NEET Success Story: 16-17 घंटे रोजाना पढ़ाई, AIR 1 आर्यन बनना चाहते हैं ऑन्कोलॉजिस्ट; इमोशनल कर देगी वजह
लुधियाना के रहने वाले आर्यन गुप्ता का टारगेट बीते कई सालों से अच्छे मेडिकल संस्थान से MBBS कर डॉक्टर बनना रहा है। वो बताते हैं कि मेरा सपना ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) बनने का है।

नीट यूजी 2026 री एग्जाम का रिजल्ट घोषित हो चुका है। पंजाब के आर्यन गुप्ता ने 720 में से 715 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया टॉप किया है। हालांकि इसके लिए आर्यन गुप्ता ने दिन-रात मेहनत की है। उनके माता और पिता दोनों ही डॉक्टर हैं। उनके लिए यह सपना जैसा लग रहा है। एक इंटरव्यू में वो बताते हैं कि कई बार नींद तक पूरी नहीं होती थी, लेकिन आज यह किसी सपने के सच होने जैसा लग रहा है। परिवार और सभी लोग बेहद खुश हैं। उनका सपना था कि वो ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) बने। लेकिन इसके पीछे की वजह काफी इमोशनल है।
ऑन्कोलॉजिस्ट बनने का सपना
लुधियाना के रहने वाले आर्यन गुप्ता का टारगेट बीते कई सालों से अच्छे मेडिकल संस्थान से MBBS कर डॉक्टर बनना रहा है। समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यी में वो बताते हैं कि मेरा सपना ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) बनने का है। जब मैं तीसरी कक्षा में था, तब मेरी दादी का कैंसर से निधन हो गया था। तभी मैंने कैंसर विशेषज्ञ बनने का संकल्प लिया था। उन्होंने कहा कि जीवन में अभी बहुत कुछ करना है, लेकिन फिलहाल इस सफलता से बेहद खुश हूं।
इतना ही नहीं हर कोई जानना चाहते है कि आर्यन गुप्ता ने कितने घंटे पढ़ाई कर ये मुकाम हासिल की है। इसके बारे में उन्होंने खुद बताया कि वो रोज करीब 16-17 घंटे पढ़ाई करते थे। वो बताते हैं कि अपने सपने को पूरा करने के लिए कई बार नींद तक पूरी नहीं होती थी। लेकिन उन्होंने अपने सपनों से कोई समझौता नहीं किया।
उपलब्धि का श्रेय
आर्यन गुप्ता का कहना है कि नीट जैसी परीक्षा में सफलता सिर्फ कड़ी मेहनत से ही नहीं, बल्कि किस्मत का साथ भी जरूरी होता है। वह अपनी इस उपलब्धि का श्रेय पूरे परिवार को देते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा अपने बड़े भाई को, जिन्होंने NEET UG 2025 में AIR 54 हासिल कर उन्हें प्रेरित किया।
डॉक्टर परिवार से आते हैं आर्यन
17 वर्षीय आर्यन एक डॉक्टर परिवार से आते हैं। उनके पिता एनेस्थिसियोलॉजिस्ट, मां स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) हैं। इसके अलावा उनके नाना-नानी, चाचा-चाची और बुआ-फूफा भी चिकित्सा पेशे से जुड़े हैं। ऐसे माहौल में पले-बढ़े आर्यन का मेडिकल क्षेत्र की ओर रुझान स्वाभाविक था।
पढ़ाई के दौरान ब्रेक है जरूरी
उन्होंने कहा कि किसी को भी नींद और ब्रेक से समझौता नहीं करना चाहिए। उसने कहा, "मैंने पक्का किया कि मैं रात में छह घंटे सोऊँ और दिन में एक घंटे की झपकी लूं। इससे मुझे मानसिक रूप से फिट रहने में मदद मिली, जिससे पढ़ाई में भी आसानी हुई।" थकान से बचने के लिए वह बीच-बीच में ब्रेक भी लेता था। एक रिपोर्ट के मुताबिक कॉम्पिटिटिव एग्जाम में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद उन्हें एक कोचिंग सेंटर में स्कॉलरशिप मिली थी। वे अपनी सफलता का श्रेय रेगुलर क्लासरूम टेस्ट के जरिए लगातार प्रैक्टिस और उन टीचर्स की गाइडेंस को देते हैं, जिन्होंने हर असेसमेंट के बाद उनके डाउट्स क्लियर किए। गुप्ता का मानना है कि वन ऑन वन होने वाले इन डाउट सेशन से उनके कॉन्सेट्स मज़बूत हुए, जिससे समय के साथ उनके परफॉर्मेंस में लगातार सुधार हुआ।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण:
धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।


