मुआवजा मिलना चाहिए; 640 नंबर पर भी नहीं मिली सरकारी मेडिकल सीट, नीट छात्रा ने उठाए रैंकिंग सिस्टम पर सवाल
NEET UG 2024 में 635 अंक हासिल करने वाली केरल की छात्रा अंजलि ने रैंकिंग और परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। अंजलि ने इसके लिए मुआवजे की मांग की है।

NEET UG 2024 की परीक्षा को लेकर उठे सवालों की गूंज अब भी पूरी तरह थमी नहीं है। केरल की एक छात्रा अंजलि ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा में नंबर, रैंक और सीट अलॉटमेंट के पैटर्न को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। छात्रा का दावा है कि 2024 में उनकी रैंकिंग का पैटर्न पिछले वर्षों के मुकाबले काफी अलग था। उनका कहना है कि 635 नंबर हासिल करने के बावजूद उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट नहीं मिल सकी और आखिरकार परिवार को भारी आर्थिक बोझ उठाकर सेल्फ-फाइनेंस्ड मेडिकल कॉलेज का विकल्प चुनना पड़ा।
2020 से NEET दे रही थीं अंजलि
न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए बयान में अंजलि ने बताया कि वह साल 2020 से 2024 तक लगातार NEET UG परीक्षा में शामिल होती रही हैं। उनके मुताबिक, 2022-23 में उनके अंक इतने थे कि वह सेल्फ-फाइनेंस्ड मेडिकल कॉलेज में दाखिला ले सकती थीं, लेकिन उन्होंने दोबारा परीक्षा देने का फैसला किया ताकि बेहतर स्कोर के साथ सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला हासिल कर सकें। इसके बाद उन्होंने NEET UG 2024 में हिस्सा लिया। अंजलि के मुताबिक, परीक्षा में उन्हें पहले 640 अंक मिले थे लेकिन बाद में करेक्शन के बाद उनका स्कोर घटकर 635 अंक रह गया।
635 नंबर के बावजूद सरकारी सीट नहीं मिलने का दावा
अंजलि का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि 635 अंकों के आधार पर उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट मिल जाएगी। हालांकि, 2024 में हाई कटऑफ और रैंकिंग में हुए बदलावों के कारण उनका दावा है कि उन्हें सरकारी सीट नहीं मिल सकी। आखिरकार उन्हें सेल्फ-फाइनेंस्ड मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेना पड़ा। छात्रा के मुताबिक, इससे उनके परिवार पर हर साल करीब 10 लाख रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ गया। अंजलि ने पीटीआई से कहा कि उनके माता-पिता लंबे समय तक काम करते हैं और परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें कर्ज तक लेना पड़ा है।
परीक्षा में कथित गड़बड़ी से प्रभावित छात्रों को मुआवजा देने की मांग
छात्रा ने NEET UG 2024 में कथित अनियमितताओं का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि जिन छात्रों को परीक्षा में हुई गड़बड़ियों का नुकसान उठाना पड़ा, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। अंजलि के परिवार ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को ईमेल भेजकर भी हस्तक्षेप की मांग की है। उनके पिता ने स्पष्ट किया कि परिवार सरकार के खिलाफ नहीं है। उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि परीक्षा व्यवस्था में जिन कमियों की वजह से छात्रों को नुकसान हुआ, उन्हें दूर करने के लिए संबंधित अधिकारी जरूरी कदम उठाएं।
क्या था NEET UG 2024 का पूरा विवाद?
NEET UG 2024 का विवाद परीक्षा के बाद सामने आई पेपर लीक और परीक्षा केंद्रों पर कथित अनियमितताओं की शिकायतों से शुरू हुआ था। परिणाम जारी होने के बाद एक और बड़ा सवाल तब उठा, जब 67 उम्मीदवारों के 720 में से 720 अंक हासिल करने की बात सामने आई। इसके अलावा, परीक्षा के दौरान समय गंवाने वाले 1,563 उम्मीदवारों को एनटीए की ओर से ग्रेस मार्क्स दिए गए थे। इसके चलते कुछ उम्मीदवारों के स्कोर 718 और 719 तक पहुंच गए, जिसे लेकर भी काफी विवाद हुआ।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। शीर्ष अदालत ने ग्रेस मार्क्स को रद्द करने का आदेश दिया और प्रभावित उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा देने का विकल्प दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पूरी NEET UG 2024 परीक्षा रद्द करने का आदेश नहीं दिया। अदालत ने कहा था कि पूरे देश में परीक्षा की व्यवस्था को प्रभावित करने वाली किसी व्यापक और व्यवस्थित गड़बड़ी के पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं।
आज भी उठ रहे हैं परीक्षा व्यवस्था पर सवाल
NEET UG 2024 के विवाद ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता और रैंकिंग व्यवस्था को लेकर देशभर में बहस छेड़ दी थी। अब केरल की छात्रा अंजलि की ओर से सामने आए दावे ने एक बार फिर इस सवाल को सामने ला दिया है कि परीक्षा में हासिल अंक और वास्तविक मेडिकल सीट मिलने के बीच 2024 में आखिर कितना बड़ा अंतर पैदा हुआ था। हालांकि, अंजलि द्वारा लगाए गए आरोप उनके व्यक्तिगत अनुभव और दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या किसी संबंधित प्राधिकरण की ओर से इस विशेष मामले में दोष की पुष्टि सामने नहीं आई है।


