Success Story: 3 बार फेल, सहे घर वालों के ताने; ट्रक ड्राइवर की बेटी ने निकाला NEET
कायनात खानम दरभंगा जिला के बिरौल प्रखंड के एक छोटे से गांव मोरवारा की रहने वाली है। उनके पिता इम्तियाज अहमद खान ट्रक ड्राइवर हैं। इसी से पूरे परिवार का खर्च चलता है।

NEET कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाना जाता है। इसकी राह आसान नहीं होती, लेकिन मजबूत इरादों के आगे मुश्किलें भी हार मान लेती हैं। बिहार के दरभंगा की रहने वाली कायनात ने अपनी मेहनत, धैर्य और परिवार के सहयोग के दम पर यह साबित कर दिया। आर्थिक तंगी, री-एग्जाम को लेकर बने असमंजस और मानसिक तनाव जैसी चुनौतियों के बावजूद उसने अपने डॉक्टर बनने के सपने को टूटने नहीं दिया। कायनात ने NEET में सफलता हासिल कर डॉक्टर बनने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा दिया। उसकी यह उपलब्धि न केवल उसके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि उन हजारों छात्रों के लिए भी प्रेरणा है जो आर्थिक चुनौतियों के बीच अपने बड़े सपनों को साकार करने की कोशिश कर रहे हैं। चलिए जानते हैं कि कौन कै कायनात खानम
कौन कायनात खानम
कायनात खानम दरभंगा जिला के बिरौल प्रखंड के एक छोटे से गांव मोरवारा की रहने वाली है। उनके पिता इम्तियाज अहमद खान ट्रक ड्राइवर हैं। इसी से पूरे परिवार का खर्च चलता है। इम्तियाज ने बेटी को पढ़ाने के लिए दिन-रात मेहनत की। लेकिन उन्होंने कभी बेटी की पढ़ाई में कमी नहीं आने दी। इम्तियाज अहमद कहते हैं कि बेटी का डॉक्टर बनने का सपना उनका भी सपना बन गया था।
री-एग्जाम में मिले 593 अंक
उनकी बेटी कायनात खानम ने गरीबी को मात देकर री-नीट की परीक्षा पास कर लिया है। उसे NEET की परीक्षा में 593 अंक पाकर 1407वां स्थान मिला है। कायनात के परिवार में मम्मी-पापा, एक छोटा भाई और एक बहन है। बता दें कि कायनात के पिता दरभंगा शहर में किराए के मकान में बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
किराए के कमरे में रहकर की पढ़ाई
कायनात ने बताया कि उनकी शुरुआती पढ़ाई पश्चिम बंगाल में नाना-नानी के घर हुई थी। लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान वह अपने गांव मोरवारा लौट आईं। गांव में ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान नेटवर्क की बड़ी समस्या थी। तब पिता ने दरभंगा में किराए का घर लेकर उन्हें बेहतर माहौल में पढ़ाई का मौका दिया। उन्होंने 11वीं और 12वीं की पढ़ाई दरभंगा के एमआरएम स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने डॉक्टर बनने के लक्ष्य के साथ नीट की तैयारी शुरू की।
3 बार रहीं असफल
कायनात की राह आसान नहीं थी। उन्होंने NEET की तैयारी शुरू की लेकिन पहले तीन बार वह असफल रहीं। हर बार असफलता मिली लेकिन हिम्मत नहीं हारी। इतना ही नहीं घर वालों ने कहा कि पढ़ाई छोड़ दो, क्योंकि तुमसे नहीं हो पाएगा। इस तानों के बावजूद कायनात ने अपने सपनों को लेकर अडिग रही। वह अपनी गलतियों से सीखती गई।
पेपर लीक के बाद डिप्रेशन में चली गयी थीं
2026 में हुई नीट परीक्षा में पेपर लीक से परेशान हो गई। कुछ दिनों में वह डिप्रेशन में चली गईं लेकिन उनके टीचर ने खूब मेहनत की। ऐसे में री-नीट की परीक्षा में कायनात ने 720 में से 593 और अंक हासिल किए और NEET UG क्रैक कर लिया।
12-13 घंटे करती थीं पढ़ाई
कायनात ने बताया कि यह सफलता का श्रेय मेरे मम्मी पापा के साथ शिक्षक को जाता है। पहले जब नीट का पेपर हुया तो क्वालीफाई स्कोर था लेकिन 10 दिन बाद पता चला पेपर लीक होने के कारण परीक्षा रद्द हो गई है। उनकी एक धारणा थी री-नीट में पेपर टफ होता है तो दिन रात पढ़ाई में लगे रहे और 12 से 13 घंटे रोज पढ़ाई करते थे।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण:
धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
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