NEET Topper: नीट टॉपर ने IIT के लिए ठुकराई MBBS सीट, अब BTech कर बनेंगे इंजीनियर
NEET UG Topper: नीट यूजी में ऑल इंडिया 35वीं रैंक और पश्चिम बंगाल में पहला स्थान हासिल करने वाले सब्यसाची डॉक्टर नहीं बनेंगे। उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस पढ़ने का फैसला किया है।

NEET UG Topper Success story: देश में हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं और इसके लिए दिन-रात मेहनत करके नीट यूजी (NEET UG) जैसी कठिन परीक्षा पास करते हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल के सब्यसाची लस्कर ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। सब्यसाची ने नीट यूजी परीक्षा में पूरे पश्चिम बंगाल में पहला स्थान हासिल किया और ऑल इंडिया 35वीं रैंक (AIR 35) प्राप्त की। इतनी शानदार रैंक मिलने के बाद भी उन्होंने डॉक्टरी का पेशा छोड़कर इंजीनियरिंग चुनने का फैसला किया है। अब वे आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur) में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE) की पढ़ाई करेंगे, जहां उनकी जुलाई से शुरू हो रही हैं।
कंप्यूटर साइंस और हार्डवेयर रिसर्च में है असली रुचि
सब्यसाची का कहना है कि उनके लिए अपना सपना पूरा करना सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने बताया कि वे पर्यावरण को लेकर बचपन से ही काफी संवेदनशील रहे हैं और दुनिया भर में ऊर्जा की खपत को कम करने के लिए काम करना चाहते हैं। सब्यसाची का लक्ष्य कंप्यूटर हार्डवेयर के क्षेत्र में एडवांस रिसर्च करना है, ताकि ऐसे डिवाइस और तकनीक तैयार की जा सकें जो कम बिजली और ऊर्जा का इस्तेमाल करें। जब उन्हें जेईई एडवांस्ड के जरिए आईआईटी खड़गपुर में सीट मिल गई, तो उन्होंने बिना किसी झिझक के MBBS को छोड़कर इंजीनियरिंग को ही आगे बढ़ाने का फैसला कर लिया।
पेपर लीक और री-टेस्ट के बीच नहीं खोया ध्यान
नीट परीक्षा में पेपर लीक की घटना और री-टेस्ट (Re-NEET) के कारण पैदा हुई अनिश्चितता ने देश भर के लाखों परीक्षार्थियों को तनाव में डाल दिया था। सब्यसाची भी शुरुआती दौर में थोड़े परेशान हुए थे, लेकिन उन्होंने इस समय का इस्तेमाल अपनी पढ़ाई को और मजबूत करने में किया। उन्होंने पहले टेस्ट के साथ-साथ री-टेस्ट में भी अपनी पूरी ईमानदारी से परीक्षा दी। री-टेस्ट में उनका प्रदर्शन पहली बार से भी ज्यादा बेहतर रहा, जिसके चलते उन्होंने 35वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की।
बायोलॉजी पसंदीदा विषय, लेकिन लक्ष्य इंजीनियरिंग
बीडीएम इंटरनेशनल स्कूल के छात्र रहे सब्यसाची ने साल 2024 में 10वीं बोर्ड परीक्षा में पूरे अंक हासिल किए थे और 12वीं में भी उनका प्रदर्शन बेहतरीन रहा। उनकी मां चमेली सरदार ने बताया कि उनके बेटे का पसंदीदा विषय भले ही बायोलॉजी रहा हो, लेकिन उसका मुख्य लक्ष्य हमेशा से एक इंजीनियर बनना ही था। इसी वजह से उसने JEE Main और JEE Advanced के साथ-साथ NEET की भी तैयारी की थी।
सब्यसाची का यह फैसला देश भर के विद्यार्थियों को यह संदेश देता है कि परीक्षा में चाहे कोई भी रैंक आए, करियर का चुनाव हमेशा अपनी रुचि और लक्ष्य के आधार पर ही करना चाहिए।


