MBBS : 18 साल से एमबीबीएस में लटके छात्र, क्या है सीमा, बर्खास्त क्यों नहीं कर पा रहा मेडिकल कॉलेज

लाइव हिन्दुस्तान, ईश्वर शरण शुक्ल, प्रयागराज
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मेडिकल की 5.5 साल की एमबीबीएस पढ़ाई में मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के तीन छात्र 13, 16 और 18 साल बाद भी शैक्षिक पाठ्यक्रम पूरा नहीं कर सके हैं। तीनों छात्र हर साल किसी न किसी विषय में फेल हो रहे हैं, जबकि उनके साथ पढ़ने वाले छात्र डॉक्टर बनकर नौकरी भी कर रहे हैं।

MBBS : 18 साल से एमबीबीएस में लटके छात्र, क्या है सीमा, बर्खास्त क्यों नहीं कर पा रहा मेडिकल कॉलेज

मेडिकल की कठिन प्रवेश परीक्षा पास करने के बाद एमबीबीएस में प्रवेश मिलता है। उसके बाद डॉक्टरी की पढ़ाई 5.5 साल में पूरा हो जाती है। इसमें 4.5 साल का शैक्षिक पाठ्यक्रम और एक साल की इंटर्नशिप शामिल होती है। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज ( Moti Lal Nehru Medical College Prayagraj ) में तीन ऐसे छात्र हैं, जो साढ़े चार साल का शैक्षिक पाठ्यक्रम 18, 16 और 13 साल बाद भी पास नहीं कर सके। तीनों छात्र हर साल किसी न किसी विषय में फेल जाते हैं। इनके फेल होने का क्रम पिछले कई साल से जारी है।

स्थिति यह है कि इनके साथ प्रवेश लेने वाले छात्र एमबीबीएस के साथ ही इसके आगे की पढ़ाई पूरी कर नौकरी कर रहे हैं। पिछले दिनों इसी तरह का मामला गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भी सामने आया था, जहां एक छात्र ने 17 साल में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी। वहीं, 28 साल से एमबीबीएस कर रहे छात्र को परिणाम घोषित होने का इंतजार है।

2008 में लिया प्रवेश लेकिन पूरा नहीं हुआ एमबीबीएस

इन तीन में से प्रयागराज के पीपलगांव के रहने वाले छात्र ने सीपीएमटी (कंबाइंड प्री-मेडिकल टेस्ट) पास करके 18 साल पहले 2008 में प्रवेश लिया था जबकि गाजीपुर के एक छात्र ने 13 साल पूर्व 2013 में प्रवेश लिया था। वहीं, तीसरे छात्र का प्रवेश 16 साल पहले 2010 में हुआ था। मेडिकल कॉलेज के सूत्रों के अनुसार तीनों छात्र एमबीबीएस के अंतिम वर्ष के किसी न किसी विषय में फेल हो जाते हैं, इसलिए उन्हें इंटर्नशिप का भी मौका नहीं मिल पा रहा है।

मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वीके पांडेय ने कहा, 'संबंधित छात्र यदि सही से पढ़ाई करते तो फेल होने का कोई सवाल ही नहीं है। वे परीक्षा को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। छात्रों का यह व्यक्तिगत निर्णय है, इसमें मेडिकल कॉलेज कुछ नहीं कर सकता।'

छात्रों पर लागू नहीं अधिकतम समय सीमा

नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने 2019 से एमबीबीएस को पूरा करने की अधिकतम समय सीमा नौ साल निर्धारित की थी। इससे पूर्व कोई समय सीमा तय नहीं थी। इसी का फायदा इन तीनों छात्रों को मिल रहा है क्योंकि इनका प्रवेश 2019 से पहले हुआ था।

एमबीबीएस के लिए 18 विषयों की परीक्षा

एमबीबीएस को पूरा करने के लिए प्रथम वर्ष में एनाटॉमी, बायोकेमिस्ट्री, फिजियोलॉजी, द्वितीय वर्ष में फॉरेंसिक मेडिसिन, पैथोलॉजी, फार्माकोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, क्लीनिकल, तृतीय वर्ष में मेडिसिन एंड अलाइड में साइकाइट्री, डर्मेटोलॉजी, ऑब्स्टेट्रिक्स, गायनी, पीडियाट्रिक्स, सर्जरी के अलावा एनेस्थिसियोलॉजी, ईएनटी, ऑप्थल्मोलॉजी और ऑर्थोपेडिक्स के पेपर होते हैं। जूनियर डॉक्टरों के अनुसार अंतिम वर्ष में सर्जरी, पीडियाट्रिक, मेडिसिन और गायनी विषय का पेपर अधिक कठिन और विस्तृत होता है।

Pankaj Vijay

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पंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार

शॉर्ट बायो पंकज विजय एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में livehindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे करियर, स्कूल व हायर एजुकेशन, जॉब्स से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। 9 वर्षों से यहां इसी भूमिका में हैं। सरकारी भर्तियों, बोर्ड व एंट्रेंस एग्जाम, प्रतियोगी परीक्षाओं, उनके परिणाम, बदलते दौर में करियर की नई राहों, कोर्स, एडमिशन एवं नए जमाने के रोजगार के लिए जरूरी स्किल्स से जुड़ी अपडेट तेजी से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।


15 से अधिक सालों का अनुभव

पंकज विजय ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। अमर उजाला समाचार पत्र में रिसर्च, संपादकीय और करियर एजुकेशन जॉब्स डेस्क पर काम किया। यहां उन्हें फीचर लेखन व रिपोर्टिंग का भी मौका मिला। इसके बाद उन्होंने आज तक डिजिटल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आज तक वेबसाइट पर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और एजुकेशन व रोजगार जगत से जुड़ी खबरें लिखीं। इसके बाद एनडीटीवी ऑनलाइन में एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर इस विषय में अपनी समझ को और व्यापक बनाया। एनडीटीवी की पारी के बाद वे लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े और बीते 9 वर्षों से करियर एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर रहे हैं।


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भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा, गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में एमए व दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में बीए ऑनर्स किया है। एनसीसी सी सर्टिफिकेट होल्डर हैं जिसके चलते उन्हें रक्षा क्षेत्र जैसे पुलिस व सेनाओं की भर्तियों की बेहतर समझ है।


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