NEET : MBBS के लिए 5 बार लिया ड्रॉप, BVSc में नहीं लगा मन, फिर छठे प्रयास में बिहार के लड़के ने सबको चौंकाया
NEET UG Success Story : बिहार के पटना के रहने वाले सौरव सिंह ने एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं बल्कि छह अटेम्प्ट दिए। पांच बार असफल रहने के बाद उसने छठे प्रयास में शानदार अंक लाकर एमबीबीएस सीट हासिल कर लिया।

एमबीबीएस कर डॉक्टर बनने का ख्वाब लिए हर साल करीब 21-22 लाख विद्यार्थी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी देते हैं। लेकिन देश में सिर्फ 1.35 लाख एमबीबीएस सीटें होने के चलते ज्यादातर के सपने चकनाचूर हो जाते हैं। बहुत से तो दो या तीन बार ड्रॉप ईयर लेकर नीट देते हैं लेकिन फिर भी उनका एमबीबीएस सीट पाने का सपना साकार नहीं हो पाता। और वे आखिरकार हिम्मत हार जाते हैं और कोई दूसरा आसान रास्ता चुन लेते हैं। लेकिन यहां हम आपको ऐसे छात्र की कहानी बताने जा रहे हैं जो इस चुनौतिपूर्ण राह पर बार बार गिरा लेकिन फिर उठ खड़ा हुआ और आखिरकार उसने अपनी मंजिल पा ली। बिहार के पटना के रहने वाले सौरव सिंह ने एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं बल्कि छह अटेम्प्ट दिए। पांच बार असफल रहने के बाद उसने छठे प्रयास में शानदार अंक लाकर एमबीबीएस सीट हासिल कर लिया। आपका बता दें कि नीट यूजी प्रवेश परीक्षा में बैठने की न तो कोई अधिकतम आयु सीमा है और न ही प्रयासों की सीमा।
सौरव की जिद और कामयाबी की यह कहानी उन लाखों युवाओं के लिए मिसाल है, जो मुश्किलों से घबराकर अपने घुटने टेक देते हैं। कहानी बताती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदारी से की जाए और असफलताओं के बाद भी हिम्मत न हारी जाए, तो देर से ही सही लेकिन सफलता जरूर मिलती है। यहां पढ़ें उनकी संघर्ष यात्रा-
पहली बार वाले नीट में सिर्फ 295 मार्क्स मिले
सौरव ने नीट का पहला अटेम्प्ट 2019 में दिया। तब उनकी तैयारी नीट के स्तर की बिल्कुल नहीं थी। वे कोचिंग क्लासेस जाने के बजाय अक्सर बंक मार देते थे और दोस्तों के साथ स्कूटी पर घूमकर मस्ती करते थे। उन्हें नीट में सिर्फ 295 मार्क्स मिले।। फिजिक्स में उनकी स्थिति सबसे खराब थी, जहां उन्हें सिर्फ 13 नंबर मिले थे। खुद के साथ-साथ उनके दोस्तों का भी सिलेक्शन नहीं हुआ था, जिससे उनके दिमाग में एक रिलैक्स सा माहौल आ गया कि चलो किसी का नहीं हुआ।
यह कोविड लॉकडाउन का दौर था और क्लासेस ऑनलाइन मोड पर आ गई थीं। सौरव ने घर के माहौल में पढ़ाई करने के बजाय समय बर्बाद किया और दिनभर सोशल मीडिया पर "NEET Postpone" कराने की बहसों और कैंपेन में लगे रहे। इस परीक्षा में उनके 480 मार्क्स आए। जब उनके साथ के दूसरे दोस्तों का अच्छे मेडिकल कॉलेजों में सिलेक्शन हो गया, तो यह सौरव के लिए पहला बड़ा सेटबैक था। इससे उन्हें अपनी क्षमता का एहसास हुआ कि वे भी कॉलेज जा सकते हैं।
तीसरा प्रयास नीट 2021 - इसमें भी वे एमबीबीएस लायक अंक हासिल नहीं कर पाए।
चौथे प्रयास में 565 मार्क्स पर अटके, मजबूरन बीवीएससी चुना
2022 में उन्होंने हार से कुछ सीखे बिना फिर से तैयारी शुरू की और अपना पूरा ध्यान फिजिक्स व केमिस्ट्री को मजबूत करने पर लगाया। जोशटॉक्स में अपनी कहानी शेयर करते हुए सौरव ने बताया कि उन्होंने ऑनलाइन कोचिंग लेकर फिजिक्स के बेसिक्स सुधारे शॉर्ट टिप्स व ट्रिक्स सीखे। इससे उनके फिजिक्स के नंबर 120-130 तक पहुंच गए। केमिस्ट्री के लिए वे पूरी तरह NCERT पर टिके रहे। पर वे टेस्ट देने से बहुत डरते थे, इसलिए टेस्ट देने जाते ही नहीं थे और न ही टेस्ट का विश्लेषण करते थे। मॉक टेस्ट न देने के कारण परीक्षा के दिन वे घबरा गए और कई सिली मिस्टेक्स कीं। उनके 565 मार्क्स (रैंक 39,972) आए, जिस पर कोई एमबीबीएस सीट नहीं मिल सकती थी। घर वालों के दबाव के चलते अपनी इच्छा के विरुद्ध बिहार वेटनरी कॉलेज में (BVSc AH कोर्स) एडमिशन ले लिया।
पांचवें प्रयास में नीट में नंबर बढ़े पर रैंक खराब
वेटनरी कॉलेज में मन नहीं लगने के कारण उन्होंने वहां से 2-3 महीने की छुट्टी ली और दोबारा तैयारी में जुट गए। इस बार उन्होंने कोई टेस्ट नहीं छोड़ा और गलतियों व तुक्के वाले सवालों को लिखने के लिए एक 'रिकॉल डायरी' बनाई। उन्होंने रिकॉल डायरी तो बहुत अच्छी बनाई, लेकिन परीक्षा से पहले उसका बार-बार रिवीजन नहीं कर पाए। परीक्षा में उनके 598 मार्क्स (रैंक 29,999) आए। बेहतर नंबर होने के बावजूद रैंक खराब होने की वजह से उन्हें कोई एमबीबीएस सीट नहीं मिली। वे फिर से असफल रहे और बहुत रोए।
