NEET : भेड़ें चराईं, खेतों में पसीना बहाया, सोलर लैंप में पढ़कर नीट में शानदार रैंक लाया दिव्यांग किसान का बेटा
NEET Success Story: 20 लोगों के परिवार में रहने वाले पुट्टाराज ने आर्थिक तंगी और बिजली की कमी जैसी बाधाओं के बावजूद सौर ऊर्जा से चलने वाले लैंप की रोशनी में पढ़ाई की और नीट यूजी में शानदार रैंक हासिल की।

NEET UG Success Story: कर्नाटक के पुट्टाराज भीमनूर ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से यह साबित कर दिया है कि जब इरादे मजबूत हो तो सफलता के आड़े आने वाली गरीबी और कठिन परिस्थितियां भी हार मान लेती हैं। भेड़ बकरियां चराने वाले पुट्टाराज ने शानदार रैंक के साथ मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी क्रैक कर लाखों गरीब विद्यार्थियों के सामने शानदार मिसाल पेश की है। आमतौर पर छात्र वीकेंड पर मौज मस्ती और घूमना फिरना करते हैं लेकिन कोप्पल जिले के छोटे से गांव हनुमानहल्ली के रहने वाले पुट्टाराज भीमनूर छुट्टियों के दौरान भेड़ें चराते थे और खेतों में काम करते थे। फुर्सत के पलों में वे पिता के साथ बोरवेल व मोटर मरम्मत का काम भी करते थे। अब पुट्टाराज ने नीट यूजी 2026 में एसटी वर्ग में ऑल इंडिया रैंक 694 हासिल कर अपने डॉक्टर बनने के सपने को नई उड़ान दी है। नीट परीक्षा 2026 में उनके 511 अंक है। उनकी ऑल इंडिया 76,000वीं रैंक है।
10वीं और 12वीं में भी शानदार अंक
पुट्टाराज ने बताया कि उन्होंने मोरारजी रेजिडेंशियल सरकारी स्कूल, बेवूर से पढ़ाई की। छुट्टियों में घर लौटने पर वह परिवार की आर्थिक मदद के लिए भेड़ें चराते, खेतों में काम करते और पिता के साथ बोरवेल की मरम्मत में हाथ बंटाते थे। वे मवेशियों को चारा-पानी देते और खेतों में पानी लगाते और दादा-दादी की मदद करते थे। इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई कभी नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा, "मैंने डॉक्टर बनने का सपना कभी नहीं छोड़ा। खेत का काम और भेड़ें चराने के बाद भी, मैंने पढ़ाई के लिए समय निकाला।" उन्होंने गंगावती के श्री विद्यानिकेतन कॉलेज से SSLC में 96% और II PUC में 98% अंक हासिल किए थे।
पिछले साल नहीं मिला MBBS में दाखिला
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पुट्टाराज ने नीट यूजी 2025 में 390 अंक हासिल किए थे, लेकिन इतने अंकों पर उन्हें किफायती सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट नहीं मिल सकी। निजी मेडिकल कॉलेजों की मोटी फीस भरना परिवार के लिए संभव नहीं था। ऐसे में उन्होंने हार मानने के बजाय एक साल तक ऑनलाइन कोचिंग लेकर दोबारा तैयारी की। उन्होंने बताया कि खेतों में काम करने और भेड़ें चराने के बाद भी रोज पढ़ाई के लिए समय निकालते थे। इसी मेहनत का नतीजा रहा कि इस बार उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया।
पिता दिव्यांग, 8वीं तक पढ़े और मां कभी स्कूल नहीं गईं
उनके पिता महाबलेश्वर, जो शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं और केवल 8वीं कक्षा तक पढ़े हैं, मोटर रिवाइंडर और बोरवेल रिपेयर टेक्नीशियन के तौर पर काम करते हैं। उनकी मां सुवर्णा को कभी स्कूल जाने का मौका नहीं मिला। फिर भी, वे इस बात पर अडिग रहे कि उनका बेटा वह शिक्षा हासिल करे जो उन्हें कभी नहीं मिली।
सोलर लैंप की रोशनी में की पढ़ाई
उनके माता-पिता ने कहा, "हमें दिन में केवल सात घंटे बिजली मिलती है, इसलिए पुट्टाराज अक्सर रात में सोलर लैंप का इस्तेमाल करके पढ़ाई करते थे। वह हर दिन सुबह 6 बजे पढ़ाई के लिए उठते थे। जब इस साल NEET दोबारा आयोजित किया गया, तो हमने उन्हें CET के ज़रिए दूसरे प्रोफेशनल कोर्स के बारे में सोचने का सुझाव दिया। लेकिन उन्हें भरोसा था कि वह कम से कम 505 अंक हासिल करेंगे।"
20 लोगों का परिवार, एक छोटा सा घर
पुट्टाराज आर्थिक रूप से बेहद सामान्य परिवार से आते हैं। उनके दादा-दादी सहित 20 सदस्य सिर्फ 60×25 फीट के एक घर में रहते हैं। उनके दादा-दादी, हनुमप्पा और उदाचम्मा को याद है कि पुट्टाराज छह साल की उम्र से ही डॉक्टर बनने का सपना देखते थे। उन्होंने कहा, "भेड़ बकरियों को नहलाते या घर के काम करते समय वह डॉक्टर की तरह हमारा चेकअप करने का नाटक करते थे, जिससे सभी हंसने लगते थे। आज हमें गर्व है कि आखिरकार हमारे परिवार में एक डॉक्टर होगा।"
भाई ने परिवार का पेट पालने के लिए छोड़ी थी पढ़ाई
पुट्टाराज तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर हैं। उनके बड़े भाई चिरंजीवी ने परिवार की मदद करने और पिता का हाथ बंटाने के लिए स्कूल छोड़ दिया था, जबकि उनकी छोटी बहन पूर्णिमा गंगवती के कित्तूर रानी चेन्नम्मा सरकारी गर्ल्स स्कूल में 10वीं कक्षा में पढ़ रही हैं।
स्कूल प्रिंसिपल ने पुट्टाराज की प्रतिभा को बताया असाधारण
गंगवती के श्री विद्यानिकेतन पीयू कॉलेज के प्रिंसिपल और डायरेक्टर जगन्नाथ राव ने कहा, "पुट्टाराज एक बेहद प्रतिभाशाली विद्यार्थी है। उसका टैलेंट असाधारण हैं। उनके एकेडमिक परफॉर्मेंस को देखते हुए हमने उनकी कॉलेज की फीस माफ कर दी थी। वह नियमित रूप से क्लास में आता था और रोजाना 8-10 घंटे पढ़ाई करता था।"


