NEET UG Counselling: MCC सेंट्रल Vs स्टेट काउंसलिंग, क्या है अंतर, कौन योग्य, क्या है MBBS दाखिले की प्रक्रिया

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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MBBS दाखिले के समय दो समानांतर प्रणालियां राष्ट्रीय और राज्य कोटा काम करती हैं। परीक्षा के उलट, काउंसलिंग की कोई एक प्रक्रिया नहीं होती है। एडमिशन अलग-अलग नेशनल और स्टेट-लेवल सिस्टम के जरिए होते हैं, और अलग-अलग अथॉरिटीज सीटों की अलग-अलग कैटेगरीज को संभालती हैं।

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NEET MCC vs State Counselling : नीट यूजी 2026 के नतीजे घोषित होने के बाद एमबीबीएस सीट के लिए अब अगला चरण काउंसलिंग का है। कई उम्मीदवार सोचते हैं कि नीट यूजी पास करने के बाद वे स्वयं एक ही काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल हो जाते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। बल्कि दाखिले के समय दो समानांतर प्रणालियां राष्ट्रीय और राज्य कोटा काम करती हैं। परीक्षा के उलट, काउंसलिंग की कोई एक प्रक्रिया नहीं होती है। एडमिशन अलग-अलग नेशनल और स्टेट-लेवल सिस्टम के जरिए होते हैं, और अलग-अलग अथॉरिटीज सीटों की अलग-अलग कैटेगरीज को संभालती हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ हेल्थ सर्विसेज़ (DGHS) के अधीन काम करने वाली मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC), सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 15 प्रतिशत 'ऑल इंडिया कोटा' सीटों के लिए काउंसलिंग कराती है। यह सेंट्रल यूनिवर्सिटीज़, ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ (AIIMS), जवाहरलाल इंस्टिट्यूट ऑफ़ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (JIPMER), डीम्ड यूनिवर्सिटीज़, एम्प्लॉईज़ स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (ESIC) के संस्थानों और आर्म्ड फोर्सेज़ मेडिकल कॉलेज (AFMC), पुणे में 100 प्रतिशत सीटों पर एडमिशन की प्रक्रिया भी संभालती है।

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बाकी बची 85 प्रतिशत 'स्टेट कोटा' सीटों को संबंधित राज्यों की काउंसलिंग अथॉरिटीज भरती हैं। ये अथॉरिटीज अपने-अपने राज्यों के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में भी एडमिशन की प्रक्रिया कराती हैं। नतीजतन, जो उम्मीदवार 'ऑल इंडिया कोटा' और 'स्टेट कोटा' दोनों तरह की सीटों के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उन्हें आमतौर पर MCC पोर्टल के साथ-साथ अपने संबंधित राज्य के काउंसलिंग पोर्टल पर भी अलग-अलग रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है।

कौन ले सकेगा नीट काउंसलिंग में हिस्सा

उम्मीदवारों को अपनी कैटगरी के लिए निर्धारित न्यूनतम क्वालिफाइंग परसेंटाइल प्राप्त करके नीट यूजी पास करना अनिवार्य है। आमतौर पर जनरल और ईडब्ल्यूएस के उम्मीदवारों के लिए 50वां परसेंटाइल और एससी/एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के उम्मीदवारों के लिए 40वां परसेंटाइल होता है।

किस तरह काउंसिलिंग प्रक्रिया पूरी होगी

1. मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा सीटों के लिए काउंसलिंग आयोजित करती है। यह केंद्रीय विश्वविद्यालयों, एम्स, जवाहरलाल स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, डीम्ड विश्वविद्यालयों आदि की 100 प्रतिशत सीटों पर दाखिले संभालती है।

2. सरकारी मेडिकल कॉलेजों की शेष 85 प्रतिशत राज्य कोटा सीटें राज्य काउंसलिंग अधिकारियों द्वारा भरी जाती हैं। ये अधिकारी अपने संबंधित राज्यों के तहत आने वाले निजी (प्राइवेट) मेडिकल कॉलेजों के लिए भी दाखिले आयोजित करते हैं। यानी जो उम्मीदवार ऑल इंडिया कोटा और राज्य कोटा दोनों सीटों के लिए प्रयास कर रहे हैं।

