MBBS छात्रों की पढ़ाई के लिए आईं अज्ञात लाशें पी रहीं लाखों का केमिकल, परिजन शव लेने पहुंच रहे मेडिकल कॉलेज
श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज में अज्ञात लाशें लाखों का केमिकल ‘पी’ जा रही हैं। मामला यह है कि एसकेएमसीएच में छात्रों को डिसेक्शन सीखने के लिए पुलिस जो अज्ञात शव दे जा रही है, उनको लेने परिजन 72 घंटे से पहले ही मेडिकल कॉलेज पहुंच जा रहे हैं।
बिहार में मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज में अज्ञात लाशें लाखों का केमिकल ‘पी’ जा रही हैं। मामला यह है कि एसकेएमसीएच में छात्रों को डिसेक्शन (चीरफाड़) सीखने के लिए पुलिस जो अज्ञात शव दे जा रही है, उनको लेने परिजन 72 घंटे से पहले ही मेडिकल कॉलेज पहुंच जा रहे हैं। पुलिस इन अज्ञात लाशों की पहचान का प्रयास किए बिना ही आननफानन में मेडिकल कॉलेज भेज दे रही है। एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. शोभा कुमारी ने बताया कि लाशों को सुरक्षित रखने के लिए हमें उनमें फॉर्मेलिन केमिकल लगाना पड़ता है, लेकिन जब हम यह केमिकल डालकर लाश को डिसेक्शन के लिए लेकर जाते हैं, तभी परिजन पहुंच कर शव ले जाते हैं। ऐसे में हमारा फॉर्मेलिन बर्बाद हो जाता है। इससे नुकसान हो रहा है।
एक शव सुरक्षित रखने में 4-5 हजार का खर्च
डॉक्टरों ने बताया कि एक शव में 20 से 25 लीटर फॉर्मेलिन का इस्तेमाल होता है। पांच लीटर फॉर्मेलिन की कीमत लगभग एक हजार रुपये है। एक शव को सुरक्षित रखने में चार से पांच हजार रुपये का फॉर्मेलिन खर्च हो रहा है। बताया कि मेडिकल कॉलेज में लगातार पुलिस की लापरवाही से फॉर्मेलिन की बर्बादी हो रही है। पिछले दिनों मेडिकल कॉलेज में फॉर्मेलिन की काफी कमी हो गई थी। बीएमएसआईसीएल से इसकी आपूर्ति नहीं हो रही थी। हालांकि विभागाध्यक्ष का कहना है कि अभी मेडिकल कॉलेज में फॉर्मेलिन की कमी नहीं है।
अज्ञात शवों को पहुंचाना है मेडिकल कॉलेज
सरकार से दो वर्ष पहले सभी जिलों की पुलिस को अज्ञात लाशों को मेडिकल कॉलेज पहुंचाने का निर्देश दिया गया था। कॉलेजों में शवों की कमी के कारण यह निर्देश दिया गया था, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है। मेडिकल कॉलेज के सूत्रों ने बताया कि पुलिस जो शव भेजती है, उसकी या तो पहचान हो जाती है या वह सड़ी-गली या कटी होती है। इन लाशों पर मेडिकल कॉलेज के छात्रों को डिसेक्शन नहीं सिखाया जा सकता।
25 मेडिकल छात्रों पर एक शव की जरूरत
नेशनल मेडिकल कमीशन के नियमानुसार मेडिकल कॉलेजों में डिसेक्शन सीखने के लिए 25 छात्रों पर एक शव की जरूरत है। एसकेएमसीएच में अभी चार शव हैं, जिनपर छात्र डिसेक्शन सीख रहे हैं। विभागाध्यक्ष का कहना है कि हमलोगों ने डिसेक्शन के लिए छात्रों के समूह बना दिये हैं। अभी कोई परेशानी नहीं हो रही है।
बिहार के 2 मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की 70 सीटें बढ़ीं
बिहार से एमबीबीएस करना चाह रहे नीट यूजी छात्रों के लिए खुशखबरी है। नेशनल मेडिकल कमीशन ने नालंदा मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए 50 सीटों की बढ़ोतरी की गयी। एनएमसीएच में अब 200 सीटों पर एमबीबीएस यूजी स्नातक पर नामांकन लिया जाएगा। कॉलेज की प्राचार्या डॉ. प्रो. उषा कुमारी ने बताया कि वर्ष 2026-27 से कॉलेज में 150 से बढ़ कर 200 सीटों पर नामांकन होगा। इसके लिए एनएमसी की ओर से मंजूरी दी गयी है। प्राचार्या ने इस उपलब्धि को अस्पताल के अधीक्षक, विभागाध्यक्ष, चिकित्सक, सीनियर रेजिडेंट्स, पीजी स्टूडेंट, नर्सिंग स्टाफ, प्रशासनिक कर्मचारियों के सतत प्रयास का परिणाम बताते हुए कहा कि टीम वर्क से यह सफलता मिली है।
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Pankaj Vijayपंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार
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पंकज विजय ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। अमर उजाला समाचार पत्र में रिसर्च, संपादकीय और करियर एजुकेशन जॉब्स डेस्क पर काम किया। यहां उन्हें फीचर लेखन व रिपोर्टिंग का भी मौका मिला। इसके बाद उन्होंने आज तक डिजिटल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आज तक वेबसाइट पर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और एजुकेशन व रोजगार जगत से जुड़ी खबरें लिखीं। इसके बाद एनडीटीवी ऑनलाइन में एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर इस विषय में अपनी समझ को और व्यापक बनाया। एनडीटीवी की पारी के बाद वे लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े और बीते 9 वर्षों से करियर एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर रहे हैं।
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भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा, गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में एमए व दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में बीए ऑनर्स किया है। एनसीसी सी सर्टिफिकेट होल्डर हैं जिसके चलते उन्हें रक्षा क्षेत्र जैसे पुलिस व सेनाओं की भर्तियों की बेहतर समझ है।
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