देश भर में कितनी MBBS सीटें, यूपी में 14000; किस राज्य में हैं सबसे ज्यादा
नीट यूजी 2026 के नतीजे 20 जुलाई तक आने की उम्मीद बै। छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी है कि एनएमसी ने 9911 नई एमबीबीएस सीटें बढ़ाई हैं जिससे देश में कुल सीटें 136939 हो गई हैं।

मेडिकल की पढ़ाई करने का सपना देखने वाले लाखों नौजवानों के लिए एक बेहद शानदार और सुकून देने वाली खबर सामने आई है। वो छात्र जो दिन-रात एक करके नीट परीक्षा की तैयारी करते हैं, उनके लिए अब डॉक्टर बनने की राह थोड़ी और आसान होने जा रही है। नीट यूजी 2026 (NEET UG 2026) के दोबारा हुए इम्तिहान के नतीजों का इस वक्त बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए ने 20 जुलाई तक इन नतीजों का ऐलान कर सकती है। फिलहाल 20 लाख से ज्यादा उम्मीदवार अपने स्कोरकार्ड की राह देख रहे हैं। नतीजों के आते ही मेडिकल कोर्सेज में दाखिले के लिए काउंसलिंग का सिलसिला भी शुरू हो जाएगा। लेकिन इस काउंसलिंग के शुरू होने से ठीक पहले, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने 2026-27 के एकेडमिक सेशन के लिए हर राज्य के हिसाब से एमबीबीएस (MBBS) सीटों का नया ब्योरा जारी कर दिया है। यह नया आंकड़ा छात्रों और उनके माता-पिता के चेहरों पर मुस्कान लाने वाला है। ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल 9,911 नई एमबीबीएस सीटों का बंपर इजाफा हुआ है। इसके साथ ही पुरानी 1,27,028 सीटों का रिन्यूअल भी हो गया है। यानी अब पूरे देश के 823 मेडिकल कॉलेजों में कुल मिलाकर 1,36,939 एमबीबीएस सीटें हो गई हैं। ध्यान रहे कि इन आंकड़ों में 'इंस्टीट्यूट्स ऑफ नेशनल इंपोर्टेंस' (INI) जैसे AIIMS वगैरह की सीटें शामिल नहीं हैं।
यह जो नई सीटों की बढ़ोतरी हुई है, उसे मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) से पूरी तरह मंजूरी मिल चुकी है। इसमें कुछ नए मेडिकल कॉलेजों का खुलना और पहले से चल रहे संस्थानों में सीटों का बढ़ना, दोनों ही चीजें शामिल हैं। इस पहल से उन छात्रों को सीधा फायदा मिलेगा जो महज कुछ अंकों के फासले से पीछे रह जाते थे।
कर्नाटक ने मारी बाजी
अगर हम राज्यों के हिसाब से बात करें, तो इस साल सबसे बड़ा जंप कर्नाटक में देखने को मिला है। कर्नाटक में 1,300 नई एमबीबीएस सीटों को मंजूरी मिली है, जिसके बाद वहां कुल सीटों की तादाद 15,395 तक पहुंच गई है। इसके बाद तमिलनाडु का नंबर आता है, जहां 950 नई सीटें जुड़ी हैं और कुल आंकड़ा 13,999 हो गया है। वहीं राजस्थान भी पीछे नहीं है; वहां 900 सीटों के इजाफे के साथ कुल सीटें 8,080 हो गई हैं।
दूसरे राज्यों में भी यह तस्वीर काफी अच्छी नजर आ रही है। पश्चिम बंगाल को 825 नई सीटें मिली हैं, जिससे वहां अब 7,200 सीटें हो गई हैं। तेलंगाना ने भी 810 सीटों की बढ़ोतरी के साथ अपना आंकड़ा 10,250 कर लिया है। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में भी 800 सीटों का इजाफा हुआ है, और अब वहां कुल 14,000 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध हैं। इसके अलावा, बिहार को 740 नई सीटें मिली हैं (कुल 4,160) और महाराष्ट्र ने भी 400 नई सीटों के साथ अपनी कुल तादाद 13,099 कर ली है।
देश के टॉप 10 राज्य जहां MBBS की सबसे ज्यादा सीटें हैं -
- कर्नाटक - 15395
- उत्तर प्रदेश - 14000
- तमिलनाडु - 13999
- महाराष्ट्र - 13099
- तेलंगाना - 10250
- राजस्थान - 8080
- गुजरात - 7750
- आंध्र प्रदेश - 7465
- पश्चिम बंगाल - 7200
- मध्य प्रदेश - 6020
कमीशन की सख्त हिदायत
इन सबके बीच, नेशनल मेडिकल कमीशन ने सभी मेडिकल कॉलेजों को एक बेहद सख्त हिदायत भी जारी की है। कमीशन ने साफ कहा है कि दाखिले सिर्फ और सिर्फ उन्हीं सीटों पर होंगे जिन्हें MARB ने 2026-27 के सेशन के लिए आधिकारिक तौर पर मंजूरी दी है।
NMC ने अपनी चेतावनी में एकदम साफ लफ्जों में कहा है, "किसी भी सूरत में, तय और मंजूर की गई सीटों से ज्यादा दाखिले नहीं लिए जाएंगे। अगर किसी भी मेडिकल कॉलेज या संस्थान ने अपनी लिमिट से बाहर जाकर एक भी एक्स्ट्रा एडमिशन लिया, तो उसे नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट, 2019 के नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा।" ऐसा करने वाले डिफॉल्टर कॉलेजों पर तगड़ा जुर्माना और कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
काउंसलिंग के लिए कैसे रहें तैयार?
जैसे ही NTA नतीजे घोषित करेगा, आगे की प्रकिया शुरू हो जाएगी। छात्रों को यह सलाह दी जाती है कि वे अभी से अपने सभी जरूरी कागजात दुरुस्त कर लें। दसवीं-बारहवीं की मार्कशीट, जाति प्रमाण पत्र और नीट का एडमिट कार्ड एक फाइल में लगा लें। अक्सर देखा गया है कि ऐन मौके पर किसी एक कागज की कमी से सीट हाथ से निकल जाती है। चूंकि अब सीटें बढ़ चुकी हैं, इसलिए कट-ऑफ में भी मामूली राहत मिल सकती है। अपनी तैयारी पुख्ता रखें और काउंसलिंग के हर अपडेट पर नजर बनाए रखें।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
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