NEET में 197 से 695 तक, 4 बार नीट देकर डॉक्टर बना राकिब, 12वीं में थे 63 प्रतिशत अंक

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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NEET UG : राकिब ने नीट के चौथे प्रयास में 720 में से 695 अंक हासिल कर ऑल इंडिया 202वीं रैंक हासिल की। उन्हें गुजरात के सरकारी बीजे मेडिकल कॉलेज, अहमदाबाद में एमबीबीएस सीट मिली।

NEET UG success story raqib
नीट में राकिब की सफलता की कहानी

एमबीबीएस कर डॉक्टर बनने का सपना लिए हर साल करीब 21-22 लाख विद्यार्थी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी देते हैं। लेकिन सीटें बेहद कम होने के चलते ज्यादातर के सपने टूट जाते हैं। बहुत से तो दो या तीन बार ड्रॉप ईयर लेकर नीट देते हैं लेकिन फिर भी उनका एमबीबीएस सीट पाने का सपना साकार नहीं हो पाता। और वे आखिरकार हिम्मत हार जाते हैं और कोई दूसरा आसान रास्ता चुन लेते हैं। लेकिन यहां हम आपको ऐसे छात्र की कहानी बताने जा रहे हैं नीट के एक दो नहीं बल्कि चार अटेम्प्ट दिए। और फिर आखिरकार अपनी मंजिल पा ली। राकिब अकुंजी की सफलता की कहानी संघर्ष, दृढ़ संकल्प और हार न मानने वाले जज्बे की एक बेहतरीन मिसाल है। राकिब ने नीट (2022) के चौथे प्रयास में 720 में से 695 अंक हासिल कर ऑल इंडिया 202वीं रैंक हासिल की। उन्हें गुजरात के सरकारी बीजे मेडिकल कॉलेज, अहमदाबाद में एमबीबीएस सीट मिली।

मोहम्मद राकिब अकुंजी अहमदाबाद के पास हिम्मतनगर के रहने वाले हैं। 10वीं कक्षा तक वे एक बहुत ही होनहार और शांत स्वभाव के छात्र थे। पर जब उन्होंने 11वीं में साइंस स्ट्रीम ली, तो उन्हें नए विषयों को समझने में काफी दिक्कत हुई। जब वे क्लास में सवाल पूछते थे, तो उनके दोस्त उनका मज़ाक उड़ाते थे और उन्हें खींचते थे। इस दौरान उन्हें पेट में अल्सर की गंभीर बीमारी हो गई, जिसके कारण वे अक्सर स्कूल में बेहोश हो जाते थे। उनकी अटेंडेंस बहुत कम हो गई थी और उन्होंने जैसे-तैसे 11वीं पास की।

12वीं कक्षा में एक दिन भी स्कूल नहीं गए

11वीं कक्षा के खराब अनुभवों और स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उनका 12वीं का सफर आम छात्रों जैसा बिल्कुल नहीं था। राकिब 12वीं कक्षा में एक दिन भी स्कूल नहीं गए। उनका नाम सिर्फ हिम्मतनगर के स्कूल में दर्ज था, लेकिन वे वहां जाते नहीं थे। स्कूल में बुली किए जाने और पेट में अल्सर की गंभीर बीमारी के कारण, उनके पिता ने स्कूल से ज्यादा राकिब के स्वास्थ्य को तरजीह दी। इसलिए, राकिब अपनी बहन और जीजाजी (जो भुज में डॉक्टर हैं) के पास रहने चले गए। डॉ. आनंद मणि को दिए इंटरव्यू में राकिब ने बताया कि भुज में रहकर उन्होंने अपनी सेहत पर काफी काम किया, वर्कआउट किया और अपना वजन 95 किलो से घटाकर 83 किलो कर लिया।

कोई दोस्त नहीं, मां रहती थी दुखी

स्कूल में उनका कोई दोस्त नहीं था। उनकी मां इस बात से काफी दुखी रहती थीं कि राकिब को कभी किसी स्कूल रीयूनियन (reunion) या दोस्तों की पार्टी में नहीं बुलाया जाता था क्योंकि उनके साथियों ने उन्हें पूरी तरह से अलग-थलग कर दिया था। भुज में वे अपने जीजाजी के साथ अस्पताल जाते थे और उन्हें काम करते हुए देखते थे। यहीं से उन्हें 12वीं के दौरान डॉक्टर बनने की असली प्रेरणा मिली।

