
NEET PG Admission 2025: NEET PG टॉपर्स के लिए NIRF रैंकिंग बेअसर, क्लिनिकल एक्सपोजर बना पहली पसंद
NEET PG Admission 2025: NEET PG 2025 में देश के टॉप रैंक लाने वाले छात्र नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) में उच्च स्थान प्राप्त करने वाले प्राइवेट कॉलेजों के बजाय सरकारी इंस्टीट्यूट को प्रिफरेंस दे रहे हैं।
NEET PG Admission 2025: देश के प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) में एडमिशन के लिए आयोजित NEET PG 2025 की काउंसलिंग के पहले राउंड के नतीजों ने स्टूडेंट्सकी पहली प्रिफरेंस को बता दिया है। सामने आए आंकड़ों के अनुसार, देश के टॉप रैंक लाने वाले छात्र नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) में उच्च स्थान प्राप्त करने वाले प्राइवेट कॉलेजों के बजाय सरकारी इंस्टीट्यूट को प्रिफरेंस दे रहे हैं।
NIRF रैंकिंग में कुछ प्राइवेट कॉलेज भले ही टॉप पर दिखते हों, लेकिन टॉप रैंकर्स जैसे AIR 1, 3, 5, 6 और 7 ने पोस्टग्रेजुएशन के लिए PGIMER चंडीगढ़, दिल्ली के वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (VMMC) और एम्स से जुड़े अस्पतालों जैसे केंद्रीय संस्थानों को चुना है। यहां तक कि टॉप 12 में से किसी भी उम्मीदवार ने NIRF में उच्च रैंक वाले प्राइवेट संस्थानों का चुनाव नहीं किया है।
टॉपर्स की प्रिफरेंस
सवाल उठता है कि छात्र NIRF रैंकिंग को क्यों नजरअंदाज कर रहे हैं? एक्सपर्ट बताते हैं कि PG के उम्मीदवारों के लिए कॉलेज चुनने में तीन कारक सबसे ज्यादा मायने रखते हैं।
क्लिनिकल एक्सपोजर और केस वॉल्यूम: सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भारी संख्या होती है। इसका मतलब है कि छात्रों को हाथों-हाथ काम करने और विभिन्न बीमारियों के अधिक मामले देखने को मिलते हैं, जो उनकी ट्रेनिंग और आत्मविश्वास को मजबूत करता है।
कम फीस और सामर्थ्य: प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में PG सीट की फीस 50 लाख रुपये से 2 करोड़ रुपये तक हो सकती है, जबकि सरकारी कॉलेजों में यह लागत बहुत कम होती है (अक्सर पूरे कोर्स के लिए 2 लाख रुपये से कम)।
प्रतिष्ठा और विरासत: PGIMER, JIPMER, एम्स और MMC (मद्रास मेडिकल कॉलेज) जैसे पुराने सरकारी संस्थानों की एक मजबूत अकैडमिक विरासत और दशकों का अनुभव है, जिस पर छात्र सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं।
एक सरकारी मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टर का कहना है, "NIRF भले ही किसी कॉलेज को टॉप रैंक दे, लेकिन हर PG उम्मीदवार जानता है कि असली पढ़ाई शानदार ऑडिटोरियम या स्मार्ट क्लासरूम में नहीं, बल्कि ज्यादा मरीजों वाले अस्पतालों में होती है।"
NIRF रैंकिंग में क्या कमी है?
एक्सपर्ट का कहना है कि NIRF रैंकिंग के सिस्टम में कुछ बड़ी कमियां हैं, जो छात्रों की वास्तविक जरूरतों को नहीं माप पाती हैं।
मरीज़ों की संख्या : PG मेडिकल ट्रेनिंग का सबसे महत्वपूर्ण कारक मरीजों की संख्या या क्लिनिकल वॉल्यूम—NIRF के मापदंडों में शामिल ही नहीं है।
रिसर्च पर ज्यादा जोर: NIRF उन चीजों पर ज्यादा ध्यान देता है, जैसे रिसर्च पेपर और पेटेंट, जिन पर PG छात्र कम ध्यान देते हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान: नए प्राइवेट कॉलेजों के चमकते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर को रैंकिंग में फायदा मिलता है, भले ही वहां मरीजों की संख्या कम हो।
छात्रों का स्पष्ट मानना है कि वास्तविक दुनिया में सफलता के लिए सीनियर डॉक्टर्स के अनुभव और अस्पताल की प्रतिष्ठा NIRF स्कोर से कहीं अधिक मायने रखती है। यह ट्रेंड साबित करता है कि भारत में बेस्ट मेडिकल ट्रेनिंग आज भी सरकारी संस्थानों में ही दी जाती है।





