
UPSC Success Story: Infosys की बेंच से IAS की कुर्सी तक, नितिन सांगवान की प्रेरणादायक UPSC सफलता की कहानी
IAS Success Story: हरियाणा के छोटे से शहर चरखी दादरी से निकलकर, नितिन सांगवान ने एक ऐसी सफलता की कहानी लिखी है जो लाखों UPSC उम्मीदवारों को प्रेरणा देती है।
IAS Nitin Sangwan Success Story : हरियाणा के छोटे से शहर चरखी दादरी से निकलकर, नितिन सांगवान ने एक ऐसी सफलता की कहानी लिखी है जो लाखों UPSC उम्मीदवारों को प्रेरणा देती है। उनकी यात्रा साधारण नहीं थी—इसमें अकैडमिक चुनौतियों से लेकर एक बड़ी आईटी कंपनी की सुरक्षित नौकरी छोड़ने का बड़ा निर्णय शामिल है। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2015 में ऑल इंडिया रैंक 28 (AIR 28) हासिल करके, उन्होंने साबित कर दिया कि सफलता केवल मार्क्स से नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से मिलती है।

बचपन की चुनौतियां और IIT तक का सफर
नितिन सांगवान की शुरुआती शिक्षा औसत रही थी, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। 12वीं कक्षा में उन्हें केमिस्ट्री के पेपर में मुश्किल से पासिंग मार्क्स (सिर्फ 24 अंक) मिले थे। इस बात को उन्होंने बाद में साझा करते हुए कहा था, "नंबर यह तय नहीं करते कि मैं जिंदगी में क्या करूंगा।" इस शुरुआती असफलता को पीछे छोड़ते हुए, उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और फिर आईआईटी मद्रास से एमबीए किया। यह उनकी पढ़ाई के प्रति गंभीर होने का पहला महत्वपूर्ण पड़ाव था।
ग्रैजुएशन के बाद, उन्होंने इंफोसिस (Infosys) जैसी दिग्गज आईटी कंपनी में नौकरी शुरू की। लगभग दो साल तक इंफोसिस में काम करने के दौरान, उन्हें कंपनी की 'बेंच' पर रहने का समय मिला—वह समय जब किसी कर्मचारी को कोई एक्टिंग प्रोजेक्ट आवंटित नहीं होता। यह वही समय था जब उन्हें सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का विचार आया।
UPSC की तैयारी और 'बेंच' का टर्निंग पॉइंट
इंफोसिस में रहते हुए, नितिन सांगवान ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। उनका मानना था कि सिविल सेवा का काम उन्हें जनता के बीच रहकर समाज पर सीधा और पॉजिटिव प्रभाव डालने का अवसर देगा, जो उन्हें कॉर्पोरेट नौकरी में नहीं मिल रहा था।
UPSC की राह आसान नहीं थी। उन्होंने कुल चार प्रयास किए, जिनमें से पहले प्रयास में वह मुख्य परीक्षा तक भी नहीं पहुंच पाए। लेकिन उन्होंने अपनी स्ट्रैटिजी में बदलाव किया और सोशयोलॉजी को ऑप्शनल सब्जेक्ट के रूप में चुना। उनकी खास बात यह थी कि वह तैयारी के दौरान सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रहे और अपने काम के साथ-साथ हर मिनट का सदुपयोग किया। उन्होंने डिजिटल नोट्स बनाए, जिससे काम के बीच में भी पढ़ाई करना आसान हो गया।
IRS अधिकारी से IAS अधिकारी तक
दूसरे और तीसरे प्रयास में सफलता हासिल करने के बाद भी, नितिन सांगवान ने अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा। इन प्रयासों में उन्हें पहले इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS) और अन्य सेवाएं मिलीं। लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य IAS बनना था।
UPSC CSE 2015 में, उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, दृढ़ इच्छाशक्ति और बेहतर स्ट्रैटिजी के दम पर 28वीं रैंक हासिल की और अपने IAS बनने के सपने को पूरा किया। आज IAS नितिन सांगवान गुजरात कैडर के अधिकारी हैं और अपनी प्रेरक कहानी से लाखों छात्रों को यह संदेश दे रहे हैं कि सफलता के लिए स्कूल के अच्छे मार्क्स नहीं, बल्कि जीवन में दृढ़ता और आत्मविश्वास सबसे ज्यादा जरूरी हैं।





