
UPSC Success Story: जज्बा हो तो ऐसा! IPS पूनम दलाल की कहानी, 3 महीने के बच्चे के साथ पास किया UPSC
IPS Success Story: IPS पूनम दलाल की सफलता की कहानी इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि अगर मन में कुछ हासिल करने की ठान ली जाए, तो कोई भी शारीरिक चुनौती या पारिवारिक जिम्मेदारी रास्ते की रुकावट नहीं बन सकती।
IPS Poonam Dalal Success Story: यह कहानी है हिम्मत और जज्बे की, जो हर उस इंसान को प्रेरणा देती है जो अपनी बड़ी जिम्मेदारी के साथ-साथ अपने सपने को भी पूरा करना चाहता है। हम बात कर रहे हैं आईपीएस पूनम दलाल की, जिन्होंने दिखा दिया कि मातृत्व और करियर दोनों को एक साथ साधा जा सकता है।
पूनम दलाल की सफलता की कहानी इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि अगर मन में कुछ हासिल करने की ठान ली जाए, तो कोई भी शारीरिक चुनौती या पारिवारिक जिम्मेदारी रास्ते की रुकावट नहीं बन सकती।
9 महीने की प्रेग्नेंसी में प्रीलिम्स की चुनौती
पूनम दलाल का सपना था कि वह देश की सबसे कठिन परीक्षा, यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (CSE) को पास करें और एक बेहतर रैंक पाएं। जब वह अपनी तैयारी के अंतिम चरण में थीं, तो उनकी जिंदगी में एक बड़ा बदलाव आया—वह मां बनने वाली थीं।
जब यूपीएससी प्रीलिम्स परीक्षा की तारीख आई, तब पूनम नौ महीने की गर्भवती थीं। इतनी मुश्किल शारीरिक स्थिति में भी, उन्होंने हार नहीं मानी। परीक्षा हॉल में बैठने का फैसला करना ही अपने आप में एक बहुत बड़ी चुनौती थी, लेकिन उनके मजबूत इरादों के आगे यह मुश्किल छोटी पड़ गई। दर्द और बेचैनी को सहते हुए भी उन्होंने सफलतापूर्वक प्रीलिम्स की परीक्षा दी और उसे पास भी किया।
3 महीने के बच्चे के साथ मेंस परीक्षा
इसके बाद, पूनम के सामने सबसे बड़ी परीक्षा थी—मेंस और इंटरव्यू। जब मेंस की परीक्षा हुई, तब पूनम एक तीन महीने के छोटे बच्चे की मां बन चुकी थीं। एक तरफ बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी, रातभर जागना और दूसरी तरफ लंबी-लंबी घंटों की पढ़ाई और कई दिनों तक चलने वाली मेंस की परीक्षा देना।
मेंस के दौरान, पूनम अपने बच्चे और पढ़ाई के बीच बेहतरीन तालमेल बिठाया। उनके पति और परिवार ने इस दौरान उन्हें पूरा सपोर्ट दिया, जिससे वह परीक्षा पर पूरी तरह ध्यान दे सकीं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि सही पारिवारिक सपोर्ट और खुद पर विश्वास हो तो कोई भी बाधा हमें रोक नहीं सकती।
सफलता और प्रेरणा
यह पूनम की पहली सफलता नहीं थी। इससे पहले भी वह दिल्ली पुलिस में नौकरी कर चुकी थीं और उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में एक बार छोटी रैंक भी हासिल की थी। लेकिन उनका लक्ष्य IPS या IAS बनना था, जिसके लिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर फिर से तैयारी करने का जोखिम उठाया था।
अपनी आखिरी कोशिश में, उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से साल 2015 की यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 308 हासिल की और आखिरकार उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (IPS) मिली।
IPS पूनम दलाल की कहानी उन सभी महिलाओं के लिए एक मिसाल है जो मानती हैं कि मातृत्व या अन्य जिम्मेदारियां उनके करियर के रास्ते में रुकावट बन सकती हैं। उन्होंने दुनिया को बताया कि अगर आप अपने लक्ष्य पर डटे रहते हैं, तो समय और हालात चाहे कितने भी विपरीत क्यों न हों, आप अपने सपने पूरे कर सकते हैं। यह सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास की जीत की कहानी है।





