NEET: कड़ी सुरक्षा चक्र होने के बाद भी कैसे लीक हुआ NEET का पेपर, NTA की अंदरूनी चूक ने डुबोई 23 लाख छात्रों की मेहनत?
NEET 2026 Paper Leak: अभेद्य और 'लीक-प्रूफ' सुरक्षा होने के बावजूद नीट 2026 पेपर कैसे लीक हुआ? परीक्षा रद्द होने के बाद देश के 23 लाख से अधिक छात्रों और उनके परिवारों में भारी आक्रोश और निराशा है।

NEET UG 2026 Leak: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट यूजी 2026' (NEET-UG 2026) के पेपर लीक होने और परीक्षा रद्द होने के बाद देश के 23 लाख से अधिक छात्रों और उनके परिवारों में भारी आक्रोश और निराशा है। वर्ष 2024 में हुए पेपर लीक विवाद के बाद, सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने दावा किया था कि उन्होंने एक ऐसा अभेद्य और 'लीक-प्रूफ' सुरक्षा ढांचा तैयार किया है जिसे भेदना नामुमकिन होगा। लेकिन इसके बावजूद 2026 में यह परीक्षा फिर से धांधली का शिकार हो गई। इस बार पेपर परीक्षा केंद्रों या परिवहन के दौरान नहीं, बल्कि उस सबसे सुरक्षित फेज में लीक हुआ, जिसे अत्यधिक सुरक्षित और गोपनीय माना जाता था।
2024 बनाम 2026: दो लीक और दो अलग तरह की विफलताएं
इस पूरे मामले को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि इस बार की चूक पिछली बार से कितनी अलग है। वर्ष 2024 में नीट का पेपर तब लीक हुआ था जब वह एनटीए के सिस्टम से बाहर निकल चुका था — यानी प्रिंटिंग प्रेस, परिवहन, बैंकों के स्ट्रॉन्ग रूम या परीक्षा केंद्रों तक ले जाने के दौरान।
उस विवाद के बाद इसरो (ISRO) के पूर्व प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में बनी एक उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों पर एक बेहद कड़ा सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार किया गया था, जिसे आंतरिक रूप से 'कॉन्फिडेंशियल ऑपरेशंस' (CONOPs) कहा जाता है। वर्ष 2025 की परीक्षा में इसे सख्ती से लागू किया गया, लेकिन 2026 में यह अभेद्य सुरक्षा चक्र पूरी तरह से चरमरा गया।
जांच अधिकारियों के अनुसार, CONOPs के दो चरण होते हैं। पहला चरण दिसंबर से फरवरी के बीच 'पेपर-सेटिंग' (प्रश्नपत्र तैयार करने) का होता है और दूसरा चरण अप्रैल में उसके 'परिवहन' का होता है। 2024 में दूसरा चरण प्रभावित हुआ था, जबकि 2026 में इसके पहले चरण (पेपर-सेटिंग) में ही सेंध लगा दी गई।
लपटों में अभेद्य किला: कैसे टूटी सुरक्षा की कड़ियां?
नई दिल्ली में एनटीए का वह परिसर जहां पेपर सेट किया जाता है, उसे पूरी तरह से ‘हर्मेटिकली सील’ और डिजिटल रूप से दुनिया से अलग रखा जाता है। वहां न तो मोबाइल, न लैपटॉप और न ही इंटरनेट की अनुमति होती है। प्रत्येक डॉक्यूमेंट का लॉग ट्रैक रखा जाता है और रफ नोट्स को तुरंत नष्ट करना अनिवार्य होता है। अधिकारियों के अनुसार, 2026 में दो बड़ी गड़बड़ियां हुईं।
प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन न होना: परीक्षा की तैयारी के सबसे संवेदनशील दौर में 'कॉन्फिडेंशियल ऑपरेशंस' (CONOPs) के नियमों को धरातल पर लगातार और कड़ाई से लागू नहीं किया गया।
नेतृत्व का न होना: जिस अधिकारी ने इस पूरे सुरक्षा ढांचे को तैयार किया था और जो इसकी देखरेख कर रहे थे, वे सबसे संवेदनशील समय पर सिस्टम का हिस्सा नहीं थे। इस नेतृत्व शून्यता के कारण सुरक्षा में ढील आ गई।
जांच से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि इस बेहद सुरक्षित घेरे के भीतर मौजूद कुछ ‘भरोसेमंद अंदरूनी लोग’ ही जांच के घेरे में हैं। अगर प्रोटोकॉल सही ढंग से काम कर रहा होता, तो किसी के लिए भी पेपर के पूरे सेक्शन को हासिल करना और सोशल मीडिया पर सर्कुलेट करना नामुमकिन होता।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: जवाबदेही तय होना जरूरी
इस बार व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म पर परीक्षा से पहले ही 'गेस पेपर' के रूप में असली सवाल तैर रहे थे। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी एनटीए को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बोंच ने कहा कि यह बार-बार होने वाली विफलता बेहद दर्दनाक है। जब तक एनटीए के भीतर व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं की जाएगी, तब तक ऐसी संरचनात्मक विफलताएं नहीं रुकेंगी। कोर्ट ने एनटीए से भविष्य के लिए एक स्थाई रिफॉर्म रोडमैप और कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मॉडल पर विचार करने को कहा है। फिलहाल, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) इस पूरे नेटवर्क और एग्जाम माफिया की जांच कर रही है और प्रभावित छात्रों के लिए 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की गई है।
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