कितने चरण होते हैं

पहला चरण : सभी पात्र पंजीकृत उम्मीदवारों के लिए खुला है। पंजीकरण और काउंसलिंग शुल्क के भुगतान के बाद, उम्मीदवार अपने पसंदीदा कॉलेजों और पाठ्यक्रमों को भरते हैं और लॉक करते हैं। सीट आवंटन नीट रैंक, आरक्षण श्रेणी और सबमिट किए गए विकल्पों के क्रम पर आधारित होता है।

दूसरा चरण : इसमें जो उम्मीदवार राउंड 1 में शामिल नहीं हुए थे या जिन्होंने फ्री एग्जिट विकल्प का उपयोग किया था, वे राउंड 2 के लिए पंजीकरण कर सकते हैं।

तीसरा चरण : मॉप-अप राउंड है, जो मुख्य रूप से उन उम्मीदवारों के लिए होता है जिन्हें पहले दो दौर के बाद भी सीट नहीं मिली है।

चौथा चरण : यह चरण खाली रह गई सीटों को भरने के लिए होता है। डीम्ड यूनिवर्सिटी की सीटें चाहने वाले उम्मीदवारों के लिए कोई नया पंजीकरण नहीं होता है। सीट आवंटन पंजीकृत उम्मीदवारों के मौजूदा पूल से ही किया जाता है।

प्रवेश के लिए ये जरूरी

नीट-यूजी एडमिट कार्ड, रैंक लेटर, मेडिकल काउंसलिंग कमेटी का अंतिम आवंटन पत्र, कक्षा 10वीं और 12वीं की मार्कशीट और सर्टिफिकेट, फोटो पहचान पत्र, श्रेणी प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), चार से पांच पासपोर्ट आकार के फोटोग्राफ

विकल्प भरना अहम हिस्सा

काउंसलिंग में विकल्प भरना सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक है। सीट मैट्रिक्स जारी होने के बाद उम्मीदवार जितने चाहें उतने कॉलेजों और पाठ्यक्रमों की सूची बना सकते हैं, जिन्हें वे चुनने के इच्छुक हैं। प्राथमिकताओं की संख्या पर कोई सीमा नहीं है।

ये गलतियां पड़ेंगी भारी

प्रमाणपत्रों से मेल न खाने वाले विवरण दर्ज करना

विकल्पों को लॉक करना भूल जाना

बाद में बेहतर विकल्प मिलने की उम्मीद में शुरुआती काउंसलिंग दौर को छोड़ देना

सीट आवंटन के बाद रिपोर्टिंग की समय-सीमा चूक जाना

पंजीकरण के बाद श्रेणी के विवरण को संशोधित करने का प्रयास करना शामिल

Pankaj Vijay

लेखक के बारे में

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पंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार

शॉर्ट बायो पंकज विजय एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में livehindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे करियर, स्कूल व हायर एजुकेशन, जॉब्स से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। 9 वर्षों से यहां इसी भूमिका में हैं। सरकारी भर्तियों, बोर्ड व एंट्रेंस एग्जाम, प्रतियोगी परीक्षाओं, उनके परिणाम, बदलते दौर में करियर की नई राहों, कोर्स, एडमिशन एवं नए जमाने के रोजगार के लिए जरूरी स्किल्स से जुड़ी अपडेट तेजी से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।


15 से अधिक सालों का अनुभव

पंकज विजय ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। अमर उजाला समाचार पत्र में रिसर्च, संपादकीय और करियर एजुकेशन जॉब्स डेस्क पर काम किया। यहां उन्हें फीचर लेखन व रिपोर्टिंग का भी मौका मिला। इसके बाद उन्होंने आज तक डिजिटल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आज तक वेबसाइट पर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और एजुकेशन व रोजगार जगत से जुड़ी खबरें लिखीं। इसके बाद एनडीटीवी ऑनलाइन में एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर इस विषय में अपनी समझ को और व्यापक बनाया। एनडीटीवी की पारी के बाद वे लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े और बीते 9 वर्षों से करियर एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर रहे हैं।


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भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा, गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में एमए व दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में बीए ऑनर्स किया है। एनसीसी सी सर्टिफिकेट होल्डर हैं जिसके चलते उन्हें रक्षा क्षेत्र जैसे पुलिस व सेनाओं की भर्तियों की बेहतर समझ है।


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