
UPSC Success Story: UPSC में दो बार फेल; फिर भी नहीं मानी हार, मिलिए देश की जाबांज IPS अधिकारी अंकिता शर्मा से
UPSC IPS Success Story: छत्तीसगढ़ कैडर की जाबांज आईपीएस अधिकारी अंकिता शर्मा की यात्रा खास है, क्योंकि उन्होंने एक बेहतरीन कॉर्पोरेट करियर के मौके को ठुकराकर देश सेवा की वर्दी चुनी।
IPS Ankita Sharma Success Story: देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा हर साल लाखों युवाओं के सपनों की कसौटी बनती है। इस परीक्षा में सफलता पाने वालों में कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जो हमें सिखाती हैं कि दृढ़ निश्चय और हार न मानने का जज्बा हो तो बड़ी से बड़ी बाधा को पार किया जा सकता है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है छत्तीसगढ़ कैडर की जाबांज आईपीएस अधिकारी अंकिता शर्मा की। अंकिता शर्मा की यात्रा इसलिए खास है, क्योंकि उन्होंने एक बेहतरीन कॉर्पोरेट करियर के मौके को ठुकराकर देश सेवा की वर्दी चुनी।
एमबीए की पढ़ाई के दौरान जागा देश सेवा का सपना
अंकिता शर्मा मूल रूप से छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की रहने वाली हैं। वह शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी थीं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, भिलाई से एमबीए की डिग्री हासिल की और इसमें वह स्वर्ण पदक विजेता भी रहीं।
एमबीए में गोल्ड मेडल हासिल करने के बाद उनके सामने मल्टीनेशनल कंपनियों के रास्ते खुले थे, लेकिन उनका मन कहीं और था। उन्होंने तय कर लिया कि वह कॉर्पोरेट दुनिया की चकाचौंध छोड़कर आईपीएस बनकर देश की सेवा करेंगी।
दो बार की असफलता, तीसरा प्रयास बना ऐतिहासिक
अंकिता शर्मा ने अपने सपने को पूरा करने के लिए दिल्ली में तैयारी शुरू की, लेकिन कुछ ही समय बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा। इसके बाद उन्होंने अपने घर पर रहकर ही सेल्फ-स्टडी के दम पर यूपीएससी की तैयारी जारी रखी। यह सफर आसान नहीं था। शुरुआती दो प्रयासों में उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा।
पहले प्रयास में वह प्रीलिम्स पास करने के बाद मेन्स परीक्षा में चूक गईं। दूसरे प्रयास में तो वह प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं कर पाईं, जो उनके लिए एक बड़ा झटका था। लेकिन अंकिता ने इस असफलता को कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना, अपनी तैयारी की रणनीति बदली और पूरी लगन से तीसरे प्रयास में जुट गईं। उनकी मेहनत रंग लाई और साल 2018 में उन्होंने तीसरे प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में अखिल भारतीय रैंक AIR 203 हासिल कर अपना सपना पूरा किया।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बहादुरी की मिसाल
आईपीएस बनने के बाद अंकिता शर्मा ने अपनी निडरता और उत्कृष्ट प्रशासनिक क्षमताओं से जल्द ही अपनी पहचान बनाई। उन्हें खासकर नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में कई सफल नक्सल विरोधी अभियानों का नेतृत्व करने के लिए जाना जाता है। उनकी इसी बहादुरी और उल्लेखनीय कार्य के लिए उन्हें इंद्र भूषण अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है। अपनी सख्त और कुशल कार्यशैली के चलते उन्हें 'लेडी सिंघम' भी कहा जाता है।
अंकिता शर्मा की सफलता की कहानी लाखों युवाओं, खासकर लड़कियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जो उन्हें सिखाती है कि चाहे रास्ता कितना भी कठिन क्यों न हो, लगन और मेहनत से हर मंजिल हासिल की जा सकती है।





