NCERT की नई बुक पर विवाद, 'कृष्णा' नाम पर संगठन ने जताई आपत्ति; मांसाहार का भी जिक्र नहीं

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एनसीईआरटी की एक और नई किताब पर विवाद खड़ा हो गया है। यह विवाद एनसीईआरटी की कक्षा 6 की कन्नड़ किताब को लेकर हो रहा है। किताब का नाम 'कृष्ण' रखा गया है, जिसको लेकर एक शिक्षा अधिकार संगठन ने सवाल उठाए हैं।

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एनसीईआरटी की एक और नई किताब पर विवाद खड़ा हो गया है। यह विवाद एनसीईआरटी की कक्षा 6 की कन्नड़ किताब को लेकर हो रहा है। दरअसल, किताब का नाम 'कृष्ण' रखा गया है, जिसको लेकर एक शिक्षा अधिकार संगठन ने सवाल उठाए हैं।संगठन का कहना है कि कक्षा 6 की नई कन्नड़ पाठ्यपुस्तक के जरिये पाठ्यक्रम का 'भगवाकरण' करने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा संगठन ने खाने को लेकर भी सवाल उठाए हैं। चलिए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है।

‘पीपुल्स अलायंस फॉर फंडामेंटल राइट्स टू एजुकेशन’ (PAFRE) नाम की एक संगठन ने एनसीईआरटी की कन्नड़ की नई किताब‘कृष्णा’ को लेकर कहा कि इसमें धार्मिक विषयों को ज्यादा महत्व दिया गया है, जबकि कर्नाटक की अपनी असली पहचान और खानपान की विविधता को पीछे छोड़ दिया गया है। संगठन के कहना है कि एनसीईआरटी एनईपी 2020 के तहत स्कूली पढ़ाई में पौराणिक कथाओं और धार्मिक विषयों को बढ़ावा दे रहा है।

भगवाकरण का आरोप

वहीं, संगठन के मुख्य संयोजक निरंजनराध्य वी पी ने एनसीईआरटी पर भगवाकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि पाठ्यक्रम को भगवामय बनाने की कोशिश हैष उन्होंने यह भी पूछा कि किताब का नाम 'कृष्ण' क्यों रखा गया। संगठन ने कहा कि कर्नाटक की पहचान आदिकवि पंप, कुवेम्पु, कोटा शिवराम कारंत और बसवन्ना जैसे महान कवियों और समाज सुधारकों से जुड़ी है, लेकिन किताब में इनका जिक्र नहीं है।

मांसाहारी भोजन का जिक्र नहीं

संगठन ने खाने-पीने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। उनका आरोप है कि किताब के एक चैप्टर में सिर्फ शाकाहारी खाने को संतुलित आहार बताया गया है। थाली में रागी मुद्दे, रोटी, चावल, सब्जी, दूध और फल दिखाए गए हैं, लेकिन अंडा, मछली और मांस को पूरी तरह बाहर रखा गया है। संगठन ने पूछा कि क्या कर्नाटक की पहचान सिर्फ रागी मुद्दे और बस्सारू तक सीमित है, जबकि लाखों लोग पोर्क करी, फिश करी और कीमा बॉल्स खाते हैं।

क्या है संगठन की मांग

संगठन का आरोप है कि पुस्तक में तटीय कर्नाटक, उत्तर कर्नाटक, मलनाड और पुराने मैसूरु क्षेत्र की लोककथाओं, साहित्यिक परंपराओं और जीवनशैली को पर्याप्त और संतुलित तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया है। PAFRE ने मांग की है कि CBSE इस शैक्षणिक सत्र के लिए पुस्तक को वापस ले। इसके अलावा, संगठन ने संतुलित आहार से जुड़े अध्याय में अंडा, मछली और मांस जैसे खाद्य पदार्थों को भी शामिल करने की मांग उठाई है।

कर्नाटक के गृह मंत्री का आया जवाब

विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने कहा कि राज्य सरकार कभी भी पाठ्यक्रम में पौराणिक कथाओं और पुराणों से जुड़े विषयों को शामिल करने के खिलाफ नहीं रही है। हालांकि, उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सोच को नजरअंदाज करके ऐसा नहीं किया जाना चाहिए। खड़गे ने कहा, "हमने हमेशा पौराणिक और वैज्ञानिक दोनों पहलुओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है।" उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें फिलहाल किताब की कंटेंट की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी एनसीईआरटी की इस पुस्तक को लेकर उठाई गई आपत्तियों की जांच करेंगे।

Dheeraj Pal

लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण: धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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