BvSC में धाकड़ प्रदर्शन फिर भी MBBS का ही जुनून, घर वालों से छिपाकर दिया छठा नीट
वेटनरी के फर्स्ट ईयर में सौरव के 10 में से 7.7 (OGPA) मार्क्स आए जो कि काफी अच्छे मार्क्स माने जाते हैं। पर वेटनरी के सेकंड ईयर में जब उन्हें फार्म पर जानवरों के बीच काम करना पड़ा, तो उनका जमीर हिल गया। उनकी एक दोस्त ने उन्हें प्रेरित किया और घर वालों के मना करने के बावजूद उन्होंने बिना बताए गुप्त रूप से तैयारी शुरू की। वे दोनों सुबह 5:30 बजे लाइब्रेरी चले जाते और दिनभर पढ़ाई करते थे। उन्होंने अपनी पिछली सभी गलतियों को पूरी तरह सुधार लिया और नियमित टेस्ट दिए।
नीट परीक्षा के दिन हुई घटना ने कर दिया था नर्वस
परीक्षा के दिन सौरव रोल नंबर की जगह एप्लीकेशन नंबर देखकर गलत सीट (साइंस ब्लॉक) पर जाकर बैठ गए। परीक्षा शुरू होने से सिर्फ 35 मिनट पहले उन्हें पता चला कि उनकी सीट आर्ट्स ब्लॉक में है। वे घबराए हुए आर्ट्स ब्लॉक भागे और अपनी दोस्त के शब्द "सनशाइन, यू हैव टू शाइन" को याद करके खुद को शांत किया। परीक्षा बहुत अच्छी रही और उन्होंने आखिरकार 720 में से 680 अंक लाकर नीट यूजी क्रैक कर लिया। ये अंक एमबीबीएस सीट पाने के लिए काफी थे। जब उन्होंने अपने परिवार को परिणाम बताया, तो सभी खुशी के आंसू रो पड़े।
लेखक के बारे में
Pankaj Vijayपंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार
शॉर्ट बायो पंकज विजय एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में livehindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे करियर, स्कूल व हायर एजुकेशन, जॉब्स से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। 9 वर्षों से यहां इसी भूमिका में हैं। सरकारी भर्तियों, बोर्ड व एंट्रेंस एग्जाम, प्रतियोगी परीक्षाओं, उनके परिणाम, बदलते दौर में करियर की नई राहों, कोर्स, एडमिशन एवं नए जमाने के रोजगार के लिए जरूरी स्किल्स से जुड़ी अपडेट तेजी से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।
15 से अधिक सालों का अनुभव
पंकज विजय ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। अमर उजाला समाचार पत्र में रिसर्च, संपादकीय और करियर एजुकेशन जॉब्स डेस्क पर काम किया। यहां उन्हें फीचर लेखन व रिपोर्टिंग का भी मौका मिला। इसके बाद उन्होंने आज तक डिजिटल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आज तक वेबसाइट पर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और एजुकेशन व रोजगार जगत से जुड़ी खबरें लिखीं। इसके बाद एनडीटीवी ऑनलाइन में एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर इस विषय में अपनी समझ को और व्यापक बनाया। एनडीटीवी की पारी के बाद वे लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े और बीते 9 वर्षों से करियर एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर रहे हैं।
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भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा, गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में एमए व दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में बीए ऑनर्स किया है। एनसीसी सी सर्टिफिकेट होल्डर हैं जिसके चलते उन्हें रक्षा क्षेत्र जैसे पुलिस व सेनाओं की भर्तियों की बेहतर समझ है।
विजन
तमाम तरह के करियर, स्कूल एजुकेशन, हायर एजुकेशन, भर्तियों, प्रतियोगी परीक्षाओं, एंट्रेंस एग्जाम, नौकरी के लिए जरूरी स्किल्स एवं बेरोजगार युवाओं के मुद्दों को लेकर पंकज के पास गहरी समझ है। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के कई टॉपरों के इंटरव्यू किए हैं। उनकी लिखी सक्सेस स्टोरीज युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को प्रेरित करती रही हैं। पंकज का मानना है कि विश्वसनीयता, पारदर्शिता और तथ्यपरकता ही पत्रकारिता की असली ताकत है। उनका लक्ष्य स्कूली छात्रों व बेहतर करियर एवं सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को आसान भाषा में सटीक, तेज और भरोसेमंद जानकारी देना है।
विशेषज्ञता
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स्कूलिंग के बाद करियर की राहें
यूपीएससी, जेईई मेन व नीट जैसी बड़ी परीक्षाओं के टॉपरों के इंटरव्यू
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