
NEET , JEE Main : 11वीं में ही नीट, जेईई मेन व CUET कराने की तैयारी, 12वीं के अंक भी जुड़ेंगे, ये सुधार संभव
NEET , JEE Main : केंद्र सरकार की ओर से बनाई गई समिति कई सुझावों पर मंथन कर रही है जिसमें 11वीं कक्षा में ही जेईई मेन, नीट और सीयूईटी यूजी जैसी प्रवेश परीक्षाएं कराना, कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई 2-3 घंटे तक सीमित करना जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
JEE Main , NEET , CUET : कोचिंग संस्थानों पर निर्भरता कम करने और डमी स्कूलों की समस्या से निजात पाने के लिए केंद्र सरकार जेईई मेन, नीट और सीयूईटी प्रवेश परीक्षाओं के तौर तरीकों में बड़े बदलाव कर सकती है। केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय की ओर से बनाई गई समिति कई सुझावों पर मंथन कर रही है जिसमें 11वीं कक्षा में ही जेईई मेन, नीट और सीयूईटी यूजी जैसी प्रवेश परीक्षाएं कराना, कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई 2-3 घंटे तक सीमित करना और बोर्ड परीक्षा के अंकों को प्रवेश परीक्षा के नतीजों के साथ जोड़ने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। गौरतलब है कि जून माह में शिक्षा मंत्रालय ने कोचिंग सेंटरों पर बढ़ती निर्भरता और डमी स्कूलों की समस्या के मद्देनजर 11 सदस्यों की एक समिति गठित की थी। 15 नवंबर को हुई समिति की बैठक में इन्हीं सुझावों पर चर्चा की गई। समिति ने उन कारणों पर मंथन किया जो स्टूडेंट्स को स्कूल के बाद बहुत ज्यादा कोचिंग लेने पर मजबूर करते हैं।
क्या 11वीं क्लास में ही हो सकती है जेईई , नीट परीक्षाएं
समिति जिन प्रस्तावों पर गहन विचार विमर्श कर रही है, उनमें सबसे बड़ा सुझाव यह है कि क्या कक्षा 11वीं में ही इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन, मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट और यूनिवर्सिटी प्रवेश परीक्षा सीयूईटी हो सकती है या नहीं। कमेटी सुझावों को फाइनल करने से पहले देश के सभी शिक्षा बोर्ड में सिलेबस की एकरूपता पर भी अध्ययन करेगी। समिति के कई सदस्यों का तर्क है कि प्रवेश परीक्षाओं का समय पहले रखने से विद्यार्थियों पर एकेडमिक दबाव कम हो सकता है। साथ ही कक्षा 12वीं में बनने वाली तनाव और अत्यधिक दबाव की स्थिति भी कम होगी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पैनल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एईपी 2020) के हिसाब से साल में दो बार अप्रैल और नवंबर में एंट्रेंस एग्जाम कराने पर भी चर्चा की।
कोचिंग में पढ़ाई रोजाना 2-3 घंटे तक ही हो
समिति में एक और जरूरी सुझाव पर चर्चा हो रही है जिसमें कहा गया है कि कोचिंग क्लास रोजाना ज्यादा से ज्यादा दो से तीन घंटे तक ही होनी चाहिए। वर्तमान में स्टूडेंट्स स्कूल के बाद प्राइवेट कोचिंग सेंटर्स में 4 से 6 घंटे तक क्लास करते हैं। सदस्यों ने कहा कि इस तरह की सीमा तय करने से एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी, स्कूली शिक्षा और हेल्थ के बीच संतुलन कायम होगा। ऐसा करना एकेडमिक बैलेंस ठीक होगा। थकान कम होगी। स्कूल-बेस्ड लर्निंग की अहमियत के मद्देनजर यह जरूरी है।
एंट्रेंस एग्जाम में जुड़े बोर्ड परीक्षा के मार्क्स
कमिटी यह भी देख रही है कि क्या एंट्रेंस एग्जाम के लिए एक ऐसा हाइब्रिड असेसमेंट मॉडल लाया जा सकता है जिसमें बोर्ड परीक्षा के मार्क्स और एप्टीट्यूड बेस्ड टेस्ट दोनों को वेटेज दिया जाए। यानी इंजीनियरिंग मेडिकल दाखिलों में प्रवेश परीक्षा प्राप्तांकों के साथ-साथ बोर्ड परीक्षा का प्रदर्शन भी देखा जाए। अधिकारियों ने कहा कि इससे क्लासरूम लर्निंग मजबूत हो सकती है। इंटरनल असेसमेंट बेहतर हो सकते हैं और कोचिंग पर बहुत ज्यादा निर्भरता कम हो सकती है।
इन पर भी चर्चा
विचार-विमर्श में व्यवस्था की कई कमियों को भी शामिल किया गया, जैसे विभिन्न शिक्षा बोर्डों के सिलेबस में अंतर, डमी स्कूलों का बढ़ता चलन, कमजोर असेसमेंट, टीचर की काबिलियत में अंतर और स्कूलों में करियर काउंसलिंग की कमी।
15 नवंबर की बैठक में मौजूद सदस्यों के अनुसार एनसीईआरटी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि वह सीबीएसई और राज्य बोर्डों के साथ समन्वय कर कक्षा 11 और 12 के सिलेबस को प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप करे ताकि असमानताओं को कम किया जा सके। इससे स्कूल सिलेबस एंट्रेंस एग्जाम के सिलेबस के मुताबिक बनेंगे।
जून माह में बनी थी समिति
आपको बता दें कि इस वर्ष जून माह में शिक्षा मंत्रालय ने कोचिंग सेंटरों पर बढ़ती निर्भरता को कम करने के लिए 11 सदस्यों की एक समिति गठित की थी। यह समिति डमी स्कूलों की समस्या, स्कूलों की कमियों और कोचिंग सेंटरों के भ्रामक विज्ञापनों की भी समीक्षा कर रही है। उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी इस समिति के अध्यक्ष हैं। समिति में सीबीएसई (CBSE) के अध्यक्ष, आईआईटी मद्रास, आईआईटी कानपुर, एनआईटी त्रिची और एनसीआरटी के प्रतिनिधि शामिल हैं। इसके अलावा, केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और निजी स्कूल के तीन प्रिंसिपल भी समिति का हिस्सा हैं। समिति वर्तमान स्कूली शिक्षा प्रणाली में खामियों की पहचान कर सरकार को अपनी सिफारिशें देंगी।





