गूगल बाबा के भरोसे NEET की परीक्षा देना पहुंचा 'मुन्नाभाई', फ्लश टैंक में छिपाया मोबाइल
हैदराबाद में नीट री-एग्जाम के दौरान पुलिस ने 18 साल के छात्र को गिरफ्तार किया है। इस शातिर ने वाशरूम के फ्लश टैंक में मोबाइल छिपाकर चीटिंग की कोशिश की थी।
नीट यूजी 2026 की परीक्षा लीक के बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा पूरे देश भर में कराई गई। मगर हैदराबाद से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां नीट की दोबारा हो रही परीक्षा में एक 18 साल के उम्मीदवार ने नकल करने के लिए जो दिमाग लगाया, उसे सुनकर जांच कर रहे पुलिस वालों का भी सिर चकरा गया। उसने किसी हाई-टेक ब्लूटूथ गैजेट का इस्तेमाल करने के बजाय एक बेहद शातिर और फिल्मी तरीका अपनाया। इस छात्र ने स्कूल के वाशरूम में मौजूद फ्लश टैंक के अंदर अपना स्मार्टफोन छिपा दिया था। लेकिन कहते हैं ना कि चोरी कभी छिपती नहीं; उसकी एक छोटी सी गलती ने उसे मेडिकल कॉलेज के बजाय सीधा पुलिस हवालात में पहुंचा दिया। आइए जानते हैं कि आखिर ये पूरी कहानी क्या है और कैसे ये 'मुन्नाभाई' रंगे हाथों पकड़ा गया।
चेकिंग और सुरक्षा के बीच रची गई साजिश
रविवार के दिन हैदराबाद के आदिभटला पुलिस स्टेशन के इलाके में आने वाले रागनगुडा के एक सरकारी स्कूल में नीट की री-परीक्षा चल रही थी। पूरे देश में वैसे भी नीट और बाकी बड़े इम्तिहानों में धांधली को लेकर काफी बवाल मचा हुआ है, इसलिए प्रशासन भी पूरी तरह से मुस्तैद था। इसी बीच इस परीक्षा केंद्र पर अच्चमपेट का रहने वाला एक 18 साल का लड़का परीक्षा देने पहुंचा था। किसी को कानो-कान खबर नहीं थी कि इस सीधे-सादे दिखने वाले छात्र के दिमाग में कितनी बड़ी खुराफात चल रही है। वह सिर्फ अपनी किस्मत आजमाने नहीं, बल्कि गूगल बाबा के भरोसे डॉक्टर बनने का ख्वाब लेकर आया था।
सुबह 7 बजे से शुरू हुआ खुराफाती खेल
पुलिस की तफ्तीश में जो बातें सामने आई हैं, वो किसी क्राइम थ्रिलर फिल्म से कम नहीं हैं। इस लड़के ने चीटिंग की पूरी स्क्रिप्ट एग्जाम हॉल में घुसने से बहुत पहले ही लिख ली थी। पुलिस के मुताबिक, यह छात्र सुबह 7 बजे ही परीक्षा केंद्र पर पहुंच गया था, जबकि एग्जाम शुरू होने में अभी कई घंटे बाकी थे। उसकी पहली चाल यह थी कि उसने स्कूल की बाउंड्री वॉल के पास मौजूद वाशरूम के वेंटिलेटर में बाहर से अपना मोबाइल फोन रख दिया। वह जानता था कि मेन गेट से सीधे फोन लेकर अंदर जाना मुमकिन नहीं है। इसके बाद, जब सुबह 11 बजे के आसपास परीक्षा शुरू होने का वक्त नजदीक आया, तो उसने एक और चालाकी दिखाई। वह किसी तरह फिर से वाशरूम में घुसा, वेंटिलेटर से अपना फोन निकाला और उसे पानी से बचाने के लिए एक जिप-लॉक कवर (पॉलिथीन) में अच्छी तरह पैक कर दिया। इसके बाद उसने उस पैक किए हुए फोन को वाशरूम के कमोड वाले फ्लश टैंक के अंदर छिपा दिया।
दो बार हुई चेकिंग फिर भी बच निकला
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इस एग्जाम सेंटर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे। पुलिस का कहना है कि स्कूल परिसर की दो बार अच्छी तरह से चेकिंग की गई थी। पहली बार सुबह 6 बजे और दूसरी बार 11 बजे। जब छात्र परीक्षा देने के लिए अंदर जा रहे थे, तब भी उनकी बारीकी से तलाशी ली गई थी। लेकिन किस्मत देखिए कि फ्लश टैंक के अंदर पानी में डूबा हुआ वो जिप-लॉक कवर और उसके अंदर रखा मोबाइल किसी भी चेकिंग टीम की नजर में नहीं आ सका। वह लड़का बिना किसी डर के एग्जाम हॉल में अपनी सीट पर जाकर बैठ गया और सही मौके का इंतजार करने लगा।
किया पेट दर्द का बहाना
जब इम्तिहान चल रहा था, तब इस लड़के ने अपने प्लान के अगले हिस्से को अंजाम दिया। उसने वहां मौजूद इनविजिलेटर (निरीक्षक) से पेट दर्द का बहाना बनाया और वाशरूम जाने की इजाजत मांगी। चूंकि वह स्कूल का इकलौता कॉमन वाशरूम था और मेन बिल्डिंग से थोड़ा दूर था, इसलिए वहां किसी की सीधी नजर नहीं पड़ रही थी। लेकिन यहीं उससे एक बड़ी चूक हो गई। पेट दर्द के बहाने गया यह छात्र काफी देर तक वाशरूम से बाहर ही नहीं आया। इनविजिलेटर को शक हुआ कि आखिर एक बच्चा इतनी देर से अंदर क्या कर रहा है। जब काफी वक्त बीत गया, तो एग्जाम स्टाफ को उसे देखने के लिए भेजा गया। जैसे ही स्टाफ ने वाशरूम में जाकर देखा, उनके होश उड़ गए। वह लड़का फ्लश टैंक से निकाला हुआ फोन हाथ में लिए खड़ा था और मजे से अपने सवालों के जवाब ढूंढ रहा था।
गूगल क्रोम पर खोज रहा था जवाब
इस घटना के तुरंत बाद सेंटर पर मौजूद पुलिसकर्मियों को अलर्ट कर दिया गया। पुलिस ने फौरन मौके पर पहुंचकर उस डिवाइस को अपने कब्जे में ले लिया। जब फोन की शुरुआती जांच की गई, तो पता चला कि वह लड़का गूगल क्रोम खोलकर नीट के सवालों के जवाब सर्च कर रहा था। पुलिस को उसके फोन में इंस्टाग्राम के अलावा कोई और ऐसा ऐप नहीं मिला जो एक्टिव हो। पूछताछ के दौरान, आरोपी छात्र ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है।
स्कूल प्रशासन की शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और हाल ही में लागू हुए सख्त पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इस नए कानून के तहत ऐसे मामलों में काफी कड़ी सजा का प्रावधान है। फिलहाल आरोपी पुलिस की हिरासत में है और मामले की गहराई से जांच चल रही है।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


