भगवान नहीं, नदी पर है पुस्तक का नाम, 'कृष्णा' विवाद पर NCERT की सफाई
दरअसल, एनसीईआरटी ने कक्षा 6 की एक किताब का नाम 'कृष्ण' रखा गया है, जिसको लेकर एक शिक्षा अधिकार संगठन ने सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि कक्षा 6 की नई कन्नड़ पाठ्यपुस्तक के जरिये पाठ्यक्रम का 'भगवाकरण' करने की कोशिश की जा रही है।

कक्षा 6 की कन्नड़ किताब पर उठ रहे सवालों पर एनसीईआरटी की सफाई आ गई है। एनसीईआरटी ने एक प्रेस रिलीज के जरिए कहा कि NCERT ने अपनी भाषा की पुस्तकों के नाम भारत की नदियों के नाम पर रखे हैं। 'कृष्णा' नाम कृष्णा नदी से लिया गया है। हिंदी की किताब का नाम "गंगा", अंग्रेजी की किताब का नाम "कावेरी" और उर्दू की किताब का नाम "जमुना (यमुना)" रखा गया है। इसी तरह कर्नाटक की प्रमुख नदियों में से एक कृष्णा नदी के नाम पर कन्नड़ की किताब का नाम "कृष्णा" रखा गया है। इसके अलावा उन्होंने चैप्टर में मांसाहार के आहार पर उठ रहे सवाल का जवाब दिया है।
शाकाहारी और मांसाहरी पर क्या कहा
एनसीईआरटी ने बताया कि इस पुस्तक के चैप्टर 6 में संतुलित आहार के बारे में जानकारी दी गई है। पेज 63 पर भी 'Balanced Diet' शीर्षक के तहत इसे समझाया गया है। वहां दिए गए चित्र में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के खाद्य पदार्थ शामिल हैं। NCERT ने स्पष्ट किया है कि पुस्तक में कहीं भी शाकाहारी आहार का समर्थन या प्रचार नहीं किया गया है और न ही मांसाहार का विरोध किया गया है।
दरअसल, एनसीईआरटी ने कक्षा 6 की एक किताब का नाम 'कृष्ण' रखा गया है, जिसको लेकर एक शिक्षा अधिकार संगठन ने सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि कक्षा 6 की नई कन्नड़ पाठ्यपुस्तक के जरिये पाठ्यक्रम का 'भगवाकरण' करने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा संगठन ने खाने को लेकर भी सवाल उठाए थे। इसके बाद एनसीईआरटी ने एक प्रेस रिलीज के जरिए सफाई दी है।
क्या है पूरा मामला
पीपुल्स अलायंस फॉर फंडामेंटल राइट्स टू एजुकेशन' (PAFRE) नाम की एक संगठन ने एनसीईआरटी की कन्नड़ की नई किताब'कृष्णा' को लेकर कहा कि इसमें धार्मिक विषयों को ज्यादा महत्व दिया गया है, जबकि कर्नाटक की अपनी असली पहचान और खानपान की विविधता को पीछे छोड़ दिया गया है। संगठन के कहना है कि एनसीईआरटी एनईपी 2020 के तहत स्कूली पढ़ाई में पौराणिक कथाओं और धार्मिक विषयों को बढ़ावा दे रहा है।
NCERT पर भगवाकरण का आरोप
वहीं, संगठन के मुख्य संयोजक निरंजनराध्य वी पी ने एनसीईआरटी पर भगवाकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि पाठ्यक्रम को भगवामय बनाने की कोशिश हैष उन्होंने यह भी पूछा कि किताब का नाम 'कृष्ण' क्यों रखा गया। संगठन ने कहा कि कर्नाटक की पहचान आदिकवि पंप, कुवेम्पु, कोटा शिवराम कारंत और बसवन्ना जैसे महान कवियों और समाज सुधारकों से जुड़ी है, लेकिन किताब में इनका जिक्र नहीं है।
मांसाहारी भोजन का जिक्र नहीं
संगठन ने खाने-पीने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। उनका आरोप है कि किताब के एक चैप्टर में सिर्फ शाकाहारी खाने को संतुलित आहार बताया गया है। थाली में रागी मुद्दे, रोटी, चावल, सब्जी, दूध और फल दिखाए गए हैं, लेकिन अंडा, मछली और मांस को पूरी तरह बाहर रखा गया है। संगठन ने पूछा कि क्या कर्नाटक की पहचान सिर्फ रागी मुद्दे और बस्सारू तक सीमित है, जबकि लाखों लोग पोर्क करी, फिश करी और कीमा बॉल्स खाते हैं।
क्या है संगठन की मांग
संगठन का आरोप है कि पुस्तक में तटीय कर्नाटक, उत्तर कर्नाटक, मलनाड और पुराने मैसूरु क्षेत्र की लोककथाओं, साहित्यिक परंपराओं और जीवनशैली को पर्याप्त और संतुलित तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया है। PAFRE ने मांग थी कि CBSE इस शैक्षणिक सत्र के लिए पुस्तक को वापस ले। इसके अलावा, संगठन ने संतुलित आहार से जुड़े अध्याय में अंडा, मछली और मांस जैसे खाद्य पदार्थों को भी शामिल करने की मांग उठाई है।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण:
धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
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