Hindi Newsकरियर न्यूज़NEET PG 2025 Negative Cut-off Controversy: Supreme Court Issues Notice to Centre and NMC, Hearing on Feb 6
NEET PG 2025 Cut-off: नीट पीजी 2025 नेगेटिव कट-ऑफ विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और NMC को भेजा नोटिस

NEET PG 2025 Cut-off: नीट पीजी 2025 नेगेटिव कट-ऑफ विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और NMC को भेजा नोटिस

संक्षेप:

NEET PG 2025 Negative Cut-offs: सुप्रीम कोर्ट ने 4 फरवरी 2026 को उस जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) को नोटिस जारी किया। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 फरवरी 2026 की तारीख तय की है।

Feb 04, 2026 05:40 pm ISTPrachi लाइव हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

NEET PG 2025 Negative Cut-offs: चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में योग्यता और मानकों को लेकर छिड़ी बहस के बीच, उच्चतम न्यायालय ने एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (4 फरवरी 2026) को उस जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) को नोटिस जारी किया, जिसमें NEET PG 2025 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ को घटाकर 'शून्य' और 'नेगेटिव' करने के फैसले को चुनौती दी गई है।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर तत्काल सुनवाई करने का निर्णय लिया है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 फरवरी 2026 की तारीख तय की है।

क्या है पूरा विवाद?

विवाद की शुरुआत 13 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (NBEMS) द्वारा जारी एक नोटिस से हुई। इस में खाली पड़ी पीजी सीटों को भरने के लिए कट-ऑफ में भारी कटौती की गई थी:

आरक्षित वर्ग (SC/ST/OBC): कट-ऑफ को 40 पर्सेंटाइल से घटाकर 0 पर्सेंटाइल कर दिया गया। इसका मतलब है कि -40 (नेगेटिव) अंक पाने वाले अभ्यर्थी भी अब विशेषज्ञ डॉक्टर बनने की दौड़ में शामिल हो सकते हैं।

सामान्य वर्ग (General/EWS): कट-ऑफ को 50 पर्सेंटाइल (लगभग 276 अंक) से घटाकर मात्र 7 पर्सेंटाइल (लगभग 103 अंक) कर दिया गया।

सामान्य दिव्यांग (PwBD): इसे 45 से घटाकर 5 पर्सेंटाइल किया गया।

याचिकाकर्ताओं की दलील: 'मरीजों की सुरक्षा खतरे में'

सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन और न्यूरोसर्जन डॉ. सौरव कुमार सहित अन्य डॉक्टरों द्वारा दायर इस याचिका में सरकार के इस कदम को 'मनमाना' और 'असंवैधानिक' बताया गया है।

योग्यता का हनन: याचिका में कहा गया है कि पीजी मेडिकल शिक्षा को केवल सीटें भरने के लिए 'व्यावसायिक अभ्यास' नहीं बनाया जा सकता। नेगेटिव अंक वाले डॉक्टरों को विशेषज्ञ बनाना चिकित्सा पेशे की गरिमा के खिलाफ है।

मरीजों की सुरक्षा: कमजोर शैक्षणिक आधार वाले डॉक्टरों को पीजी सीटों पर एडमिशन देने से भविष्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य और मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर संकट आ सकता है।

नियमों में बदलाव: याचिका में 'खेल के बीच में नियम बदलने' का सिद्धांत लागू करते हुए कहा गया कि परीक्षा और काउंसलिंग शुरू होने के बाद योग्यता मानकों को इस तरह नहीं गिराया जा सकता।

सरकार और मेडिकल निकायों का रुख

दूसरी ओर, स्वास्थ्य मंत्रालय और कुछ मेडिकल एसोसिएशनों का तर्क है कि यदि ये सीटें खाली रह जाती हैं, तो अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टरों की भारी कमी हो जाएगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगी। उनका कहना है कि यह निर्णय 'सीटों के बेहतर उपयोग' के लिए लिया गया है।

कोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहले ही इसी तरह की एक याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह एक नीतिगत मामला है, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप ने इस मामले को नया मोड़ दे दिया है। 6 फरवरी को होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि क्या काउंसलिंग की प्रक्रिया जारी रहेगी या कोर्ट पुराने मानकों को बहाल करने का आदेश देगा।

Prachi

लेखक के बारे में

Prachi
प्राची लाइव हिन्दुस्तान में ट्रेनी कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। यहां वे करियर से जुड़ी खबरें लिखती हैं। प्राची दिल्ली की रहने वाली हैं और उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से इंग्लिश जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया है। उन्होंने अपना करियर नन्ही खबर से शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने सी.वाई. फ्यूचर लिमिटेड और कुटुंब में कंटेंट लेखक के रूप में काम किया। वे 2024 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी। प्राची को उपन्यास पढ़ना और फिल्में देखना बहुत पसंद है। और पढ़ें
लेटेस्ट एजुकेशन न्यूज़ अपडेट हिंदी में हिंदुस्तान पर, Hindi News, क्रिकेट न्यूज पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।