NEET-UG 2026 Paper Leak: कोर्ट पहुंचा आरोपी, NTA से संसद ने पूछे बड़े सवाल; नीट पेपर लीक में अब तक क्या हुआ
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में आरोपी शुभम खैरनार को 6 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया। वहीं संसद की समिति ने NTA से परीक्षा सुरक्षा, सिस्टम की कमजोरियों और भविष्य की तैयारियों पर तीखे सवाल पूछे।

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 का पेपर लीक मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। रविवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले के आरोपी शुभम खैरनार को 6 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने आरोपी को अदालत में पेश किया था। इस मामले की जांच अब कई स्तरों पर चल रही है और एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक कैसे हुआ और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।
22 लाख छात्रों की मेहनत पर उठा सवाल
नीट-यूजी देश की सबसे बड़ी और सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं में गिनी जाती है। इस साल 3 मई को भारत के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में परीक्षा आयोजित की गई थी। इसमें करीब 22 लाख छात्र शामिल हुए थे। लेकिन परीक्षा के बाद कई राज्यों से पेपर लीक और धांधली के आरोप सामने आने लगे। मामला इतना बढ़ गया कि 12 मई को परीक्षा रद्द करनी पड़ी। इसके बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिली। कई छात्रों ने कहा कि उन्होंने सालों मेहनत की, लेकिन पेपर लीक ने पूरी परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए।
संसद की समिति ने NTA से पूछे तीखे सवाल
इस पूरे विवाद के बीच 21 मई को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह संसद की स्थायी समिति के सामने पेश हुए। समिति ने उनसे विस्तार से पूछा कि आखिर परीक्षा प्रणाली में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। सूत्रों के मुताबिक समिति के सदस्यों ने पूछा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या बदलाव किए जाएंगे। कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली, परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा, टेस्ट की अवधि और निगरानी व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने कहा कि बैठक काफी अच्छी रही और सभी सदस्यों ने अपने सुझाव दिए। उन्होंने माना कि सभी सदस्य परीक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता में हैं।
NTA पर बढ़ा दबाव
पेपर लीक विवाद के बाद एनटीए पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। छात्रों, विपक्षी दलों और शिक्षा विशेषज्ञों ने एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। सूत्रों के अनुसार समिति के सदस्यों ने यह भी पूछा कि इस लीक के लिए जिम्मेदार कौन है और सुरक्षा में कहां चूक हुई। अधिकारियों ने जवाब दिया कि सीबीआई जांच जारी है और जांच से सिस्टम की कमजोरियां सामने आएंगी। साथ ही यह भी कहा गया कि परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और “फूलप्रूफ” बनाने की कोशिश की जा रही है।
अब कंप्यूटर आधारित परीक्षा की तैयारी
इस विवाद के बाद सरकार और एनटीए अब परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव पर विचार कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक अगले साल से नीट-यूजी को कंप्यूटर आधारित टेस्ट यानी सीबीटी मोड में कराने की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है कि इससे पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कुछ हद तक रोक लगाई जा सकेगी। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ ऑनलाइन परीक्षा कर देने से समस्या खत्म नहीं होगी, जब तक निगरानी और साइबर सुरक्षा मजबूत नहीं की जाती।
21 जून को दोबारा परीक्षा
केंद्र सरकार ने अब 21 जून को दोबारा परीक्षा कराने का फैसला किया है। शिक्षा मंत्रालय ने इस बार परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को पहले से ज्यादा सख्त करने के निर्देश दिए हैं। बताया जा रहा है कि परीक्षा केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल, डिजिटल निगरानी और कड़ी पहचान जांच जैसे कदम उठाए जाएंगे ताकि दोबारा किसी तरह की गड़बड़ी न हो सके।
छात्रों में तनाव और असमंजस
दोबारा परीक्षा की घोषणा के बाद लाखों छात्रों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। कई छात्र मानसिक दबाव और तनाव की बात कर रहे हैं क्योंकि उन्हें फिर से तैयारी करनी पड़ रही है। सोशल मीडिया पर भी लगातार यह मांग उठ रही है कि परीक्षा प्रणाली में स्थायी सुधार किए जाएं ताकि मेहनती छात्रों का भविष्य किसी लापरवाही या भ्रष्ट नेटवर्क की वजह से प्रभावित न हो।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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