दिहाड़ी मजदूर के घर में MBBS ही MBBS, 4 बच्चे और एक भतीजी ने NEET क्रैक कर किया कमाल

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यह कहानी है ओडिशा के कंधमाल जिले के डारिंगबाड़ी ब्लॉक के एक दूरदराज गांव में जर्जर से घर में रहने वाले 73 साल के बुरसी प्रधान और उनकी 62 साल की पत्नी अनुसूया के बच्चों की। आज उनके घर में जश्न का माहौल है।

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एमबीबीएस सक्सेस स्टोरी

एमबीबीएस की पढ़ाई डॉक्टर बनने के लिए की जाती है। सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए आपको NEET यूजी का एग्जाम क्रैक करना होता है। भारत में डॉक्टरी की पढ़ाई काफी कठिन और महंगी मानी जाती है। आमतौर पर लोगों का मानना है कि नीट क्रैक करने के लिए महंगी फीस वाले संस्थानों में एडमिशन लेना पड़ता है। महंगी किताबों से पढ़ाई करनी पड़ती है, जो हर किसी के बस की बात नहीं होती है। इसके अलावा पढ़ाई के सभी जरूरी संसाधन भी उपलब्ध होने चाहिए, तभी नीट को क्रैक किया जा सकता है। लेकिन ओडिशा के दिहाड़ी मजदूरी करने वाले बुरसी प्रधान के पास अपने बच्चों के पढ़ाने के लिए ये सब संसाधन उपलब्ध नहीं थे, लेकिन इसके बावजूद उनके परिवार में आज 5 बच्चे एमबीबीएस की पढ़ाई सरकारी मेडिकल कॉलेज में कर रहे हैं। इसमें 4 उनके बेटे और एक भतीजी शामिल है।

बुरसी प्रधान के बच्चों की कहानी

यह कहानी है ओडिशा के कंधमाल जिले के डारिंगबाड़ी ब्लॉक के एक दूरदराज गांव में जर्जर से घर में रहने वाले 73 साल के बुरसी प्रधान और उनकी 62 साल की पत्नी अनुसूया के बच्चों की। आज उनके घर में जश्न का माहौल है। उनके परिवार के चार बच्चे और एक भतीजी अब सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। बुरसी प्रधान एक दिहाड़ी मजदूर हैं। अपनी मजदूरी से उन्होंने ने ना सिर्फ बच्चों का पेट पालने काम किया, बल्कि उनके पढ़ाई-लिखाई में कोई कमी नहीं आने दी।

बड़े बटे से हुई एमबीबीएस की शुरुआत

बुरसी प्रधान मजदूरी करने के लिए दूसरे शहर और राज्यों का भी सफर तय करना पड़ा था। उन्होंने केरल में भी मजदूर की। लेकिन स्वास्थ्य खराब होने के कारण उन्हें घर वापस आना पड़ा। बता दें कि बुरसी प्रधान के परिवार में डॉक्टर बनने की शुरुआत उनके बड़े बेटे बिभीषण प्रधान ने की। साल 2021 में उन्होंने नीट की परीक्षा क्रैक करने के बाद कोरापुट के श्री लक्ष्मण नायक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में एमबीबीएस में दाखिला लिया। इसके बाद उनकी बहन मोनलिसा को भी इसी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिला।

इस साल बेटे और भतीजी ने पास की NEET परीक्षा

इस साल बुरसी प्रधान के परिवार की खुशियां और भी बढ़ गईं। उनके बेटे असारिया प्रधान ने भवानीपटना के शहीद रिंडो माझी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में एमबीबीएस में दाखिला हासिल किया, जबकि उनकी बेटी सुनेमी प्रधान ने बलांगीर के भीम भोई मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में एमबीबीएस की सीट पक्की की। परिवार की सफलता यहीं नहीं रुकी। बुरसी के छोटे भाई की बेटी मीनाक्षी प्रधान ने भी इस साल NEET परीक्षा पास की। मीनाक्षी अपने चाचा बुरसी के परिवार के साथ ही रहती हैं और अब पुरी के श्री जगन्नाथ मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में एमबीबीएस की पढ़ाई करेंगी।

पढ़ाई को दी प्राथमिकताएं

सात बच्चों के पिता बुरसी प्रधान के लिए यह उपलब्धि सिर्फ परिवार में पांच मेडिकल सीटें हासिल होने की कहानी नहीं है। यह उन वर्षों की मेहनत, त्याग और संघर्ष का परिणाम है, जब आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी।

दूसरी पास हैं पिता बुरसी प्रधान

बता दें कि बच्चों के पिता बुरसी ने खुद सिर्फ कक्षा 2 तक पढ़ाई की है, लेकिन वह शिक्षा की अहमियत को अच्छी तरह समझते थे। इसलिए उन्होंने पूरी जिंदगी मेहनत की, ताकि उनके बच्चों की पढ़ाई में कोई बाधा न आए। वहीं, बुरसी परिवार के पास मौजूद थोड़ी सी जमीन पर धान, अदरक और हल्दी की खेती करते हैं। कई बार बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे जुटाने के लिए उन्हें दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी भी करनी पड़ती है।

सरकार से की आर्थिक मदद की मांग

वहीं, इस साल MBBS में दाखिला लेने वाली सुनेमी प्रधान कहती हैं कि हमने बचपन में ही समझ लिया था कि गरीबी क्या होती है। अपने माता-पिता की आर्थिक स्थिति को देखते हुए हम अपनी जरूरतों को सीमित रखने की कोशिश करते हैं। वहीं, बुरसी के भाई जिशिया प्रधान ने राज्य सरकार से परिवार की आर्थिक मदद करने की अपील की है, ताकि बच्चों की पढ़ाई का बोझ कुछ कम हो सके। उन्होंने कहा, "हमारे बच्चे डॉक्टर बनकर इलाके के लोगों की सेवा करेंगे। पूरे गांव को उन पर गर्व है।" गांव से आगे बढ़कर अपने सपनों को पूरा करने की तैयारी कर रहे ये बच्चे आज भी अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं। वे अपने पिता के साथ खेत में काम करने के अलावा परिवार के जानवरों की देखभाल में भी हाथ बंटाते हैं।

Dheeraj Pal

लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण: धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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