फिजिक्स में सिर्फ 9 नंबर, हाथ में नीट का लीक पेपर; ऐसे डॉक्टर बनने निकला था ऋषि, पिता ने की थी सेटिंग
NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। 12वीं में बेहद कम नंबर पाने वाले छात्र के लिए 10 लाख देकर पेपर खरीदा गया था।

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 में हुए पेपर लीक मामले ने अब एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसे जानने के बाद लोग सोचने पर मजबूर हैं। अगर पेपर लीक का मामला सामने नहीं आता, तो क्या बेहद कम नंबर पाने वाला छात्र भी सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेकर डॉक्टर बन जाता? सीबीआई जांच में सामने आए खुलासों ने पूरे सिस्टम को हिला दिया है। जांच के दौरान जयपुर के जमवारामगढ़ के बिवाल परिवार का नाम सामने आया है। आरोप है कि दिनेश बिवाल ने अपने बेटे ऋषि के लिए लाखों रुपये खर्च कर NEET का पेपर खरीदा था।
12वीं की मार्कशीट ने खड़े किए गंभीर सवाल
जांच में सामने आई ऋषि की 12वीं की मार्कशीट अब चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, ऋषि सेकंड डिवीजन से पास हुआ था और वह भी ग्रेस अंकों के सहारे। थ्योरी में उसके नंबर बेहद कम बताए जा रहे हैं। फिजिक्स में सिर्फ 9 अंक, केमिस्ट्री में 15 और बायोलॉजी में केवल 20 नंबर मिले थे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर पेपर लीक के जरिए उसे NEET में अच्छे अंक मिल जाते, तो क्या वह मेडिकल कॉलेज तक पहुंच जाता?
10 लाख देकर खरीदा गया था पेपर
सीबीआई सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी दिनेश बिवाल ने पूछताछ में माना है कि उसने अपने बेटे ऋषि और भतीजे अमन के लिए पेपर हासिल करने में करीब 10 लाख रुपये खर्च किए थे। बताया जा रहा है कि पेपर एक नेटवर्क के जरिए छात्रों तक पहुंचाया गया। आरोप है कि परीक्षा से लगभग 15 घंटे पहले ही कई छात्रों के पास प्रश्नपत्र पहुंच चुका था। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह पूरा खेल टैलीग्राम और PDF फाइलों के जरिए चलाया गया। इसमें लाखों रुपये का लेन-देन भी हुआ।
लीक पेपर मिलने के बाद भी सिर्फ 107 नंबर
वहीं आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक कथित तौर पर लीक पेपर मिलने के बावजूद ऋषि परीक्षा में सिर्फ 107 अंक ही हासिल कर सका। सूत्रों का कहना है कि पूछताछ में दिनेश बिवाल ने दावा किया कि उसे लगभग 600 नंबर वाला पेपर उपलब्ध कराया गया था। इसके बावजूद उसका बेटा अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया। यही खुलासा अब सोशल मीडिया से लेकर शिक्षा जगत तक बड़ी बहस का विषय बना हुआ है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर ऐसे छात्र सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर डॉक्टर बन जाएं, तो इसका असर सीधे मरीजों की जिंदगी पर पड़ेगा।
कोचिंग सेंटर्स तक पहुंचा था पेपर
जांच में यह भी सामने आया है कि पेपर सिर्फ एक-दो छात्रों तक सीमित नहीं था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीकर के कई कोचिंग सेंटर्स में पढ़ने वाले छात्रों तक भी यह पेपर पहुंचा था। ऋषि पर आरोप है कि उसने राकेश मंडावरिया नाम के व्यक्ति के जरिए इस पेपर को आगे फैलाया। लालच में पेपर ज्यादा छात्रों तक पहुंचा और वहीं से पूरा मामला खुलने लगा। अब सीबीआई इस नेटवर्क की हर कड़ी को खंगाल रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि पेपर सबसे पहले कहां से लीक हुआ और किन-किन लोगों तक पहुंचाया गया।
अब 21 जून को होगी दोबारा परीक्षा
पेपर लीक विवाद के बाद रद्द की गई NEET UG 2026 परीक्षा अब दोबारा कराई जाएगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए ने घोषणा की है कि री-एग्जाम 21 जून को होगा। एजेंसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि भारत सरकार की मंजूरी के बाद नई तारीख तय की गई है। इस फैसले के बाद 22 लाख से ज्यादा छात्रों के बीच परीक्षा को लेकर बनी अनिश्चितता काफी हद तक साफ हो गई है। हालांकि अब सबसे बड़ी चुनौती परीक्षा की विश्वसनीयता वापस लाने की है।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


