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MMHAPU: स्थापना के 33 साल बाद भी मौलाना मजहरुल हक विश्वविद्यालय में यूजी की पढ़ाई का इंतजार

MMHAPU: स्थापना के 33 साल बाद भी मौलाना मजहरुल हक विश्वविद्यालय में यूजी की पढ़ाई का इंतजार

संक्षेप:

MMHAPU: मौलाना मजहरुल हक विश्वविद्यालय की स्थापना को 33 वर्ष हो चुके हैं। विश्वविद्यालय में पीजी और पीएचडी की पढ़ाई तो शुरू हो गई लेकिन इतने वर्षों बाद भी स्नातक स्तर की पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है।

Dec 21, 2025 10:46 am ISTPrachi लाइव हिन्दुस्तान, पटना, मुख्य संवाददाता
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MMHAPU: मौलाना मजहरुल हक विश्वविद्यालय की स्थापना को 33 वर्ष हो चुके हैं। स्थापना से लेकर अब तक यह विश्वविद्यालय छह बार अपना कैंपस बदल चुका है। वर्ष 1992 में स्थापित हुए विश्वविद्यालय का शैक्षणिक सत्र 16 वर्षों बाद साल 2008 में प्रारंभ हुआ। विश्वविद्यालय में पीजी और पीएचडी की पढ़ाई तो शुरू हो गई लेकिन इतने वर्षों बाद भी स्नातक स्तर की पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है।

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अब भी विश्वविद्यालय स्नातक पाठ्यक्रमों के शुभारंभ की प्रतीक्षा कर रहा है। यह एक ऐसा विश्वविद्यालय है जिसके अंतर्गत एक डिग्री कॉलेज भी संचालित होता है। राज्यभर में केवल फातिमा डिग्री कॉलेज, फुलवारीशरीफ को ही इस विवि से मान्यता प्राप्त है, जहां स्नातक स्तर की पढ़ाई होती है।

बता दें कि यह विश्वविद्यालय बिहार का एकमात्र ऐसा विश्वविद्यालय है जो अरबी-फारसी के नाम से जाना जाता है। इस विश्वविद्यालय से राज्य के 135 मदरसे संबद्ध हैं। इन मदरसों में आलिम (बीए) और फाजिल (एमए) की पढ़ाई होती है, लेकिन इन पर विश्वविद्यालय का प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं है। नामांकन और पाठ्यक्रम की पूरी जिम्मेदारी मदरसों की ही होती है। विश्वविद्यालय केवल परीक्षा आयोजित करता है और परिणाम घोषित करता है। विश्वविद्यालय के फैकल्टी सदस्य डॉ. निखिल आनंद गिरि ने बताया कि यदि विश्वविद्यालय को आलिम और फाजिल पाठ्यक्रमों की पूरी जिम्मेदारी सौंप दी जाए तो इनका संचालन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

इस विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में मात्र 50 छात्र ही नामांकित थे, लेकिन वर्तमान में विश्वविद्यालय में लगभग 40 हजार छात्र नामांकित हैं। यह एक ऐसा विश्वविद्यालय है जहां स्नातकोत्तर (पीजी) और उसी विषय में पीएचडी स्तर की पढ़ाई होती है। पूरे बिहार के छात्रों को विश्वविद्यालय से जोड़ने और उन्हें बेहतर शैक्षणिक संसाधनों तक पहुंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्यभर में 200 केआरसी (नॉलेज रिसोर्स सेंटर) स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा यह विश्वविद्यालय राज्य में अल्पसंख्यक कोचिंग के लिए नोडल एजेंसी के रूप में भी कार्य करता है।

5.04 एकड़ में है विश्वविद्यालय परिसर : वर्ष 2015 में इस विश्वविद्यालय को मीठापुर फार्म एरिया में 5.04 एकड़ भूमि आवंटित की गई। इसके भवन के निर्माण में चार वर्ष लगे। 25 फरवरी 2019 को विश्वविद्यालय के नए परिसर का उद्घाटन किया गया। इस परिसर में शैक्षणिक, प्रशासनिक और परीक्षा भवन के साथ दो अल्पसंख्यक छात्रावास भी शामिल हैं।

प्रो.अनवारूल हक अंसारी, कुलसचिव ने कहा कि विवि को अपना परिसर मिलने के बाद शैक्षणिक स्तर में सुधार हुआ है। कई पाठ्यक्रम शुरू हुआ हैं, कई और जल्द शुरू होंगे। अब छात्र नामांकन भी ले रहे हैं। स्नातक स्तर की पढ़ाई की जिम्मेवारी मिलने पर विवि और बेहतर करेगा। अभी स्नातक स्तर का केवल परीक्षा लेने की ही जिम्मेवारी विवि को है।

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लेखक के बारे में

Prachi

दिल्ली की रहने वाली प्राची लाइव हिन्दुस्तान में ट्रेनी कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। पिछले 1.5 वर्षों से वे करियर और शिक्षा क्षेत्र की बारीकियों को कवर कर रही हैं। प्राची ने प्रतिष्ठित भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से इंग्लिश जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिस्ट्री ऑनर्स में ग्रेजुएशन किया है। लाइव हिन्दुस्तान से 2024 में जुड़ने से पहले, उन्होंने 'नन्ही खबर', 'सी.वाई. फ्यूचर लिमिटेड' और 'कुटुंब' जैसे संस्थानों में कंटेंट लेखक के रूप में अपनी लेखनी को निखारा है। इतिहास की समझ और पत्रकारिता के जुनून के साथ, प्राची को खाली समय में उपन्यास पढ़ना और विश्व सिनेमा देखना पसंद है।

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