सिस्टम अंतिम तिथि पर इसे ऑटो लॉक कर देता है, लेकिन अंतिम क्षणों के तकनीकी ग्लिच से बचने के लिए खुद ध्यान से जांच करके समय पर चॉइस लॉक कर लें।

4. बॉन्ड पॉलिसी और फीस स्ट्रक्चर को नजरअंदाज करना

अलग-अलग राज्यों और कॉलेजों के नियम, सर्विस बॉन्ड और फीस संरचना अलग-अलग होती है। किसी भी कॉलेज को अपनी सूची में शामिल करने से पहले उसकी फीस, हॉस्टल चार्ज और ग्रामीण सेवा बॉन्ड की शर्तों को अच्छी तरह पढ़ लें, ताकि अलॉटमेंट के बाद पछताना न पड़े।

5. डॉक्यूमेंट्स और एलिजिबिलिटी में लापरवाही

काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान अपने सभी शैक्षणिक दस्तावेज, कैटेगरी सर्टिफिकेट और आईडी प्रूफ पूरी तरह तैयार रखें। गलत या पुराना प्रमाण पत्र अपलोड करने से आपका अलॉटमेंट रद्द हो सकता है।

भारत के टॉप 5 मेडिकल कॉलेज कौन-से हैं?

1. ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (AIIMS), दिल्ली

2. पीजीआईएमईआर (PGIMER), चंडीगढ़

3. क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC), वेल्लोर

4. जिपमेर (JIPMER), पुडुचेरी

5. संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGIMS), लखनऊ

समझें NEET काउंसलिंग का पूरा गणित

नीट परीक्षा पास करने वाले सभी छात्र अब मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) और अपनी संबंधित राज्य काउंसलिंग अथॉरिटीज के जरिए सीटों के लिए आवेदन करेंगे। यह काउंसलिंग प्रक्रिया मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित होती है:

15% ऑल इंडिया कोटा (AIQ): इसके अंतर्गत देश भर के सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों की 15% सीटों के साथ-साथ एम्स (AIIMS), जिपमेर (JIPMER), डीम्ड और सेंट्रल यूनिवर्सिटीज की सभी सीटों पर दाखिला होता है। इसकी काउंसलिंग प्रक्रिया MCC द्वारा अपनी आधिकारिक वेबसाइट mcc.nic.in पर आयोजित की जाती है।

85% स्टेट कोटा: प्रत्येक राज्य की अपनी काउंसलिंग अथॉरिटी बची हुई 85% सीटों के लिए राज्य स्तरीय काउंसलिंग का आयोजन करती है, जिसमें केवल उसी राज्य के मूल निवासी छात्र भाग ले सकते हैं। यह काउंसलिंग मुख्य रूप से चार राउंड में आयोजित की जाती है, जिसमें राउंड 1, राउंड 2, मॉप-अप राउंड और स्ट्रे वैकेंसी राउंड शामिल होते हैं।

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शॉर्ट बायो: प्राची लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पिछले 2 वर्षों से वे करियर, शिक्षा और सरकारी नौकरियों से जुड़े विषयों पर लिख रही हैं। मुश्किल खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी विशेषता है। वे 2024 से लाइव हिन्दुस्तान की करियर टीम का हिस्सा हैं।

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प्राची ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 'नन्ही खबर' से की थी, जहां उन्होंने जमीनी स्तर पर खबरों के महत्व को समझा। इसके बाद, उन्होंने 'सी.वाई. फ्यूचर लिमिटेड' और 'कुटुंब' जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बतौर कंटेंट राइटर काम करते हुए अपनी लेखनी और रिसर्च स्किल्स को निखारा। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने के बाद, वे करियर डेस्क पर सक्रिय हैं और छात्रों के लिए करियर विकल्पों, बोर्ड परीक्षाओं, जॉब और प्रतियोगी परीक्षाओं की बारीकियों को कवर कर रही हैं।

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प्राची ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से इंग्लिश जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया है। उनकी शैक्षणिक नींव दिल्ली यूनिवर्सिटी से है, जहां से उन्होंने इतिहास में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इतिहास की अच्छी जानकारी होने के कारण, वे आज की खबरों को बेहतर तरीके से समझ और समझा पाती हैं। यही वजह है कि उनके लेखों में जानकारी पूरी तरह सटीक और अधिक भरोसेमंद होती है।

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