बदला मोहनजोदड़ो की डांसिंग गर्ल का लुक, NCERT की 9वीं क्लास की किताब में छपी तस्वीर पर बवाल

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
Follow us on Google News
share

NCERT की 9वीं क्लास की आर्ट्स बुक में हड़प्पा काल की डांसिंग गर्ल की मूर्ति को शेडिंग के जरिए कपड़े पहनाने जैसा दिखाने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

ncert dancing girl controversy class 9 textbook arts

हड़प्पा सभ्यता की वो मशहूर 'डांसिंग गर्ल' जिसके बारे में पढ़कर और जिसकी तस्वीरें देखकर कई पीढ़ियां बड़ी हुई हैं, अचानक एक नए विवाद का केंद्र बन गई है। हजारों साल पुरानी इस ऐतिहासिक मूर्ति के साथ कुछ ऐसा हुआ है, जिसने शिक्षा जगत से लेकर सियासी गलियारों तक में तेज हलचल पैदा कर दी है। दरअसल मामला NCERT की 9वीं क्लास की आर्ट्स की नई किताब 'मधुरिमा' से जुड़ा है। इस किताब में मूर्ति की एक ऐसी तस्वीर छापी गई है, जिसमें उसे कंधों के नीचे काले रंग से शेड करके दिखाया गया है। पहली नजर में देखने पर ऐसा लगता है जैसे इस ऐतिहासिक मूर्ति को कपड़े पहना दिए गए हों या उसके शारीरिक बनावट को जानबूझकर छिपाने की कोशिश की गई हो। बस इसी शेडिंग ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। तर्क देने वालों का कहना है कि क्या भारत की सबसे मशहूर पुरातात्विक खोजों में से एक के असली स्वरूप के साथ छेड़छाड़ करना सही है?

क्या है पूरा विवाद?

गौरतलब है कि मोहनजोदड़ो से खुदाई में मिली यह कांसे की मूर्ति सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे खास और पहचानी जाने वाली ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। दुनिया भर में इसका असली डिजाइन अपने साधारण और बेबाक अंदाज के लिए जाना जाता है। किताब के पहले चैप्टर 'हिस्ट्री ऑफ आर्ट' में इसका जिक्र विस्तार से किया गया है। टेक्स्ट में बकायदा मूर्ति की तारीफ की गई है कि कैसे इसे वेस्ट बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ में मशहूर 'लॉस्ट-वैक्स' तकनीक से बनाया गया था। इसमें बताया गया है कि मूर्ति का एक घुटना मुड़ा है, एक हाथ कमर पर रखा है और ठुड्डी थोड़ी ऊपर की तरफ उठी हुई है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जब पढ़ने वाले की नजर उसके साथ छपी तस्वीर पर जाती है, तो कहानी कुछ और ही नजर आती है। आलोचकों का कहना है कि मूर्ति के शरीर पर जो शेड दिया गया है, वो इसके असली रूप से बिल्कुल अलग है और इतिहास को एक अलग नजरिए से परोसने की कोशिश है।

NCERT की ही दो किताबों में अलग-अलग तस्वीरें

इस मामले में सबसे दिलचस्प मोड़ यह है कि NCERT की ही कुछ दूसरी किताबों में इस मूर्ति की तस्वीर बिल्कुल अपने असली रूप में छपी है। मिसाल के तौर पर, छठी क्लास की सोशल साइंस की किताब के छठे चैप्टर 'भारतीय सभ्यता की शुरुआत' में डांसिंग गर्ल की जो फोटो लगाई गई है, उसमें किसी भी तरह की कोई शेडिंग या छेड़छाड़ नहीं है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर 9वीं की आर्ट्स की किताब में ही इसे क्यों बदल दिया गया? एक ही संस्था की दो अलग-अलग किताबों में एक ही ऐतिहासिक धरोहर की अलग-अलग तस्वीरें क्यों छापी गई हैं?

शुरू हुई सियासी बयानबाजी

जैसे ही यह मामला सोशल मीडिया और खबरों में उछला इस पर सियासत भी गरमा गई। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. शमा मोहम्मद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस तस्वीर को लेकर तीखी आलोचना की। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि मोहनजोदड़ो की इस मशहूर मूर्ति का धड़ 9वीं क्लास की किताब में ढका हुआ दिखाया जा रहा है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ देश में नीट पेपर लीक और सीबीएसई की व्यवस्थाओं से जुड़ी कमियों जैसे बड़े और गंभीर मुद्दे सामने मुंह बाए खड़े हैं, और दूसरी तरफ सरकार का पूरा ध्यान किताबों में इस तरह के अनावश्यक बदलाव करने पर लगा हुआ है। अपनी पोस्ट में उन्होंने सीधे तौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी निशाना साधा।

NCERT का रुख

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जब बवाल काफी बढ़ गया तो NCERT के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। सूत्रों के मुताबिक, मामले को संबंधित विभाग के पास भेज दिया गया है और अंदरूनी स्तर पर इसकी जांच की जा रही है। लेकिन इस पूरे विवाद में सबसे अहम और चौंकाने वाला बयान शिक्षाविद् और लेखक मिशेल डैनिनो का आया है। डैनिनो उस टेक्स्टबुक डेवलपमेंट कमेटी के हेड थे, जिसने छठी क्लास की नई सोशल साइंस की किताब तैयार की थी। उन्होंने बताया कि छठी क्लास की किताब में मूर्ति की असली तस्वीर ही रखी गई है, लेकिन इसके लिए भी काफी माथापच्ची और बहस हुई थी।

डैनिनो ने खुलासा करते हुए कहा, “मुझसे कहा गया था कि इस तस्वीर को चैप्टर के पहले पेज पर न रखूं, जहां मैंने इसे शुरुआत में रखा था। काफी लंबी चर्चा और दबाव के बाद, मुझे इस डांसिंग गर्ल को चैप्टर के अंदर के पन्नों पर शिफ्ट करना पड़ा। हालांकि वहां फोटो बिना किसी बदलाव के मौजूद है।”

जब उनसे पूछा गया कि ऐसा क्यों हुआ, तो उनका मानना था कि शायद इस मूर्ति को उम्र के हिसाब से सही नहीं माना जा रहा था। उनका सीधा इशारा इस बात की तरफ था कि शायद नग्नता को लेकर कुछ लोगों को आपत्तियां थीं। हालांकि, डैनिनो ने यह बात बिल्कुल साफ कर दी कि 9वीं क्लास की आर्ट्स की किताब से उनका कोई लेना-देना नहीं था और न ही उन्हें उस किताब में की गई शेडिंग वाले फैसले की कोई जानकारी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या NCERT आने वाले समय में इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक सफाई पेश करता है?

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

और पढ़ें
Hindi News के साथ करियर सेक्शन में पढ़ें लेटेस्ट एजुकेशन न्यूज़, सरकारी जॉब , एग्जाम , एडमिशन से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण खबरें। हर अपडेट सबसे पहले पाने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।
Hindi Newsकरियर न्यूज़बदला मोहनजोदड़ो की डांसिंग गर्ल का लुक, NCERT में छपी तस्वीर पर बवाल