साइकिल से ट्यूशन पढ़ाने वाला कैसे बना 100 करोड़ का कोचिंग किंग? NEET पेपर लीक में CBI ने किया गिरफ्तार
NEET पेपर लीक जांच में RCC Classes के संस्थापक शिवराज मोटेगांवकर उर्फ ‘एम सर’ का नाम सामने आया है। सीबीआई ने मोटेगांवर को गिरफ्तार भी कर लिया है।

महाराष्ट्र में NEET और JEE की तैयारी करने वाले लाखों छात्रों के लिए 'एम सर' कोई नया नाम नहीं है। लातूर के शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर ने जिस RCC Classes को कभी किराए के छोटे कमरे से शुरू किया था, वही आज राज्य के सबसे बड़े कोचिंग ब्रांड्स में गिना जाता है। लेकिन अब यही नाम NEET पेपर लीक मामले में CBI की जांच के बीच सुर्खियों में है। पिछले कई दिनों से केंद्रीय जांच एजेंसी शिवराज मोटेगांवकर से पूछताछ कर रही थी। अब सीबीआई ने शिवराज मोटेगांवकर को गिरफ्तार कर लिया है। एजेंसी का आरोप है कि वह उस पूरे नेटवर्क का हिस्सा था जो परीक्षा से पहले ही सवाल और जवाब चुनिंदा छात्रों तक पहुंचा रहा था। सीबीआई की कार्रवाई के बाद इस मामले ने फिर से पूरे देश में हलचल मचा दी है, क्योंकि लाखों छात्र हर साल इस परीक्षा की तैयारी में सालों लगा देते हैं।
खेती करने वाले परिवार से निकला ‘एम सर’
लातूर के स्थानीय लोगों और पुराने छात्रों के मुताबिक, शिवराज मोटेगांवकर एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। उनका शुरुआती जीवन संघर्षों से भरा रहा। बताया जाता है कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत निजी ट्यूशन पढ़ाकर की थी। उस दौर में वे साइकिल से शहर के अलग-अलग इलाकों में जाकर छात्रों को विज्ञान पढ़ाते थे। 1990 के दशक के आखिर में उन्होंने किराए के छोटे कमरे में करीब 10 छात्रों के साथ कोचिंग शुरू की। उस समय खुद मोटेगांवकर ही केमिस्ट्री पढ़ाते थे, हाथ से नोट्स तैयार करते थे और छोटे बैच में बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाते थे।
‘लातूर पैटर्न’ के साथ बढ़ता गया RCC का नाम
धीरे-धीरे महाराष्ट्र में लातूर पैटर्न की चर्चा शुरू हुई। यह ऐसा शिक्षा मॉडल माना गया जिसने बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार टॉपर दिए। इसी दौर में RCC Classes का विस्तार भी तेजी से हुआ। NEET, JEE और CET की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच RCC के टेस्ट मॉड्यूल, केमिस्ट्री नोट्स और पढ़ाने के तरीके काफी लोकप्रिय हो गए। खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों से आने वाले छात्रों के बीच 'एम सर' की अलग पहचान बन गई। पुराने छात्र बताते हैं कि मोटेगांवकर कठिन केमिस्ट्री को बेहद आसान भाषा में समझाने के लिए जाने जाते थे। शुरुआती दौर में RCC की फीस भी दूसरी बड़ी कोचिंग संस्थाओं की तुलना में कम मानी जाती थी।
छोटे कमरे से 100 करोड़ के कोचिंग नेटवर्क तक का सफर
स्थानीय कोचिंग इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के मुताबिक, RCC अब सिर्फ लातूर तक सीमित नहीं है। इसके सेंटर पुणे, नासिक, छत्रपति संभाजीनगर, नांदेड़, सोलापुर और कोल्हापुर समेत कई शहरों में चल रहे हैं। अनुमान है कि हर साल करीब 40 हजार छात्र RCC के अलग-अलग सेंटरों में दाखिला लेते हैं। फीस और नेटवर्क के आधार पर स्थानीय सूत्र संस्थान का सालाना कारोबार 100 करोड़ रुपये से ज्यादा बताते हैं। समय के साथ RCC ने सिर्फ क्लासरूम कोचिंग तक खुद को सीमित नहीं रखा। संस्थान ने ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल टेस्ट सीरीज, मोबाइल ऐप आधारित स्टडी मटेरियल और मेंटरशिप प्रोग्राम भी शुरू किए। संस्थान की प्रोफाइल में शिवराज मोटेगांवकर को केमिस्ट्री में एमएससी गोल्ड मेडलिस्ट और विजनरी एजुकेटर बताया गया है।
NEET पेपर लीक में कैसे जुड़ा नाम?
अब इसी बड़े कोचिंग नेटवर्क का नाम NEET पेपर लीक जांच में सामने आने से शिक्षा जगत में हलचल बढ़ गई है। जांच एजेंसियां मोटेगांवकर के कथित संबंधों की पड़ताल रिटायर्ड केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी से कर रही हैं। कुलकर्णी को इस मामले में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोप है कि कुलकर्णी को परीक्षा के सवाल तैयार करने की प्रक्रिया तक पहुंच थी और उन्होंने कथित तौर पर कुछ छात्रों को ऐसे विशेष सत्र दिए, जिनमें परीक्षा से पहले सवाल बताए गए। जांच एजेंसियां अब यह भी देख रही हैं कि RCC Classes और कुलकर्णी के बीच पेशेवर संबंध किस तरह के थे। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कुलकर्णी पहले RCC से जुड़े रहे थे। फिलहाल जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि क्या कोचिंग नेटवर्क, शिक्षकों और परीक्षा से जुड़े लोगों के बीच कोई ऐसा संपर्क था जिसने कथित पेपर लीक को आसान बनाया।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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