बिहार में बढ़ेंगी DNB की सीटें, 17 नई सीटों की मान्यता, MD या MS के बराबर होती है वेल्यू
बिहार में डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड (डीएनबी) कोर्स की पढ़ाई के लिए 17 नई सीटों की मान्यता मिली है। कैंसर, पेडियाट्रिक्स, स्त्री रोग, एनाटॉमी और जनरल मेडिसिन से संबंधित मरीजों को इन डॉक्टरों की सेवा का लाभ मिलेगा।

बिहार में डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड (डीएनबी) कोर्स की पढ़ाई के लिए 17 नई सीटों की मान्यता मिली है। यह डिग्री केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन ‘नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज’ (एनबीईएमएस) द्वारा प्रदान की जाने वाली एक स्नातकोत्तर चिकित्सा डिग्री है। यह डिग्री चिकित्सा में एमडी या एमएस के पूर्णतया समकक्ष है। इससे बिहार को हर साल 17 नए डॉक्टर मिलेंगे। इससे इन कोर्स को संचालित करने वाले जिला अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चिकित्सकीय सुविधा बढ़ेगी और मरीजों को लाभ होगा। खासकर, कैंसर, पेडियाट्रिक्स, स्त्री रोग, एनाटॉमी और जनरल मेडिसिन से संबंधित मरीजों को इन डॉक्टरों की सेवा का लाभ मिलेगा।
जानकारी के अनुसार, जहां एमडी/एमएस की पढ़ाई मेडिकल कॉलेजों में होती है और इसमें सैद्धांतिक ज्ञान अधिक होता है, वहीं डीएनबी अस्पतालों में व्यावहारिक ज्ञान और मरीजों के इलाज पर केंद्रित होता है। कैमूर जिला अस्पताल में पेडियाट्रिक्स की दो सीटें, लखीसराय जिला अस्पताल में स्त्री एवं प्रसव रोग की चार, कटिहार जिला अस्पताल में स्त्री एवं प्रसव रोग की दो, बीआईएमआईएस, पावापुरी में पीएसएम की तीन, राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, पूर्णिया में एनाटॉमी की दो, मुजफ्फरपुर जिला अस्पताल में जनरल मेडिसिन की दो, होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र में रेडिएशन अंकोलॉजी की दो सुपर स्पेशियलिटी सीटों पर पढ़ाई की मंजूरी मिली है।
इस प्रकार बिहार के कुल 35 जिला अस्पतालों में से 26 में डीएनबी कोर्स की पढ़ाई होगी। वर्ष 2020 के पहले किसी भी जिला अस्पताल में डीएनबी कोर्स की पढ़ाई नहीं होती थी। पहली बार 2021 में मोतिहारी जिला अस्पताल में डीएनबी की कोर्स एक सीट से शुरू हुई थी।
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Pankaj Vijayपंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार
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15 से अधिक सालों का अनुभव
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