आंखों में नहीं थी रोशनी, लेकिन विजन था क्लीयर; रवि राज ने UPSC में हासिल की 20वीं रैंक, अब बनेंगे IAS

Mar 06, 2026 07:16 pm ISTHimanshu Tiwari हिन्दुस्तान, नवादा
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नवादा के महुली गांव के रहने वाले दृष्टिबाधित रवि राज ने अपनी तमाम शारीरिक चुनौतियों को मात देते हुए यूपीएससी परीक्षा में 20वीं रैंक हासिल कर एक अद्भुत और प्रेरणादायक मिसाल कायम की है।

आंखों में नहीं थी रोशनी, लेकिन विजन था क्लीयर; रवि राज ने UPSC में हासिल की 20वीं रैंक, अब बनेंगे IAS

कहा जाता है कि अगर आपके इरादे लोहे जैसे मजबूत हों और दिल में कुछ कर गुजरने की सच्ची आग हो, तो रास्ते की कोई भी रुकावट आपका रास्ता नहीं रोक सकती। हमारी जिंदगी में अक्सर छोटी-छोटी परेशानियां आती हैं और हम हार मानकर बैठ जाते हैं। लेकिन जरा सोचिए उस शख्स के बारे में जिसकी आंखों में दुनिया देखने की रोशनी तो नहीं थी, लेकिन उसके 'विजन' (दृष्टिकोण) में इतनी चमक थी कि उसने देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता का परचम लहरा दिया। हम बात कर रहे हैं बिहार के नवादा जिले के रहने वाले दृष्टिबाधित (Visually Impaired) रवि राज की।

रवि राज ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में ऑल इंडिया 20वीं रैंक हासिल कर एक ऐसा इतिहास रच दिया है, जो न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश के युवाओं और खासकर दिव्यांगों के लिए एक बहुत बड़ी मिसाल बन गया है। उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर हौसलों में जान हो, तो इंसान अपनी तकदीर खुद लिख सकता है।

मां-बाप ने दिया पूरा साथ

रवि राज की इस शानदार कामयाबी के पीछे उनके परिवार का एक बहुत बड़ा संघर्ष और त्याग छिपा है। वह मूल रूप से नवादा जिले के अकबरपुर प्रखंड के एक छोटे से गांव महुली के रहने वाले हैं। एक आम किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले रवि के पिता रंजन कुमार सिन्हा खेती-किसानी करते हैं, जबकि उनकी मां विभा सिन्हा एक कुशल गृहिणी हैं।

भले ही रवि के पिता एक साधारण किसान हैं, लेकिन उन्होंने अपने बेटे के सपनों के बीच कभी पैसों या गांव की दूरियों को आड़े नहीं आने दिया। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और बेहतर भविष्य के लिए यह परिवार फिलहाल नवादा शहर के नवीन नगर मोहल्ले में एक किराए के मकान में रहता है। दृष्टिबाधित होने के बावजूद रवि ने जब आईएएस (IAS) बनने का एक बड़ा सपना देखा, तो उनके माता-पिता ने उन्हें कमजोर महसूस कराने के बजाय उनके कंधों को और मजबूत किया। परिवार के इसी अटूट विश्वास और सपोर्ट ने रवि को हर मुश्किल से लड़ने की ताकत दी।

पांचवें प्रयास में मिली सबसे बड़ी कामयाबी

यूपीएससी का सफर कभी भी आसान नहीं होता। अच्छे-अच्छे मेधावी छात्र भी इस परीक्षा की गहराई नापते-नापते थक जाते हैं। रवि के लिए भी यह सफर आसान नहीं था। यह उनका यूपीएससी में पांचवां प्रयास था। जरा सोचिए, लगातार चार बार खुद को तैयार करना, परीक्षा देना, अपनी शारीरिक चुनौतियों का सामना करना और फिर से नई ऊर्जा के साथ उठ खड़े होना, यह अपने आप में एक बहुत बड़ी तपस्या है।

अपनी इसी जिद और मेहनत के दम पर उन्होंने सामान्य वर्ग (General Category) में 20वीं रैंक हासिल कर अपनी जगह पक्की की है। ऐसा नहीं है कि रवि को सफलता पहली बार मिली है। इससे ठीक पहले 2024 की यूपीएससी परीक्षा में भी उन्होंने अपना परचम लहराया था और 182वीं रैंक हासिल की थी।

पहले से ही हैं अफसर

रवि राज की मेधा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे सफलता की सीढ़ियां लगातार चढ़ते रहे हैं। अपनी पिछली यूपीएससी सफलता (182वीं रैंक) के आधार पर उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के लिए हुआ था। फिलहाल वह 9 दिसंबर से महाराष्ट्र के नागपुर में आईआरएस अधिकारी के तौर पर अपनी ट्रेनिंग ले रहे हैं। इसके अलावा, यूपीएससी की तैयारी के दौरान ही उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 69वीं परीक्षा भी पास की थी, जिसमें उनका चयन राजस्व अधिकारी (Revenue Officer) के पद पर हुआ था। लेकिन रवि को तो आसमान छूना था, उनका असली लक्ष्य आईएएस बनना था। नागपुर में ट्रेनिंग के दौरान भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और आखिरकार अपनी मंजिल को पा ही लिया।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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