मई के सभी रविवार बुक, कैसे होगी NEET की दोबारा परीक्षा? आ गई नई मुश्किल

Himanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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NEET-UG 2026 दोबारा परीक्षा को लेकर नई मुश्किल सामने आई है। मई-जून के सभी रविवार लगभग बुक हैं, जबकि सरकार नए हाइब्रिड परीक्षा मॉडल पर भी विचार कर रही है।

मई के सभी रविवार बुक, कैसे होगी NEET की दोबारा परीक्षा? आ गई नई मुश्किल

NEET-UG 2026 रद्द होने के बाद देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता अब और बढ़ गई है। सबसे बड़ी चुनौती दोबारा परीक्षा की तारीख तय करने को लेकर सामने आ रही है, क्योंकि मई और जून के अधिकांश रविवार पहले से ही विभिन्न राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय परीक्षाओं के लिए बुक हैं। ऐसे में केंद्र सरकार, NTA और स्वास्थ्य मंत्रालय के सामने सुरक्षित, पारदर्शी और समय पर परीक्षा कराने की बड़ी जिम्मेदारी खड़ी हो गई है। इस बीच पेपर लीक विवाद के बाद NEET परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी भी शुरू हो चुकी है।

रविवार खाली नहीं, परीक्षा केंद्र जुटाना सबसे बड़ी चुनौती

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक NEET जैसी परीक्षा के लिए देशभर में हजारों स्कूलों और कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाया जाता है। चूंकि अधिकतर सरकारी स्कूल और कॉलेज रविवार को बंद रहते हैं, इसलिए इसी दिन परीक्षा आयोजित करना सबसे आसान माना जाता है। लेकिन आने वाले हफ्तों के लगभग सभी रविवार पहले से तय परीक्षाओं में व्यस्त हैं। टीआआई को एक एंट्रेंस एग्जाम काउंसलर ने बताया कि 5000 से अधिक परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था करना, लाखों प्रश्नपत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और बड़ी संख्या में पर्यवेक्षकों की तैनाती बेहद जटिल प्रक्रिया है। कम समय में “लीक-प्रूफ” परीक्षा आयोजित करना प्रशासनिक स्तर पर बड़ी चुनौती बन गया है।

दो महीने तक लेट हो सकता है MBBS सत्र

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जून के मध्य तक री-एग्जाम कराया भी जाता है, तो परिणाम जुलाई के मध्य तक ही आ पाएंगे। इसके बाद ऑल इंडिया कोटा और राज्य स्तरीय काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू होगी, जिससे पूरा एडमिशन शेड्यूल पीछे खिसक जाएगा। अभिभावक प्रतिनिधि सुधा शेनॉय ने कहा कि स्थिति 2024 जैसी बन सकती है, जब NEET पेपर लीक मामले में देशभर में कई याचिकाएं दायर हुई थीं। उन्होंने कहा कि अगर कोर्ट में नए मामले जाते हैं, तो काउंसलिंग और मेडिकल कॉलेजों का सत्र और ज्यादा देर से शुरू हो सकता है। कई सरकारी मेडिकल कॉलेज, जो सामान्यतः अगस्त की शुरुआत में शुरू हो जाते हैं, अब काफी देर से खुल सकते हैं।

कोर्ट केस से और बढ़ सकती है परेशानी

री-एग्जाम को लेकर कुछ अभिभावक अदालत जाने की तैयारी में भी हैं। उनका तर्क है कि दोबारा परीक्षा से छात्रों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव पड़ेगा और पूरे शैक्षणिक कैलेंडर पर असर होगा। अगर अलग-अलग राज्यों में याचिकाएं दायर होती हैं, तो फैसला आने तक परीक्षा प्रक्रिया अटक सकती है। इससे लाखों छात्रों का भविष्य अनिश्चितता में फंस सकता है।

अब बदल सकता है NEET परीक्षा का पूरा सिस्टम

NEET-UG 2024 पेपर लीक विवाद और 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद केंद्र सरकार अब परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों पर विचार कर रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के बीच नई व्यवस्था को लेकर चर्चा चल रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक कंप्यूटर-असिस्टेड सिक्योर पेपर बेस्ड टेस्ट मॉडल पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इस सिस्टम में प्रश्नपत्र परीक्षा से ठीक पहले एन्क्रिप्टेड तरीके से परीक्षा केंद्रों या क्षेत्रीय हब तक भेजे जाएंगे और वहीं सुरक्षित प्रिंटर से प्रिंट किए जाएंगे। इसका उद्देश्य प्रश्नपत्रों के ट्रांसपोर्ट और स्टोरेज के दौरान होने वाले संभावित लीक को रोकना है।

पूरी तरह ऑनलाइन परीक्षा फिलहाल मुश्किल

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि करीब 23 से 25 लाख छात्रों के लिए एक दिन में पूरी तरह ऑनलाइन परीक्षा कराना अभी संभव नहीं है। देश में इतने बड़े स्तर की कंप्यूटर आधारित परीक्षा के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक एक दिन में केवल 1 से 1.5 लाख छात्रों को ही ऑनलाइन परीक्षा में शामिल कराया जा सकता है। अगर परीक्षा कई शिफ्ट में कराई जाती है, तो “नॉर्मलाइजेशन” और अलग-अलग शिफ्ट की कठिनाई स्तर को लेकर विवाद खड़े हो सकते हैं। इसके अलावा ग्रामीण और छोटे शहरों के छात्रों के सामने इंटरनेट, बिजली और कंप्यूटर सेंटर जैसी सुविधाओं की कमी भी बड़ी समस्या है। यही वजह है कि सरकार फिलहाल पूरी तरह ऑनलाइन परीक्षा की बजाय हाइब्रिड मॉडल को बेहतर विकल्प मान रही है।

राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशों पर चर्चा तेज

सरकार जिस हाइब्रिड मॉडल पर विचार कर रही है, वह राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशों का हिस्सा बताया जा रहा है। यह कमेटी NEET-UG 2024 विवाद के बाद परीक्षा सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बनाई गई थी। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन हाल के विवादों के बाद परीक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत पर लगभग सहमति बन चुकी है।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

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