NEET विवाद में को लेकर देश में उबाल, NTA भंग करने की मांग तेज; पेपर रद्द होने के सदमे में छात्र ने दी जान
नीट पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के विवाद के बीच लखीमपुर में एक छात्र ने जान दे दी। वहीं देशभर में छात्र संगठनों का प्रदर्शन तेज हो गया है और एनटीए को भंग करने की मांग उठ रही है।

नीट पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के लखीमपुर से दिल तोड़ देने वाली खबर सामने आई है। यहां नीट की तैयारी कर रहे 20 वर्षीय छात्र ऋतिक मिश्रा ने कथित तौर पर फंदा लगाकर जान दे दी। परिवार का कहना है कि परीक्षा रद्द होने की खबर के बाद से वह बेहद तनाव में था और लगातार परेशान चल रहा था। गुरुवार सुबह जब परिवार वालों ने कमरे का दरवाजा नहीं खुलते देखा तो उन्हें शक हुआ। दरवाजा अंदर से बंद था। काफी आवाज लगाने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला तो परिजनों ने दरवाजा तोड़ा। अंदर ऋतिक का शव फंदे से लटका मिला। घटना के बाद पूरे इलाके में मातम फैल गया।
दो बार असफल होने के बाद तीसरी कोशिश में थी उम्मीद
ऋतिक मिश्रा ईसानगर थाना क्षेत्र के हसनपुर कटौली गांव का रहने वाला था। उसके पिता अनूप कुमार मिश्रा भट्ठा व्यवसाय से जुड़े हैं। परिवार के मुताबिक ऋतिक पिछले कई सालों से डॉक्टर बनने का सपना देख रहा था। उसने दो बार नीट परीक्षा दी थी, लेकिन चयन नहीं हो पाया था।
इस बार उसे पूरा भरोसा था कि उसका पेपर अच्छा गया है और उसका सपना पूरा हो जाएगा। लेकिन जैसे ही परीक्षा रद्द होने और धांधली की खबरें सामने आईं, वह अंदर से टूट गया। पिता के मुताबिक बुधवार को वह गांव से लखीमपुर जाने की बात कहकर निकला था। बाद में उसका शव घर में मिला।
देशभर में फूटा छात्रों का गुस्सा
नीट पेपर लीक मामले को लेकर अब देशभर में छात्रों का गुस्सा खुलकर सामने आ रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर गुरुवार को कई छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए को भंग करने की मांग उठाई। छात्रों ने केंद्र सरकार और परीक्षा एजेंसियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कई प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की। प्रदर्शन में शामिल छात्रों का कहना था कि लगातार हो रही परीक्षा गड़बड़ियों ने मेहनती छात्रों का भरोसा तोड़ दिया है।
'व्हाट्सऐप और टेलीग्राम पर बिक रहा भविष्य'
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है और छात्रों का भविष्य खुलेआम व्हाट्सऐप और टेलीग्राम समूहों पर बेचा जा रहा है। उनका कहना था कि लाखों छात्र दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं। वहीं अहमदाबाद में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को काले झंडे दिखाकर विरोध जताया।
एनटीए मुख्यालय के बाहर भी प्रदर्शन
आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन एसोसिएशन ऑफ स्टूडेंट्स फॉर अल्टरनेटिव पोलिटिक्स यानी एसैप ने भी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया। एनटीए मुख्यालय के बाहर जुटे कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और कहा कि परीक्षा प्रणाली पूरी तरह अविश्वास के संकट में फंस चुकी है। छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक छात्रों का भरोसा वापस नहीं आएगा।
सीबीआई जांच में एनटीए के अंदरूनी लोगों पर शक
इस मामले की जांच कर रही सीबीआई अब एनटीए के कुछ अंदरूनी अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी खंगाल रही है। जांच एजेंसियों को शक है कि पेपर छपाई से जुड़े कुछ लोगों की मिलीभगत हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक उन लोगों की जांच की जा रही है जिनकी उस प्रिंटिंग प्रेस तक पहुंच थी जहां नीट यूजी के प्रश्नपत्र छापे गए थे। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर पेपर बाहर कैसे पहुंचा और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
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