12वीं में 63 प्रतिशत अंक आएं

वे अपनी 12वीं की बोर्ड परीक्षा देने के लिए 26 जनवरी को हिम्मतनगर वापस आए। उनके प्रैक्टिकल रिकॉर्ड्स (Notes) तैयार नहीं थे, जिसके कारण शिक्षकों ने शुरुआत में उन्हें प्रैक्टिकल परीक्षा देने से मना कर दिया। प्रैक्टिकल लिखने में उनके पिता ने मदद की। राकिब के पिता ने रात भर जाग-जागकर खुद राकिब के लिए स्कूल की प्रैक्टिकल फाइल्स और पेपर्स लिखे थे। राकिब के लिए उन्होंने रात भर जागकर तीन-तीन प्रैक्टिकल लिखे, जिन्हें सामान्य तौर पर स्कूल जाने वाला बच्चा भी आसानी से नहीं लिख पाता। इससे राकिब का लिखने का समय बच गया और वे अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर लगा सके।

2019 में दिया पहला नीट मिले 197 अंक

नीट के पहले प्रयास में राकिब को केवल 197 अंक मिले। उन्होंने बिना किसी कोचिंग के हिम्मतनगर के एक इंग्लिश मीडियम स्कूल से पढ़ाई करते हुए नीट की परीक्षा दी थी। परिणाम खराब आने पर रिश्तेदारों और आसपास के लोगों ने उनका काफी मजाक उड़ाया। इस असफलता से वे काफी परेशान थे। वे अक्सर अकेले एक तालाब के किनारे जाकर बैठते थे और सोचते थे कि उन्हें जिंदगी में क्या करना है। उसी तालाब के किनारे बैठकर उन्होंने दृढ़ निश्चय किया कि चाहे जो हो जाए, वे डॉक्टर ही बनेंगे और लोगों को करके दिखाएंगे।

दूसरा प्रयास (नीट 2020): इस प्रयास में उनका स्कोर 150 अंक रहा। इस दौरान राकिब ने पढ़ाई के साथ-साथ अपने जीजाजी और उनके भाइयों (जो यूएस में कार्डियोलॉजिस्ट हैं) के साथ एक चैरिटेबल अस्पताल में काम करना शुरू किया था। अस्पताल में काम करते हुए और मरीजों की सेवा करते हुए उनका डॉक्टर बनने का सपना और अधिक मजबूत हो गया। इस काम ने उन्हें पढ़ाई जारी रखने की बहुत बड़ी प्रेरणा दी।

तीसरा प्रयास (नीट 2021): तीसरे प्रयास में उनके 413 अंक आए। पर फिजिक्स में केवल 10 नंबर आए थे। ये वो समय था जब समाज के तानों से तंग आकर उनकी मां रो पड़ती थीं, जिससे राकिब को भी बहुत दुख होता था। लेकिन इस कठिन दौर में उनके परिवार ने उनका पूरा साथ दिया।

चौथे प्रयास (नीट 2022) में फोड़ा नीट

राकिब की मेहनत रंग लाई और उन्होंने 695 अंक पाकर ऑल इंडिया रैंक 203 हासिल की। इस प्रयास में उन्होंने अपनी कमजोरियों पर काम किया, जिसके कारण उनके फिजिक्स के अंक जो पिछले साल सिर्फ 10 थे, इस बार बढ़कर 182 हो गए।

क्या हो रही थी गलती

राकिब पहले सवालों को हल करते समय तुरंत पीछे से उत्तर देख लेते थे, जो एक गलत आदत थी। बाद में उन्होंने इस आदत को बदला। उन्होंने गलत होने वाले हर सवाल के लिए एक अलग डायरी बनाई। वे अपनी गलतियों को लिखते थे और हर गलत प्रश्न का विश्लेषण करने में कम से कम 30 मिनट का समय देते थे।

Pankaj Vijay

लेखक के बारे में

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पंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार

शॉर्ट बायो पंकज विजय एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में livehindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे करियर, स्कूल व हायर एजुकेशन, जॉब्स से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। 9 वर्षों से यहां इसी भूमिका में हैं। सरकारी भर्तियों, बोर्ड व एंट्रेंस एग्जाम, प्रतियोगी परीक्षाओं, उनके परिणाम, बदलते दौर में करियर की नई राहों, कोर्स, एडमिशन एवं नए जमाने के रोजगार के लिए जरूरी स्किल्स से जुड़ी अपडेट तेजी से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।


15 से अधिक सालों का अनुभव

पंकज विजय ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। अमर उजाला समाचार पत्र में रिसर्च, संपादकीय और करियर एजुकेशन जॉब्स डेस्क पर काम किया। यहां उन्हें फीचर लेखन व रिपोर्टिंग का भी मौका मिला। इसके बाद उन्होंने आज तक डिजिटल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आज तक वेबसाइट पर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और एजुकेशन व रोजगार जगत से जुड़ी खबरें लिखीं। इसके बाद एनडीटीवी ऑनलाइन में एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर इस विषय में अपनी समझ को और व्यापक बनाया। एनडीटीवी की पारी के बाद वे लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े और बीते 9 वर्षों से करियर एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर रहे हैं।


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