15 मिनट एक्स्ट्रा टाइम, 14 जून तक आएंगे एडमिट कार्ड; NEET UG री-एग्जाम की बड़ी बातें
NEET UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि नीट की परीक्षा अगले साल से ऑनलाइन होगी। इसके साथ ही इस बार री-एग्जाम के लिए 21 जून की तारीख निर्धारित की गई है।

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। लाखों छात्रों और परिवारों को झकझोर देने वाले पेपर लीक विवाद के बाद अब अगले साल से नीट यूजी परीक्षा ऑनलाइन मोड में कराई जाएगी। यानी अब ओएमआर शीट पर पेन से गोले भरने वाला सिस्टम खत्म होगा और परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट यानी CBT मोड में होगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह ऐलान किया। उन्होंने साफ कहा कि सरकार अब जड़ पर चोट करना चाहती है ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाएं दोबारा न हों।
'अब OMR नहीं, कंप्यूटर पर होगी परीक्षा'
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि अगले शैक्षणिक सत्र से नीट परीक्षा पूरी तरह ऑनलाइन होगी। उनके मुताबिक, तकनीक के इस दौर में परीक्षा माफिया भी नए तरीके अपना रहे हैं, इसलिए परीक्षा सिस्टम को भी बदलना जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद सिर्फ दोबारा परीक्षा कराना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। शिक्षा मंत्रालय और NTA अब ऐसी व्यवस्था तैयार कर रहे हैं जिसमें प्रश्नपत्र लीक होने की संभावना बेहद कम हो जाए।
21 जून को होगा री-एग्जाम, 14 जून को आएंगे एडमिट कार्ड
सरकार ने नीट यूजी 2026 की नई परीक्षा तारीख भी घोषित कर दी है। अब री-एग्जाम 21 जून को कराया जाएगा। इसके लिए एडमिट कार्ड 14 जून को जारी होंगे। मंत्री ने कहा कि परीक्षा की तैयारी बड़े स्तर पर चल रही है ताकि MBBS समेत मेडिकल कोर्सेज का नया सत्र ज्यादा देर तक प्रभावित न हो।
कैसे सामने आया पेपर लीक का मामला?
धर्मेंद्र प्रधान के मुताबिक, नीट यूजी 2026 की परीक्षा 3 मई को हुई थी, लेकिन चार दिन बाद “गेस पेपर” को लेकर कई शिकायतें सामने आने लगीं। धीरे-धीरे मामला गंभीर होता गया और एक व्हिसलब्लोअर की शिकायत केंद्रीय एजेंसियों तक पहुंची। जांच में बाद में यह पुष्टि हुई कि पेपर सचमुच लीक हुआ था। इसके बाद सरकार ने 12 मई को परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। इस फैसले ने लाखों छात्रों को फिर से तैयारी करने की मजबूरी में डाल दिया, लेकिन सरकार का कहना है कि छात्रों के भविष्य से समझौता नहीं किया जा सकता।
CBI जांच में कई गिरफ्तारियां
पेपर लीक मामले की जांच अब सीबीआई कर रही है। अब तक कई राज्यों में छापेमारी हो चुकी है और कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है। सरकार का कहना है कि यह सिर्फ एक परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता का सवाल है। इसलिए परीक्षा माफिया और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों को चेतावनी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में धर्मेंद्र प्रधान ने उन लोगों को भी चेतावनी दी जो सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाकर छात्रों में डर और भ्रम पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग खुले तौर पर री-एग्जाम को बिगाड़ने और छात्रों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार ऐसे लोगों पर नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।
छात्रों की फीस वापसी और फ्री रजिस्ट्रेशन की तैयारी
सरकार पहले ही संकेत दे चुकी है कि जिन छात्रों की परीक्षा रद्द हुई है, उन्हें राहत देने के लिए फीस वापसी और नए रजिस्ट्रेशन को मुफ्त रखने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। इससे उन परिवारों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है जो पहले ही आर्थिक और मानसिक दबाव झेल रहे हैं।
पहले भी उठे थे सवाल, अब सिस्टम बदलने की तैयारी: धर्मेंद्र प्रधान
धर्मेंद्र प्रधान ने याद दिलाया कि परीक्षा गड़बड़ियों को लेकर पहले भी विवाद उठ चुके हैं। इन्हीं मामलों के बाद राधाकृष्णन समिति बनाई गई थी, जिसने परीक्षा सुरक्षा मजबूत करने पर कई सुझाव दिए थे। अब सरकार का दावा है कि जीरो टॉलरेंस नीति के तहत परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जाएंगे, ताकि भविष्य में छात्रों को ऐसी अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
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