
MBBS : 11 वर्ष से एमबीबीएस कर रहे छात्र के दारोगा पिता 3 बार वादा करके नहीं आए, अब यह कदम उठाएगा कॉलेज
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 11 साल से एमबीबीएस कर रहे छात्र के दारोगा पिता ने आने का तीन बार अलग-अलग समय दिया। सोमवार को उन्होंने आने का वादा किया था। इसके बावजूद नहीं आए। अब कॉलेज रजिस्टर्ड डाक से चेतावनी पत्र भेजेगा।
गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 11 वर्ष से एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहे छात्र का मामला खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा मोबाइल से छात्र के पिता से संपर्क किया गया। दारोगा पिता ने तीन बार अलग-अलग समय दिया। सोमवार को उन्होंने आने का वादा किया था। इसके बावजूद नहीं आए। अब कॉलेज प्रशासन उन्हें रजिस्टर्ड डाक से चेतावनी पत्र देने का फैसला किया है। रजिस्टर्ड पत्र में उन्हें मेडिकल कॉलेज में उपस्थित होने के लिए सात दिन की मियाद दी जाएगी।
उधर, कॉलेज की एकेडमिक कमेटी ने छात्र को भी नोटिस देने का फैसला किया है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2014 बैच का एक छात्र 11 वर्ष से एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहा है। उसने सिर्फ एक बार एमबीबीएस प्रथम वर्ष की परीक्षा दी थी। इस दौरान प्रथम वर्ष के तीनों विषयों में वह फेल हो गया, जिसके बाद उसने अब तक कोई परीक्षा नहीं दी। वह मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में रहता है। आपके चहेते समाचार पत्र ‘हिन्दुस्तान’ ने इस खबर को प्राथमिकता से प्रकाशित किया। जिसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन की नींद टूटी है। इसी क्रम में सबसे पहले एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहे छात्र के पिता को तलब करने का फैसला हुआ है।
प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि मामले को मेडिकल कॉलेज की एकेडमिक कमेटी को सौंपा गया है। एकेडमिक कमेटी के सदस्यों ने ही छात्र के पिता से फोन पर संपर्क किया था। हर बार वह एक-दो दिन में कॉलेज आने की बात कहते हैं।
क्या है मामला, छात्र को क्यों नहीं निकाल पा रहा मेडिकल कॉलेज
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 2014 बैच का एक एमबीबीएस छात्र एक दशक से अधिक समय से प्रथम वर्ष में ही अटका हुआ है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि समस्या को और भी जटिल बनाते हुए, छात्र के पिता ने कॉलेज अधिकारियों के फोन कॉल को बार-बार अनसुना कर दिया है और अपने बेटे के शैक्षणिक भविष्य के प्रति कोई चिंता नहीं दिखाई है। कॉलेज अधिकारियों के अनुसार छात्र 2014 से नए स्नातक छात्रावास में रह रहा है, लेकिन पिछले 11 वर्षों में एक बार भी प्रथम वर्ष की एमबीबीएस परीक्षा उत्तीर्ण करने में असफल रहा है। वर्ष 2015 में परीक्षा में असफल होने के बाद, उसने न तो दोबारा परीक्षा फॉर्म भरा और न ही बाद में परीक्षा दी। वह रेगुलर पढ़ाई भी नहीं कर रहा। अधिकारियों ने बताया कि प्रचलित मेडिकल शिक्षा नियमों के अनुसार प्रथम वर्ष की एमबीबीएस परीक्षा में असफल होने वाले छात्र को नए सिरे से दाखिला लेने की आवश्यकता नहीं होती है और वह केवल परीक्षा फॉर्म भरकर दोबारा परीक्षा दे सकता है। इस प्रावधान का हवाला देते हुए, छात्र का दाखिला तकनीकी रूप से वैध बना हुआ है, जिससे कॉलेज को उसका एडमिशन रद्द करने से रोका जा रहा है।
इसके अलावा जब छात्र का प्रवेश हुआ था तब मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) के नियमों के तहत प्रवेश होता था। एमसीआई के नियमों में कहीं भी छात्रों के लिए कोई बंदिश नहीं थी। वह कितने भी वर्ष में पढ़ाई पूरी कर सकते थे। वर्ष 2023 में एनएमसी के प्रावधान मेडिकल कॉलेज पर लागू हुए। एनएमसी में नियम सख्त हैं। इस छात्र पर एनएमसी के नियम लागू होंगे या नहीं यह विधिक सवाल है। एनएमसी के मौजूदा नियमों के अनुसार, MBBS छात्रों को पहले साल की परीक्षा चार अटेंप्ट में पास करनी होती है और पूरा कोर्स 9 साल (पढ़ाई और इंटर्नशिप को मिलाकर) में पूरा करना होता है।
यह छात्र 2014 बैच का है, जब मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) मेडिकल एजुकेशन को रेगुलेट करती थी। 2014 से पहले एमसीआई के नियम स्नातक चिकित्सा शिक्षा विनियम, 1997 के अंतर्गत आते थे इसलिए यह मामला रेगुलेटरी ग्रे एरिया में आता है, जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई करना मुश्किल हो रहा है।
एनएमसी से स्पष्ट निर्देश मिलने के बाद ही अंतिम निर्णय
हालात और भी पेचीदा हो गए हैं क्योंकि छात्र का दाखिला जारी रहने के कारण उसे हॉस्टल से निकालना मुश्किल हो रहा है। परीक्षा फॉर्म के साथ ही मेस शुल्क भी लिया जाता है, इसलिए छात्र ने कई वर्षों से मेस शुल्क नहीं चुकाया है, लेकिन फिर भी उसे मुफ्त भोजन की सुविधा मिल रही है। कॉलेज ने अब राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद (एनएमसी) से इस संबंध में मार्गदर्शन मांगा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने कहा एनएमसी से स्पष्ट निर्देश मिलने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। एनएमसी ही देश में मेडिकल शिक्षा की देखरेख करती है।





